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वीणा नाम मुझे दिया
कविता

वीणा नाम मुझे दिया

वीणा वैष्णव कांकरोली ******************** कितने प्यार से माँ ने, वीणा नाम मुझे दिया। शारदे ने गोद धारण कर, नाम सार्थक कर दिया।। नाम के अनुरूप ही, काम सदा मैंने किया । ना लजाया माँ गोद, नाम अनुरूप काम किया।। बन निडर, हर मुसीबत का सामना किया। धरती माँ की गोद को, सदा हरा भरा किया।। जन्नत सुख माँ की गोद मैं, सदा मैंने पाया। रुखा सुखा जो भी था, माँ के हाथ से खाया।। यही सुख पाने को, कान्हा देखो धरती आया। मचा धूम गोकुल, बहू आनंद संग ग्वाल पाया।। जन्म देवकी दिया, गोद जसोदा सुलाया। दो माँ की गोद पा, कान्हा फुला ना समाया।। कहती वीणा माँ गोद, कोई कभी न बिसराया। चहुँधाम आनंद, सब ने मांँ गोद में पाया।। . परिचय : कांकरोली निवासी वीणा वैष्णव वर्तमान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय फरारा में अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। कवितायें लिखने में आपकी गहन रूचि है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, ल...
कैसे उद्गम होत कवित का
कविता

कैसे उद्गम होत कवित का

नफे सिंह योगी मालड़ा सराय, महेंद्रगढ़(हरि) ******************** कैसे उद्गम होत कवित का, कैसे उमड़े उर से धारा ? कैसे बहे भाव भंवर बन, अधर भेद सब खोलें सारा।। जब सब जागे सो जाते हैं, तब चुपचाप ख्वाब आता है। उमड़-घुमड़कर, डूब-डूबकर, झूम-झूमकर मन गाता है।। पागल दिल को कुछ ना सूझे अपनी धुन में नाचे गाए। कल्पनाओं के तार समेटे, तब मनआंगन कवित समाए।। सब सुख फीके पड़ जाते हैं, बजता जब तेरा इकतारा। कैसे बहे भाव भँवर बन, अधर भेद सब खोलें सारा ।। तेरे आने की आहट से, मन आनंदित हो जाता है । हँसकर हृदय हाव-भाव के, बीज कलम से बो जाता है।। कलम पकड़ बैठा हो जाता, छोड़ नींद अक्सर रातों में। करे सुबह स्वागत सूरज, बीते रात बातों-बातों में ।। रोम-रोम में रमे रोशनी, मिट जाता मन का अंधियारा। कैसे बहे भाव भँवर बन, अधर भेद सब खोलें सारा ।। कलम कदम से चित पे चढ़के, मन की बात जुबां पे लाए। कहीं ज्ञान की गंग...
कवि श्री विनोदजी गुर्जर को हिंदी रक्षक मंच द्वारा काव्यश्री सम्मान
साहित्य समाचार

कवि श्री विनोदजी गुर्जर को हिंदी रक्षक मंच द्वारा काव्यश्री सम्मान

स्वर संगीत कराओके क्लब की मधुरमय संगीत के बीच कवि श्री विनोदजी गुर्जर को हिंदी रक्षक मंच द्वारा काव्यश्री सम्मान प्रदान किया गया। इंदौर : महू। बीती रात स्वर संगीत कराओके क्लब द्वारा आयोजित संगीत निशा में पधारे गणमान्य सर्व श्री आद. राधेश्याम यादव, श्री कैलाश दत्त पांडेय, श्रीमती अरुणा दत्त पांडेय, डॉ. विमल सक्सैना एवं डॉ. बी. के. ठक्कर एवं मधु पटेल, श्री हेमंत पटेल द्वारा दीप प्रज्वलन कर आयोजन की शुरुआत की। लायनेस क्लब अध्यक्षा श्रीमती पायल परदेशी ने आकर सभी लोगों का उत्साहवर्धन किया। कई स्वर साधको ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। इसी क्रम में कार्यक्रम की शुरुआत महेन्द्र तौमर द्वारा सांई भजन से एवं पी एस दुबे द्वारा गणेश वंदना से हुई। इसके उपरांत बढ़ते क्रम में ५० स्वर साधकों द्वारा रात्रि १२:४५ तक प्रस्तुति दी जिसमें बाहरी क्षेत्रों से पधारे सुश्री क्षमा साद व भूपेंद्र जी ...
हर श्वांश गरजे सम सिंह
कविता

हर श्वांश गरजे सम सिंह

सुरेश चंद्र भंडारी धार म.प्र. ******************** ओ भगवाधारी, है कहाँ तुम्हारी हुंकारें, हिंदुत्व कहाँ, हैं कहाँ गतुम्हारी तलवारें। सिहासन सौंपा था कि कुछ बदलाव मिले, अफसोस सदा, हमको घावों पर घाव मिले। विधर्मीयो से लड़ते हुवे गुर्राए झल्लाये थे, हिन्दू सलामत रहे, योगी मोदी चिल्लाए थे। हिन्दू हितेषी हो, सपना हमने दिन में देखा था, आज़म अखिलेश को सत्ता से बाहर निकाला था। शिव गणपति की यात्रा पर, नित नए हुड़दंग, हिन्दू इस सरकार में, रहता है हरदम तंग। आँखे बंद, विश्वाश हम उनका करने लगे, पुण्य धरा, प्रतिबंधित तिरंगा, अब तो जागे। दिन के उजाले में, कमलेश का संहार किया, भरोसा जितने में, अहो, कैसा उपहार दिया। हत्या नहीं, धब्बा है हमारी हिन्दू अस्मिता पर, जय श्रीराम, उद्घोष जड़वत, मौन आत्मा पर। दम्भ भरने वाले, स्वयंभू रक्षक, आज है मौन , तुम्हारे रहते, कलंकित कर्म, करने वाले है ये कौन । कहते है...
पिया गये परदेश
कविता

पिया गये परदेश

मनोरमा जोशी इंदौर म.प्र. ******************** अखियाँ उदासी मन में न चैना, कैसे बिताऊ सजन तुम बिन ये रैना। जब से पी मैने प्रेम का प्याला, गुँथू मैं निशदिन प्रेम की माला, दर्पण के आगे अपनी ही कहना। कैसे बिताऊ सजन तुम बिन ये रैना। सूना है तन मन सूना है अंगना, सूना है जीवन तुम मेरे संगना, रोता है मन मेरा बहते है नैना। कैसे बिताऊ सजन तुम बिन ये रैना। यादों के अंगना में सजना की बतियाँ, कटती नहीं री सखी कारी ये बतियाँ, विरह अगन में पल पल में दहना, कैसे बिताऊ सजन तुम बिन ये रैना। . लेखिका का परिचय :-  श्रीमती मनोरमा जोशी का निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है। आपका साहित्यिक उपनाम ‘मनु’ है। आपकी जन्मतिथि १९ दिसम्बर १९५३ और जन्मस्थान नरसिंहगढ़ है। शिक्षा - स्नातकोत्तर और संगीत है। कार्यक्षेत्र - सामाजिक क्षेत्र-इन्दौर शहर ही है। लेखन विधा में कविता और लेख लिखती हैं। विभिन्न पत्र-पत्रि...
दर्द माली का
कविता

दर्द माली का

भारत भूषण पाठक धौनी (झारखंड) ******************** व्यथित बहुत हुआ मन। शाक ने माली से पूछा जब माली तूने मेरे लिये आज तक किया ही आखिर भला क्या है ??? दर्द से तड़प उठा माली। ये तो शाक ने आज दे दी थी संभवतः आज गाली।। उस शाक को अब तक जिसने सींचा था पसीने से अपने। आज शाक उससे है पूछ रहा। आज तक आखिर मेरे लिए तूने किया ही क्या है ????? रो रहा था माली यह सोचकर। धूप में जले हाथों को देखकर।। आखिर उसने उसके लिए भला ही आज तक किया ही क्या है ??? . लेखक परिचय :-  नाम - भारत भूषण पाठक लेखनी नाम - तुच्छ कवि 'भारत ' निवासी - ग्राम पो०-धौनी (शुम्भेश्वर नाथ) जिला दुमका(झारखंड) कार्यक्षेत्र - आई.एस.डी., सरैयाहाट में कार्यरत शिक्षक योग्यता - बीकाॅम (प्रतिष्ठा) साथ ही डी.एल.एड.सम्पूर्ण होने वाला है। काव्यक्षेत्र में तुच्छ प्रयास - साहित्यपीडिया पर मेरी एक रचना माँ तू ममता की विशाल व्योम को स्थान...
शिक्षा
कविता

शिक्षा

श्याम सुन्दर शास्त्री (अमझेरा वर्तमान खरगोन) ******************** शिक्षा  नहीं है कोई भिक्षा, गुरु से ली गई दीक्षा धैर्य की परीक्षा जीवन में संघर्ष की समीक्षा कर्म के परिणाम की करना है थोड़ी प्रतीक्षा जब मन में हो कोई अभिप्सा ईश्वर से मिलती तितिक्षा यदि हमने प्रकृति की नहीं  की उपेक्षा आहार विहार, रहन-सहन संसाधन, पर्यावरण से मिलती रहेंगी हमें सुरक्षा, जीजिविषा की है यदि हमें अपेक्षा करें ध्यान, प्राणायाम  सुबह-शाम रखें सत्य, अहिंसा और नैतिक शिक्षा मुमुक्षा की यदि है अभिलाषा करों न जग में कोई तमाशा . लेखक परिचय :- श्याम सुन्दर शास्त्री, सेवा निवृत्त शिक्षक (प्र,अ,) मूल निवास:- अमझेरा वर्तमान खरगोन शिक्षा:- बी,एस-सी, गणित रुचि:- अध्यात्म व विज्ञान में पुस्तक व साहित्य वाचन में रुचि ... आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित ...
स्त्री का अस्तित्व
कहानी

स्त्री का अस्तित्व

अंजना झा फरीदाबाद हरियाणा ******************** रूपा तीन विद्यालय की संचालिका है। इतनी कर्मठ महिला अपने आप सम्मान की पात्रा हो जाती है। कितनों को ही रोजगार देने में सक्षम। एक समय ऐसा भी था जब वह अपनी जिंदगी से निराश हो चुकी थी। जीवन का चक्र तो अनवरत चलता है जिसमें दिवस के उजाले के साथ रात्रि की कालिमा का भी आवागमन होता है। मैं जिस रूपा को जानती थी महाविद्यालय के दिनों में वो अपने आप में ही सिमटी रहती थी, और मैं भी अंतर्मुखी, स्वाभाविक था दोनों इक दूजे के ज्यादा करीब नहीं थे। पर अरसे बाद जब रेल में यात्रा के दौरान हम दोनों आमने सामने की सीट पर मिले तो हर्षातिरेक से भर आलिंगनबद्ध हो गए। दोनों का ही व्यक्तित्व परिवर्तित मैं उम्र के इस पड़ाव पर अंतर्मुखी से बहिर्मुखी और रूपा भी व्यावसायिक महिला के अनुसार मिलनसार। थोड़ी देर इक दूजे की पारिवारिक जानकारी ली हम दोनों ने, पर मैंने महसूस किया अतीत ...
गम के सिवा
गीत

गम के सिवा

विनोद सिंह गुर्जर महू (इंदौर) ******************** गम के सिवा क्या दिया मैंने तुमको, तेरी जिंदगी से चला जाऊंगा में। तेरी आंख में आंसुओं की झड़ी हो, हरगिज नहीं देख अब पाऊंगा में।।... मुझे भूल जाना सपना समझकर, दिल में ना रखना कोई याद मेरी। मेहफूज रखे खुदा हर बला से, चाहे ज़िंदगी कर दे बर्बाद मेरी।। दुआओं भरे गीत अब गाऊंगा में।.. तेरी जिंदगी से चला जाऊंगा में। तेरी आंख में आंसुओं की झड़ी हो, हरगिज नहीं देख अब पाऊंगा में।।... उन रास्तों पर कभी तुम ना जाना, जहां बीती यादें सतायेंगी तुमको। गूंजेंगी कानों में आवाज मेरी, बुलायेंगी तुमको,रूलायेंगी तुमको।। लेकिन नजर ना कहीं आऊंगा में।.. तेरी जिंदगी से चला जाऊंगा में। तेरी आंख में आंसुओं की झड़ी हो, हरगिज नहीं देख अब पाऊंगा में।।... . परिचय :-   विनोद सिंह गुर्जर आर्मी महू में सेवारत होकर साहित्य सेवा में भी क्रिया शील हैं। आप अभ...
शरणागत
कविता

शरणागत

धैर्यशील येवले इंदौर (म.प्र.) ******************** मेरे पापो का हो शमन मेरे दंभ का हो दमन भीतर ही भीतर लड़ रहा हूँ मदद करो हे परमपिता ।। ज्ञान के भरम में स्वार्थ के करम में तिनका तिनका बिखर रहा हूँ मदद करो हे परमपिता ।। क्रोधाग्नि में जला हूँ कुमार्ग पर चला हूँ अब प्रायश्चित कर रहा हूँ मदद करो हे परमपिता ।। करुणा जगा कर अश्रुओं से भिगा कर ताप, तमस धो रहा हूँ मदद करो हे परमपिता ।। नश्वर था, अमर समझ बैठा चाकर था, ईश्वर समझ बैठा जीवन तुझे अर्पित कर रहा हूँ मदद करो हे परमपिता ।। . परिचय :- नाम : धैर्यशील येवले जन्म : ३१ अगस्त १९६३ शिक्षा : एम कॉम सेवासदन महाविद्याल बुरहानपुर म. प्र. से सम्प्रति : १९८७ बैच के सीधी भर्ती के पुलिस उप निरीक्षक वर्तमान में पुलिस निरीक्षक के पद पर पीटीसी इंदौर में पदस्थ। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ...
बाबा की शर्ट में जो दाग है
कविता

बाबा की शर्ट में जो दाग है

जयंत मेहरा उज्जैन (म.प्र) ******************** माँ बाबा की शर्ट में जो दाग है, तू उसे धोती क्यों नहीं कुछ दिन से चेहरा तेरा उदास है, तू सोती क्यों नहीं तेरी चुड़ी, बिंदिया, कँगन बहुत ढूंढे मेने माँ गिरे हुए उस धागे के मोती, तू पिरोती क्यों नहीं माँ बाबा की शर्ट में जो दाग है, तू उसे धोती क्यों नहीं दरवाजे पर जो मिट्टी हे, मेने देख ली माँ तेरे सिरहाने पर जो चिट्टी है, मेने देख ली माँ मेरा नया खिलोना अब शायद ना आएगा मेरा बाबा लौट कर अब वापस ना आएगा बाहर निकाल तेरे अश्कों को, जी भर तू रोती क्यों नहीं माँ बाबा की शर्ट में जो दाग है, तू उसे धोती क्यों नहीं जैसे तु हर कदम मेरे साथ रहती है उन बेटो को भारत माँ की फिक्र, दिन रात रहती है माँ बाबा मेरा महान था, अपने देश की शान था जाते जाते उसने बंदूक चूमि थी आखिरी सांस में भी उसने अपनी धरती चूमि थीं बहुत रात हो गई हैं माँ, अब तू सोती क्यों नहीं ...
एक राष्ट्र–एक चुनाव
आलेख

एक राष्ट्र–एक चुनाव

विश्वनाथ शिरढोणकर इंदौर म.प्र. ****************** विश्व में आज हमारा लोकतंत्र जितना स्थिर, स्थायी, मजबूत और परिपक्व हैं, उतना ही हमारा मतदाता भी परिपक्व होता जा रहा हैंI ऐसे में यह भी सोचना होगा कि क्या ‘एक राष्ट्र एक चुनाव‘ यह देश का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा हैं या महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए एक और नया मुद्दा हमें परोसा जा रहा हैंI भले ही सारे राजनितिक दल और नेता पुरानी तरह से सोचते हो परन्तु वास्तविकता यह हैं कि तकनिकी विकास और सोशल मिडियाने मतदाताओं को परिपक्व किया हैं, इसका अंदाजा नेताओं को शायद नहीं हैं I पक्ष-विपक्ष के राजनितिक दलों के अपने अपने तर्क हो सकते हैं I परन्तु सत्ताधारी और विपक्ष वे ज्वलंत मुद्दे क्यों नहीं उठाते जो देश के सामने विकराल रूप से आज भी चुनौती दे रहे हैं I यह आश्चर्यजनक हैं कि राजनैतिक दल उनके ही द्वारा उठाये गए पुराने मुद्दों को अधूरा छोड़ते जा...
आज समाज मे
कविता

आज समाज मे

सुभाष बालकृष्ण सप्रे भोपाल म.प्र. ******************** समांत:- है पदांत:- आव ‘आज समाज मेँ एक दिखता है, प्रभाव, धर्म कर्म मेँ लोगोँ का दिखता है, भाव, धर्म निरपेक्ष की रीत, को हम मानते, और व्यवहार मेँ भी दिखाते है, सदभाव, साथ रहते हुये, पीढियाँ कई गुजर गईँ, छोटी छोटी बातोँ पर, न दिखाते हैँ, ताव, शातीँ प्रिय हैँ हम, बात सभी ये जानते, हर सँकट मेँ सेवा का दिखाते हैँ, स्वभाव, दुष प्रचार करने का काम करते, कुछ, लोग, हमारे आपसी स्नेह से, नही होता, दुष्प्रभाव.” . लेखक परिचय :-  नाम :- सुभाष बालकृष्ण सप्रे शिक्षा :- एम॰कॉम, सी.ए.आई.आई.बी, पार्ट वन प्रकाशित कृतियां :- लघु कथायें, कहानियां, मुक्तक, कविता, व्यंग लेख, आदि हिन्दी एवं, मराठी दोनों भाषा की पत्रीकाओं में, तथा, फेस बूक के अन्य हिन्दी ग्रूप्स में प्रकाशित, दोहे, मुक्तक लोक की, तन दोहा, मन मुक्तिका (दोहा-मुक्तक संकलन) में प्रकाशित, ३ गीत...
करवा चौथ आस्था और प्रेम
आलेख

करवा चौथ आस्था और प्रेम

केशी गुप्ता (दिल्ली) ********************** कुदरत ने औरत को जितना शारिरिक तौर पर कोमल बनाया है उतना ही उसे प्यार , ममत्व से भरा है . हमारी भारतीय संस्कृति पुरूष प्रधान रही है . औरत का अस्तित्व सदैव पुरूष से जोड़ा जाता है . अधिकतर परंम्पराएं या दायित्व  औरत से ही जोड़े  है . करवा चौथ का व्रत भी उन्ही परंम्पराओं का हिस्सा है . अलग अलग धर्मो और जातियों के अपने अलग अलग रिवाज तथा आस्थाएं है .  महिलाएं कई तरह के व्रत रखती है , जिनमें से एक करवा चौथ का व्रत है . जिसे पत्नी अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती है . कई कंवारी लड़कियां भी अपने प्रेमी के लिए या गणपति जी से अच्छे पति की  कामना के लिए रखती है . इस व्रत के अनुसार सुबह तारों की छाय में सरगी खाई जाती है , उसके बाद दिन भर चादं निकलने तक पानी या भोजन कुछ नही . चांद निकलने के बाद चादं को अर्क दे कर ही व्रत खुला जाता है . इस व्रत को लेकर स्त्रिय...
अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन दिनांक २४ नवंबर २०१९ रविवार को
साहित्य समाचार

अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन दिनांक २४ नवंबर २०१९ रविवार को

इंदौर : नगर की साहित्यिक संस्था क्षितिज के अध्यक्ष सतीश राठी के द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि, गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी संस्था के द्वारा अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन दिनांक २४ नवंबर २०१९ रविवार को किया जा रहा है। श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति के सभागार में आयोजित किए जा रहे इस सम्मेलन में क्षितिज लघुकथा शिखर सम्मान २०१९ बरेली के लघुकथाकार श्री सुकेश साहनी को दिया जाएगा। क्षितिज लघुकथा समालोचना सम्मान २०१९ नाथद्वारा के लघुकथाकार और समालोचक श्री माधव नागदा को दिया जाएगा। क्षितिज लघुकथा नवलेखन सम्मान २०१९ अंबाला के उदीयमान लघुकथाकार कुणाल शर्मा को दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त कोटकपूरा, पंजाब से पधार रहे वरिष्ठ लघुकथाकार श्री श्यामसुंदर अग्रवाल को उनके जीवन पर्यंत लघुकथा विधा में योगदान एवं पंजाबी भाषा के लघुकथा साहित्य वह हिंदी भाषा के लघुकथा साहित्य में सेतु निर्माण के लिए क...
आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जयंती एव कविवर स्व.महेश “राजा” स्मृति सम्मान समारोह सम्पन्न
साहित्यिक

आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जयंती एव कविवर स्व.महेश “राजा” स्मृति सम्मान समारोह सम्पन्न

धार : अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला इकाई धार के तत्वावधान में रामायण रचयिता आदकवि महर्षि वाल्मीकि जयंती के परम पुनीत अवसर पर दिनांक १३ अक्टूबर २०१९ को शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के विशाल सभागार में आयोजित कविवर महेश "राजा" धार स्मृति सम्मान समारोह वरिष्ठ कथाकार श्री निसार एहमद की अध्यक्षता, प्रसिद्ध साहित्यकार एवं मंचीय कवि श्री गिरेन्द्र सिंह भदौरिया "प्राण" के मुख्यआतिथ्य, तथा वरिष्ठ अभिभाषक श्री श्रीवल्लभ विजयवर्गीय धार, उस्ताद शायर श्री रशीद एहमद "रशीद" धारवी इन्दौर, ओजस्वी कवयित्री श्रीमती प्रतिमा तोमर इन्दौर के विशिष्ट आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। कायर्क्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ शारदा के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन चित्रपर माल्यार्पण एवं कवयित्री एवं शायरा श्रीमती अनीता आनन्द के द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वन्दना से हुआ। इस अवसर पर पधारी कवयित्री ...
नदी
कविता

नदी

********** रीतु देवी "प्रज्ञा" (दरभंगा बिहार) कलकल बहती है निरंतर नदी, पावन नव संदेशा दे होती अग्रसर नदी। स्वार्थहीन दिशा में बहती रहती, अपने तट स्वर्ण फसल दे निहाल करती रहती। कराती रहती पूजनीया मधुर संगीत श्रवण, मनोकामनाएं पूर्ण कर लेते करके तट किनारे अर्चन। सिख लेकर नेक राह बढाए कदम, अपनी जिंदगी सेवाभाव में अर्पित करें हम। रखें पवित्रता का ख्याल इसकी हरदम, हाथ में हाथ मिला न होने दे जीवनदायी अक्षुण्णता कम।   लेखीका परिचय :-  रीतु देवी (शिक्षिका) मध्य विद्यालय करजापट्टी, केवटी दरभंगा, बिहार आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, हिंदी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु ...
पागल
कविता

पागल

धैर्यशील येवले इंदौर (म.प्र.) ******************** हर पल मुस्कुराता गुनगुनाता लोगो ने कहा पागल है राह के कंकर पत्थर बिनता लोगो ने कहा पागल है भरी धूप में पौधों को सींचता लोगो ने कहा पागल है अपना खाना कुत्ते को खिलाता लोगो ने कहा पागल है आते जातो को नमस्कार करता लोगो ने कहा पागल है रातो में जागता सिटी बजाता लोगो ने कहा पागल है बुजुर्गों को हँसाता सहारा देता लोगो ने कहा पागल है बच्चों के साथ नाचता कूदता लोगो ने कहा पागल है हर एक खुशी में शरीक हो जाता लोगो ने कहा पागल है अर्थी पीछे गुमसुम मरघट जाता लोगो ने कहा पगला है मंदिर, मस्जिद, चर्च घूम आता लोगो ने कहा पागल है . परिचय :- नाम : धैर्यशील येवले जन्म : ३१ अगस्त १९६३ शिक्षा : एम कॉम सेवासदन महाविद्याल बुरहानपुर म. प्र. से सम्प्रति : १९८७ बैच के सीधी भर्ती के पुलिस उप निरीक्षक वर्तमान में पुलिस निरीक्षक के पद पर पीटीसी इंदौर में...
जिसे चांद कहते रहे
कविता

जिसे चांद कहते रहे

विनोद सिंह गुर्जर महू (इंदौर) ******************** साल भर हम जिसे चांद कहते रहे, आज उसने हकीकत में झुटला दिया। मैं तो हूं रोशनी आंखों की पिया, चांद कहकर गले से लिपटा लिया।। इन सांसों में खुशबू महकती तेरी, तेरी यादों में खुशियां चहकती मेरी। जिस दिन मुलाकात होती नहीं, रूह तड़फे और काया दहकती मेरी।। सात जन्मों का बंधन नाता किया।।.. चांद कहकर गले से लिपटा लिया।।.. मैं दूर होकर भी कब दूर हूँ, इस जमाने के हाथों मजबूर हूँ। धड़कन हो मेरे दिल की प्यारे सनम, तू मेरा नूर है मैं तेरी नूर हूँ।। मेरी पूजा का रोशन, तुम्हीं से दिया।.. चांद कहकर गले से लिपटा लिया।।.. . परिचय :-   विनोद सिंह गुर्जर आर्मी महू में सेवारत होकर साहित्य सेवा में भी क्रिया शील हैं। आप अभा साहित्य परिषद मालवा प्रांत कार्यकारिणी सदस्य हैं एवं पत्र-पत्रिकाओं के अलावा इंदौर आकाशवाणी केन्द्र से कई बार प्रसारण, क...
“गणित ज्ञान को गाइये” में है सरलता
साहित्य समाचार

“गणित ज्ञान को गाइये” में है सरलता

संजय वर्मा "दॄष्टि" मनावर (धार) ******************** डॉ  दशरथ मसानिया का संग्रह "गणित ज्ञान को गाइये" शिक्षा की हर बात  की गहरी पड़ताल की जाकर बेहतर तरीके से  अपनी  वैचारिक गणित की रोचकता को सरलता प्रदान की जाकर भावनाएं व्यक्त की है। वर्षो से साहित्य की पूजा करते आ रही डॉ दशरथ मसानिया ने ज्यादातर चालीसा के जरिए के ताने बानों को प्रेरणा स्वरुप ढाला है । समय-समय पर तमाम हो रहे परिवर्तनों पर प्रत्यक्ष गवाह बन के उभर रहे हो | गणित ज्ञान को गाइये की विशेषता है कि वो मन को छूता है और पठनीयता की आकर्षणता में बांधे रखता है | डॉ मसानिया के ह्रदय अनुभव ख़जाने में श्रेष्ठ विचार का भंडार समाहित है जो समय-समय पर हमे ज्ञानार्जन में वृद्धि कराता आया है ।इनको कई पुरस्कार एवं निजी चैनल पर इंटरव्यू शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर समझाइस की विधि के लिए प्राप्त हो चुके का प्रसारण समय समय पर जारी है। लेखन की ...
मैं तेरे दिल की गुड़िया
कविता

मैं तेरे दिल की गुड़िया

रागिनी सिंह परिहार रीवा म.प्र. ******************** मैं तेरे दिल की गुड़िया हूँ, जिसे बाबा ने पाला हैं। अगर माँ की गोदी है, तो बाबा ने दुलारा है। मुझे है प्यार दोनो से, मगर ये भी हकीकत है। मैं चिड़िया हूँ आंगन की, पराये घर जाना है। मैं जब माँ बनती हूँ, तो बेटी की याद आती हैं। जब मैं बेटी बनती हूँ , माँ की याद आती हैं। मैं दोनो की ममता हूँ, मुझे दोनो ही प्यारी है। इधर माँ भी प्यारी है , उधर बेटी भी प्यारी है। मुझें दोनो की हालत एक सी मालुम पडती हैं। इधर माता की ममता है, उधर बेटी दुलारी हैं। मुझे हर बक्त ही नैहर की वो दिन याद आते हैं। कभी आंगन में खेली थी, कभी शाला में पढ़ती थी। इधर ममता की पीड़ा है, उधर बेटी की चिंता है। मैं तेरे दिल की गुड़िया हूँ, जिसे बाबा ने पाला है ..... परिचय :- रागिनी सिंह परिहार जन्मतिथि : १ जुलाई १९९१ पिता : रमाकंत सिंह माता : ऊषा सिंह पति : सचिन देव सिंह शिक्षा :...
अनगिनत यात्राएं
कविता

अनगिनत यात्राएं

विवेक सावरीकर मृदुल (कानपुर) ****************** पिता ने की अनगिनत यात्राएं पर जा नहीं पाए दूरस्थ जगहों पर इस डर से कि हमें कहीं कुछ कम न पड़ जाए साधन की बहुत कमी के बगैर भी मुल्तवी करते गये घूमने का शौक देखते रहे सपनों में हरियाली भरे पर्यटन स्थल चीड़ के वन बर्फाच्छादित उपत्यकाएं बताते रहे प्रसंगों से जोड़कर माँ के साथ संपन्न चुनिंदा यात्राओं का रससिक्त वर्णन उनकी यात्राओं में अक्सर  आड़े आता रहा हमारा बचपन या हमारी पढ़ाई और एक दिन जब हम सब बड़े हो गये  नहीं रहा  हमारी कमी का डर और रह गया उनके पास समय ही समय हमने देखा पिता के शौक को भी अंतिम सांसे लेते हुए एक दिन पिता की तरह   लेखक परिचय :-  विवेक सावरीकर मृदुल जन्म :१९६५ (कानपुर) शिक्षा : एम.कॉम, एम.सी.जे.रूसी भाषा में एडवांस डिप्लोमा हिंदी काव्यसंग्रह : सृजनपथ २०१४ में प्रकाशित, मराठी काव्य संग्रह लयवलये, उपलब्धियां : वरिष्ठ मराठ...
करवा चौथ और मृत्यु की जंग
कविता

करवा चौथ और मृत्यु की जंग

विनोद वर्मा "आज़ाद"  देपालपुर ********************** उसकी जीवन मृत्यु की जंग चल रही थी, मेरी अर्धांगिनी मेरी जिंदगी मांग रही थी, केंसर की काली घटाएँ उसे रंग रही थी ऐसे में भी भारतीय संस्कृति टँग रही थी। करवा चौथ का पवित्र पर्व था, उसके लिए पति व्रत धर्म था, थका शरीर जर्जर हो तप रहा था, फिर भी उसका हौसला बढ़ रहा था। मुझे तिलक लगा टक-टक एक टक देख रही थी, चेहरे की बनावट गड़बड़, आंखों में सैलाब भर रही थी, जल पिला पूछ ही रहा था कि चक्कर से आंखे चक्रा रही थी, चलनी में चेहरा देख बून्द-बून्द अश्क बरसा रही थी। वह मेरी लम्बी उम्र की कामना कर व्रत-उपवास रख भूख सह रही थी, खुद के प्राण अटक-अटक कर रहे वह मुझे देख रही थी, मजबूर पति था,अपने आंसु ओं का घूंट गटकते वह देख रही थी, मेरे बच्चों के साथ मेरे पति का क्या होगा शायद वह सोच रही थी ? रो-रही थी जिंदगी,रो-रहा था प्यार विमर्श को, वह झुकी परम्परा...
हे मिसाइल मानव
कविता

हे मिसाइल मानव

भारत भूषण पाठक धौनी (झारखंड) ******************** हर्षित है आज यह नभतल। याद कर वो सुनहरा कल।।अग्निमानव का कर रहा सहर्ष स्वागत। मानो कहता हो यह सकल जीव-जगत।। अर्पित कर दिया जिसने अपना जीवन। आओ मिल हम उन्हें करें नमन।। कर अर्पित हृदयतल से उनको श्रद्धार्पण। हे अग्निमानव मेरा भी नमन करें स्वीकार। हे माँ भारती के आदरणीय सजग पहरेदार।। . लेखक परिचय :-  नाम - भारत भूषण पाठक लेखनी नाम - तुच्छ कवि 'भारत ' निवासी - ग्राम पो०-धौनी (शुम्भेश्वर नाथ) जिला दुमका(झारखंड) कार्यक्षेत्र - आई.एस.डी., सरैयाहाट में कार्यरत शिक्षक योग्यता - बीकाॅम (प्रतिष्ठा) साथ ही डी.एल.एड.सम्पूर्ण होने वाला है। काव्यक्षेत्र में तुच्छ प्रयास - साहित्यपीडिया पर मेरी एक रचना माँ तू ममता की विशाल व्योम को स्थान मिल चुकी है काव्य प्रतियोगिता में। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि हिंदी रक्षक मंच पर अपने पर...
जीवन का कड़वा घूंट
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जीवन का कड़वा घूंट

मित्रा शर्मा महू - इंदौर ******************** जीवन का घूंट है कड़वा शिकवा न कीजिए, मौन से स्वीकारें या समझौता कीजिए। गर्दिशों में तबाही का मंजर देखा, मुकद्दर के खेल में भी दुआओं का असर देखा। मेरे शब्दों से आप का दिल छू जाएं , इत्तफाक ही है सोचती हूँ लिखा जाए। दर्द बयां करने को हम बेताब थे, पर किसी ने पूछा ही नही हम खामोश क्यों थे। दूर रहने पर भी यह खबर दिलको सुकून देता है, तुम्हारी खैरियत जानने के बाद रूह को ठंडक दे जाता है . परिचय :- मित्रा शर्मा - महू (मूल निवासी नेपाल) आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, हिंदी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमेंhindirakshak17@gmail.comपर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हम...