डायरी के पन्ने
श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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तुम उसे चुनना
खुद के लिए जो तुम्हें पसंद हो
मैं हर बार तुम्हें ही चुनूंगी।
कभी जो मेरी याद आये,
मेरी डायरी के पन्नों को पलट लेना
जो बात जुबां कभी कह ना सकीं
वो उन पन्ने में दिखाई देंगे।।
कुछ शब्दों मे अधूरे
सपने सजे होंगे,
कुछ पन्नों में पाप-पुण्य
का लेखा-जोखा होगा,
उन्हीं पन्नों में कुछ शब्द,
तुम्हें देखकर मुस्कुरायेंगे!
सब कुछ बटोर पाऊँ इन
कांपते हाथों में अब दम नहीं है,
तुम कहोगे तो बीते पलों की
दास्तान तुम्हें सुना दूंगी!
जिंदगी किसे मिली है
यहां सदा के लिए
एक दिन हम सबकी
सांसे थम जानी है!
अगर कभी मूंद ली
आंखे हमने वक्त के पहले,
तो कुछ अधूरे कुछ पूरे के
पन्नों को समझेगा कौन।।
परिचय :- श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
पति : श्री राकेश कुमार चतुर्वेदी
जन्म : २७ जुलाई १९६५...

















