बेटा लौट आया सुमित्रा का
===============================
रचयिता : विनोद वर्मा "आज़ाद"
मैने ये कहानी सुन रखी थी कि कोई भी छोटी सी दुकान लगाकर बैठा है तो बड़े दुकानदारों से सामान लेने की बजाय नाम मात्र का सामान, सब्जी या फल बेचने वाले से खरीदना चाहिए, क्योंकि छोटी सी दुकान वाले के पेट भरने का साधन ही कुछ सामान, फल या सब्जी बेचना होता है। एक बुढ़िया की यही स्थिति देख एक सज्जन पुरुष रोज उस महिला से फल खरीदता था और फल का एक फल उस बुढ़िया को खाने को देते हुए कहता देखो फल ज्यादा मीठा तो है नही ? बुढ़िया को इसलिए खिलाता था कि ये तो बेचकर पेट की आग बुझाएगी पर इसमे से ये एक भी फल नही खाएगी। जबकि इसके जर्जर शरीर को इस बहाने फल का एक टुकड़ा कुछ तो असर करेगा। वहीं बुढ़िया फल खाकर कहती बाबू शाय ये तो मीठा है ! तो वह नित्य का ग्राहक कहता हां, मीठा ! अरे बहुत ही मीठा है माता राम। रोज इस प्रकार वह बुढ़िया को फल खिलाता, वहीं बुढ़िया भी उक...




















