वीणा नाम मुझे दिया
वीणा वैष्णव
कांकरोली
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कितने प्यार से माँ ने, वीणा नाम मुझे दिया।
शारदे ने गोद धारण कर, नाम सार्थक कर दिया।।
नाम के अनुरूप ही, काम सदा मैंने किया ।
ना लजाया माँ गोद, नाम अनुरूप काम किया।।
बन निडर, हर मुसीबत का सामना किया।
धरती माँ की गोद को, सदा हरा भरा किया।।
जन्नत सुख माँ की गोद मैं, सदा मैंने पाया।
रुखा सुखा जो भी था, माँ के हाथ से खाया।।
यही सुख पाने को, कान्हा देखो धरती आया।
मचा धूम गोकुल, बहू आनंद संग ग्वाल पाया।।
जन्म देवकी दिया, गोद जसोदा सुलाया।
दो माँ की गोद पा, कान्हा फुला ना समाया।।
कहती वीणा माँ गोद, कोई कभी न बिसराया।
चहुँधाम आनंद, सब ने मांँ गोद में पाया।।
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परिचय : कांकरोली निवासी वीणा वैष्णव वर्तमान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय फरारा में अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। कवितायें लिखने में आपकी गहन रूचि है।
आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, ल...






















