मन दिखता है….
संजय जैन
मुंबई
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मुझे राह दिख,
लाने वाले मेरे मन।
कभी राह खुद तुम,
यूही न भटकना।
मुझे राह....…...।
मोहब्बत में जीते,
मोहब्बत से रहते।
मोहब्बत हम सब,
जन से है करते।
स्नेह प्यार की दुनियां,
हम हैं बसाते।
मुझे राह........।।
न भेद हम करते,
जाती और धर्म में।
न भेद करते,
ऊंच और नीच में।
में रखता हूँ समान भाव,
अपने दिल में।
मुझे राह..........।।
हमे अपनी संस्कृति,
को है बचना।
दिलो में लोगो के,
प्यार है जगाना।
अपनी एकता और
अखंता बचाना।
मुझे राह .........।।
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लेखक परिचय :- बीना (मध्यप्रदेश) के निवासी संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं। करीब २५ वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं हिंदी रक्षक मंच (hindirakshak.com) सहित बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रह...

















