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गीत

भाई दूज
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भाई दूज

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** कहे बहिन की प्रीति सदा ही, भइया रीति चलाते रहना। घर आयेगी रूठी बहिना, भइया नित्य बुलाते रहना।। बहिना का है प्रेम निराला, पावन जैसे गंगा धारा। रक्षक भाई है बहना का, नित दूजे पर तन-मन वारा।। जुग-जुग जिए बहिन का भाई, यह आशीष दिलाते रहना। घर आयेगी रूठी बहिना, भइया नित्य बुलाते रहना।। भाई दूज का पर्व है प्यारा, खुशी हजारों लेकर आता। मंगल पावन तिलक लगाती, बहिना को त्योहार सुहाता।। प्रेम सदा छलकाता भाई, अद्भुत ज्योति जलाते रहना। घर आयेगी रूठी बहिना, भइया नित्य बुलाते रहना।। जुग-जुग जिए बहिन का भाई, प्रभु से वर ये माँगे बहिना। सुख समृद्धि सदा घर आये, झोली खुशियों से प्रभु भरना।। कृष्ण सुभद्रा सी है जोड़ी, नेहिल अमिय पिलाते रहना। घर आयेगी रूठी बहिना, भइया नित्य बुलाते रहना।। ...
जीवन का अभिशाप
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जीवन का अभिशाप

भीमराव 'जीवन' बैतूल (मध्य प्रदेश) ******************** और रहा कितने दिन बाकी, राजन् पश्चाताप। हारा गणित हमारा लेकिन, जुमले सका न माप।। मुरझाई गमलों में सारी, रोपित आशाएँ। नागफनी-सी हुई पल्लवित, निंदित भाषाएँ।। तहज़ीबों की इस बस्ती में, पसरा है संताप।। सपने देखे उड़ने के जिस, उड़न-खटोले से। आडंबर का जिन्न बड़ा हो, निकला झोले से।। कुटिल नीति के कोड़े मारे, ये दिल्ली की खाप।। जकड़े हम बाजारवाद के, खूनी पंजों में। फँसे हुए हैं वोट बैंक के, बने शिकंजों में।। रखा हुआ है गिरवी अपना, अनुवांशिक आलाप।। उलझ गया सब ताना-बाना, भ्रमित नीतियों में। हिंसकपन बो रही व्यवस्था, राग-रीतियों में।। सूत्रधार ही लगता है अब, 'जीवन' का अभिशाप।। परिचय :- भीमराव 'जीवन' निवासी : बैतूल मध्य प्रदेश घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।...
होली मा रंग लो
गीत

होली मा रंग लो

धर्मेन्द्र कुमार श्रवण साहू बालोद (छत्तीसगढ़) ******************** (छत्तीसगढ़ी गीत) उलझन मन ला दहन करें बर, बैठक रखही आज। काम क्रोध बैठक मा जरही, बरही खस्सू खाज।। दया क्षमा मन नियाय करही, बस्ती भर सकलाय। प्रेम प्रसादी सब ला मिलगे , रंग गुलाल उड़ाय।। अइसन बात धरव श्रोता जन, बदलव अब सब ढंग। असली रंग रंँगाहूँ सब झन, निकल जाय ये जंग।। कामी क्रोधी राजा जरगे, नइ बाँचिस हे राज। प्रहलाद पुत्र कैसे बचगे, सोचव सब झन आज।। काबर सच्चा भक्ति रिहिस हे, भगवन के अवतार । भजन भाव ला हिय मा धरथे, होथे जिनगी पार।। असली बचथे नकली जरथे, जलके होथे राख। पापी गगरी मा विष घुलथे, इही चुकाथे साख।। अत्याचारी भ्रष्टाचारी, भगवन करथे नाश। दू दिन के जिनगी सँगवारी, महको उपवन काश।। इही आय मधुबन वृंदावन, गीत भजन गा फाग। अहंकार के माथा फोड़व, रखव प्रेम अनुराग।। परिचय :- धर्मेन्द्र क...
नंदलाल से होली खेलें ग्वाल-बाल प्यारे
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नंदलाल से होली खेलें ग्वाल-बाल प्यारे

डॉ. भावना सावलिया हरमडिया, राजकोट (गुजरात) ******************** नंदलाल से होली खेलें ग्वाल-बाल प्यारे। सबके तन-मन अति पुलकित हैं, झूम रहे सारे। रंग श्याम का चढ़ जाता है, होता उजियारा। जीवन में बहने लगती है, दिव्य अमृत धारा। माधव-राधा के दर्शन ये, जीवन को तारे। नंदलाल से होली खेलें, ग्वाल-बाल प्यारे। बाल-वृद्ध सब होली खेलें, राधा सखियों से, प्रीत भरी पिचकारी मारे, मोहन अँखियों से, होली का हुड़दंग मचा है, ज्यों द्वारे द्वारे। नंदलाल से होली खेलें, ग्वाल-बाल प्यारे। श्याम रंग की पिचकारी से, राधा शरमाईं, भीग गई चोली, चूनर सब, सखियाँ हरषाईं। मुरलीधर का प्रेम पड़ गया, राधा को भारे नंदलाल से होली खेलें ग्वाल-बाल प्यारे। गोपी-ग्वाले मिलकर खेलें, गोकुल में होली, राधा गोरी वो मतवाली, खेले हमजोली, मटक रहे राधा मोहन के, नयना कजरारे। नंदलाल से होली खेलें ग्वाल-बाल प्यारे। गि...
कर रहे गुंजन भ्रमर हैं
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कर रहे गुंजन भ्रमर हैं

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** कर रहे गुंजन भ्रमर हैं, आ गया मधुमास साजन। प्रेम से सुरभित जगत है, गीत गुपचुप गा रहा मन।। तन बँधा है मन सजन भी, प्रीत का बंधन निराला। देख नभ डोले धरा भी। नेह का ओढ़े दुशाला।। बह रही कलकल नदी भी, प्रीत सागर से सुहावन। कर रहे गुंजन भ्रमर हैं, आ गया मधुमास साजन।। भावना का है समर्पण, नित नया उल्लास भी है। आस है अभिसार की तो, मन जगा विश्वास भी है।। सीप सा मोती बसा हिय, है खनक अब नित्य कंगन। कर रहे गुंजन भ्रमर हैं, आ गया मधुमास साजन।। काँपता है गात मेरा, मोहती तेरी छुअन भी। काम रति संसर्ग है ये , है प्रणय का मधु मिलन भी।। सैकड़ों सपने सजा कर, आ गयी है आज दुल्हन। कर रहे गुंजन भ्रमर हैं, आ गया मधुमास साजन।। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति...
शिवशक्ति
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शिवशक्ति

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** शमीशान शिव विश्वनिर्वाण कारी। शरण में तुम्हारे सभी जीवधारी।। मिटा दो सभी कष्ट महका दो बगिया। त्रिशूलं कराग्रे त्रयी तापहारी।। महाकाल उज्जैन में तुम विराजे। लिए हाथ डमरू गले सर्प साजे। कहे सब सदा काल भी तुमसे हारे। चढ़े अंग में भस्म तड़के तुम्हारे। वरे वाम अंगे प्रिये गौर माता। गुणातीत गणनाथ हे निर्विकारी। शमीशान शिव विश्वनिर्वाण कारी।। किया देव दानव जलधि का बिलोना। तभी जहर का कुंभ निकला कहोना। लगे देव दानव सभी फड़फड़ाने। पिया था हलाहल सभी को बचाने। नमन नीलकंठे जटा गंगधारी। निराकार निर्गुण तपस्वी अकारी। शमीशान शिव विश्वनिर्वाण कारी।। बहुत कष्ट संसार में तेरे देखा। तड़पते हृदय का कभी लेना लेखा। रहे खुश हमेशा चुभें दिल में भाले। दिखाऍं हृदय के बता किसको छाले। करों पार भव से ये नैया...
वंदे मातरम्
गीत

वंदे मातरम्

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** वंदे मातरम् आज कह दो शान से है जान वंदे मातरम् देश के हर लक्ष्य का संधान वंदे मातरम् देश की मिट्टी है चंदन शीश तुम धारो इसे हमसे जो करवा दे सब बलिदान वंदे मातरम चीर दो दुश्मन को और ग़द्दार को तुम दो सज़ा आज कर दो जंग का ऐलान वंदे मातरम् बाल गंगाधर तिलक का स्वप्न है साकार सब अब हमारे देश का अभिमान वंदेमातरम् याद कर लो तुम शहीदों ने किया उत्सर्ग जो अपनी आज़ादी की है पहचान वंदे मातरम् आप फहराएँ तिरंगा पर्व में गणतंत्र के आइए मिल कर करें जयगान वन्देमातरम् विश्व नतमस्तक हुआ सम्मुख हमारे देश के दे रहा है शक्ति हमको गान वंदेमातरम् परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भ...
हिंदी हिंद की शान रे
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हिंदी हिंद की शान रे

विवेक नीमा देवास (मध्य प्रदेश) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना हिंदी हिंद की शान रे।। मुझ में हिंदी, तुझ में हिंदी हिंदी हिंद की शान रे … भारत के जन-जन में हिंदी टैगोर के जन गण में हिंदी मीरा के भजनों में हिंदी कबीरा के दोहों में हिंदी मुझ में हिंदी, तुझ में हिंदी हिंदी हिंद की शान रे … पूरब से पश्चिम तक हिंदी उत्तर से दक्षिण तक हिंदी गीत में हिंदी प्रीत में हिंदी रिश्तो के संगीत में हिंदी मुझ में हिंदी, तुझ में हिंदी हिंदी हिंद की शान रे … मंदिर के भजनों में हिंदी वेद और पुराण में हिंदी भगवत गीता के ज्ञान में हिंदी कला और विज्ञान में हिंदी मुझ में हिंदी, तुझ में हिंदी हिंदी हिंद की शान रे … फिर क्यों रहे पराई हिंदी? क्यों दी हमने बुलाई हिंदी क्या प्रश्न नहीं ये अडिग खड़ा है ? ...
दिल्ली कारोबारी
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दिल्ली कारोबारी

भीमराव 'जीवन' बैतूल (मध्य प्रदेश) ******************** नफ़ा देखकर सौदा करती, दिल्ली कारोबारी। दस हजार में बिका आज फिर, अपना चमन बिहारी।। आसमान में धूल धुएँ ने, चहुँदिक पैर पसारे। अर्थ समझने में शब्दों के, चश्में भी सब हारे।। लालच के सिर चढ़ कर बैठी, फिर से नई उधारी।। दस हजार में बिका आज फिर, अपना चमन बिहारी आजादी के अमृत काल में, छल ने किए धिंगाने। छीन निवाले हाथों से फिर, पकड़ा दिए फुटाने।। ली समेट फिर बहुरे बल की, हरी-भरी फुलवारी।। दस हजार में बिका आज फिर, अपना चमन बिहारी।। प्यास हुई बेकाबू, जल के, झरने सूखे सारे। आश्वासन की ड्योढ़ी से हम, आस लगाकर हारे।। ज्ञान कोठरी पर ताले जड़, छलता रहा लबारी।। दस हजार में बिका आज फिर, अपना चमन बिहारी।। आँतों की हड़ताल हुई ज्यों, दौड़े भूखे बंदे। बीज बताकर छलनाओं ने, रोप दिए थे फंदे।। देख छटपटाते जीवन को, खुश...
भोर सुहानी
गीत

भोर सुहानी

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** भोर सुहानी आ गयी, पंछी करते शोर। कैसी अनुपम छवि प्रकृति, मनवा भाव विभोर।। बूँद ओस की गिर रही, शीतल बहे समीर। भोर सदा देखो हरे, अँधियारे की पीर।। आभा लाया है नई, सुंदर नवल प्रभात। सुखदायक यह भोर है, बीती काली रात।। जीवन सारा खिल उठा, महक रहा हर अंग। कान्हा की बंशी बजे, नाचें राधा संग।। जपो नाम भगवान का, बेडा होगा पार। पूरे होंगे स्वप्न सब, खुशियाँ मिले अपार।। स्वागत करिए भोर का, लेकर नव विश्वास। चमकी किरणें हैं धरा, कर लो योगाभ्यास।। वंदन करिये भोर का, ईश नवाओ शीश। मात-पिता चरनन रहो, नाम जपो जगदीश।। ताल देख पंकज खिले, फूल महकते बाग। भोर सुनाता आज है, नव जीवन का राग।। मानव करता कर्म है, भोर मचाता शोर। निकले तम को चीरती, किरणें ये चहुँओर।। जागा नव उल्लास है, आया नया उमंग। गोरी न...
क़ीमत यहाँ इंसान की
गीत

क़ीमत यहाँ इंसान की

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** गिर रही है रोज़ ही, क़ीमत यहाँ इंसान की बढ़ रही है रोज़ ही, आफ़त यहाँ इंसान की न सत्य है, न नीति है, बस झूठ का बाज़ार है न रीति है, न प्रीति है, बस मौत का व्यापार है श्मशान में भी लूट है, दुर्गति यहाँ इंसान की। गिर रही है रोज़ ही, क़ीमत यहाँ इंसान की।। बिक रहीं नकली दवाएँ, ऑक्सीजन रो रही इंसानियत कलपे यहाँ, करुणा मनुज की सो रही ज़िन्दगी दुख-दर्द में, शामत यहाँ इंसान की। गिर रही है रोज़ ही, क़ीमत यहाँ इंसान की।। लाश के ठेके यहाँ हैं, मँहगा है अब तो कफ़न चार काँधे भी नहीं हैं, रिश्ते-नाते हैं दफ़न साँस है व्यापार में पीड़ित यहाँ इंसान की। गिर रही है रोज़ ही, क़ीमत यहाँ इंसान की।। एक इंसाँ दूसरे का, चूसता अब ख़ून है भावनाएँ बिक रही हैं, हर तरफ तो सून है बच सकेगी कैसे अब, इज्जत यहाँ इ...
प्रति गीत (पैरोडी)
गीत, हास्य

प्रति गीत (पैरोडी)

गिरेन्द्रसिंह भदौरिया "प्राण" इन्दौर (मध्य प्रदेश)  ******************** क्या देश है देशी कुत्तों का? गलियों में गुत्थमगुत्थों का। इस देश का यारों क्या कहना, अब देश में कुत्ते ही रहना।। यहाँ चौड़ी छाती कुत्तों की, हर गली भौंकते धुत्तों की। यह डॉग लवर का है गहना, कुत्ते को कुत्ता मत कहना।। यहाँ होती भौं-भौं गलियों में, होती भिड़न्त रँगरलियों में। जो तुम्हें यहाँ पर रहना है, हर हरकत इनकी सहना है।। आ रहे विदेशी नित कुत्ते, रुक नहीं रहे ये भरभुत्ते। ढोंगिया रोंहगिया झबरीले, कुछ कबरीले कुछ गबरीले।। कहीं जर्मन है कहीं डाबर है, लगता कुत्तों का ही घर है। न्यायालय का यह आडर है, देखो इनमें क्या पॉवर है।। गलियों में नहीं मिलेंगे अब, एसी दिन-रात चलेंगे अब। भोजन पायेंगे सरकारी, बन गए अचानक अधिकारी। बन रहे शैल्टर होम यहांँ, कुत्तों की है हर कौम यहाँ। बेशक गउएंँ काटी ज...
बारूदी बस्ती
गीत

बारूदी बस्ती

भीमराव 'जीवन' बैतूल (मध्य प्रदेश) ******************** अरमानों की मौन अर्थियाँ, रोज निकलती हैं। इस बारूदी बस्ती में अब, श्वासें डरती हैं।। हिंसा ने खुशियों को खाई, जब त्योहारों की। अलगू जुम्मन बातें करते, बस हथियारों की।। समरसता से डरी पुस्तकें, आहें भरती हैं।। क्षुद्र स्वार्थ में इस माली ने, पूँजी कुछ जोड़ी। हरे-भरे सम्पन्न बाग की, मेड़ें सब तोड़ी।। कलियाँ बासंती मौसम को, देख सिहरती हैं।। डरी अल्पनाएँ आँगन से, अब मुँह मोड़ रही। हँसिया लेकर बगिया विष की, फसलें गोड़ रही।। गर्वित-गढ़ में न्याय-कुर्सियाँ, पल-पल मरती हैं।। परिचय :- भीमराव 'जीवन' निवासी : बैतूल मध्य प्रदेश घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।...
अनुपम आभा
गीत

अनुपम आभा

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** अनुपम आभा बिखराएगी, दीपयुक्त शुभ थाली। अंतः का तम दूर हटेगा, तब होगी दीवाली।। पंच तत्त्व निर्मित काया पर, पहरे बहुत, गुमी आजादी। क्षणभंगुरता जीवन का सच, भूला मन लिप्सा का आदी।। मोह-लोभ की महाव्याधि में, अतिवादी मानव जकड़ा है। अहंकार के पिँजरे में मन, चेतन खो, बन सुआ खड़ा है।। काम पिपासा में है डूबे, आत्मबोध तज प्रभुतावादी। पंच तत्त्व निर्मित काया पर, पहरे बहुत, गुमी आजादी।। गठरी सिर पर रखे पाप की, जग में भटके नश्वर काया। मर्यादा की रेखा टूटी, छल जाती रावण-सी माया।। अमल दृष्टि छल भेद न पाती, याचक हैं या अवसरवादी। पंच तत्त्व निर्मित काया पर, पहरे बहुत, गुमी आजादी।। सत्यं-शिवम-सुंदरम भूला, परहित राह नहीं पहचानी। कर्म -फलन है सद्गति-दुर्गति, काल करे हरदम मनमानी।। यम का पाश सदा ह...
स्वर बेदम है
गीत

स्वर बेदम है

भीमराव 'जीवन' बैतूल (मध्य प्रदेश) ******************** राही का टूटा संयम है। इस विकास का क्षितिज अगम है।। हाँक रहा है लोकतंत्र को, थामे वल्गाएँ सौदाई।। जहाँ अडिग सौहार्द खड़ा था, वहाँ घृणा ने खोदी खाई।। ऋतुपति के संपन्न सदन में, पत्र-पुष्प की आँखें नम है।। फसलों पर संक्रामक विष का, भ्रामक रुचिकर वरक चढ़ा है। कालचक्र ने श्वेत वसन पर, कलुष कुटिल आरोप मढ़ा है।। नोंच दिया हर तना वृक्ष का, नाखूनों में उसके दम है।। दीवारों की कानाफूसी, बदल रही है दावानल में। जलकुम्भी ने डेरा डाला, समरसता के शीतल जल में।। देख रही आँखें जो बेबस, रक्त सना पतझड़ मौसम है। पाँच पसेरी लालच ने बुन किए सघन आँखों के जाले।। लगा लिए हाथों से अपने, उजले कल के द्वारे ताले।। सिले हुए अधरों के भीतर, कैद विरोधी-स्वर बेदम है।। परिचय :- भीमराव 'जीवन' निवासी : बैतूल मध्य प्रदेश घोषणा प...
जय गंगान
आंचलिक बोली, गीत

जय गंगान

खुमान सिंह भाट रमतरा, बालोद, (छत्तीसगढ़) ******************** (छत्तीसगढ़ी - बसदेवा गीत) मोर अन्नपूर्णा महतारी ये घर म नरवा घुरवा अऊ बारी हे ईहे हमर चिन्हारी हे जय गंगान... सेवा जेन तोर करें किसान अऊ तैय बनाय ओला सुजान छत्तीसगढ़ के मै करव बखान बिना गुरु नई पावय ज्ञान जय गंगान... भारत माता के गोड़ के पहिरे छाटी अव अऊ ईहे के धुर्रा माटी हव लईका मन के खेले गुल्ली-भंवरा बांटी अव जय गंगान... चंदखुरी छत्तीसगढ़ के बढाथे मान कौशल्या माता जनम भूमि ये हर आय प्रभु राम इहां के भांचा कहाय जय गंगान... धन्य हे राजिम दाई मोर 'भाट' हाथ जोड़ करें बिनय ये तोर माघ पुन्नी परब म मेला भराय साधु संत नहाय बर आय सब मनखे मन दुःख बिसराय छत्तीसगढ़ प्रयागराज तैय ह कहाय जय गंगान... छत्तीसगढ़ के मै करव बखान मिरजूर के रईथे लईका अऊ सियान मुड़ म पागा बांधे किसान अर्रे भटके ल पहुना ...
दीवाली
गीत

दीवाली

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** अनुपम आभा बिखराएगी, दीपयुक्त शुभ थाली। अंतः का तम दूर हटेगा, तब होगी दीवाली।। भेदभाव, झगड़े-झंझट जब, सारे मिट जाएँगे। फैलेगा नूतन प्रकाश तब, नवल भोर पाएँगे।। लेंगे जब संकल्प नए हम, होगी रात न काली। अनुपम आभा बिखराएगी, दीपयुक्त शुभ थाली।। सुखद शान्ति के फूल खिलेंगे, सतरंगी बगिया में। भोजन वसन प्रचुर हो जनहित, मानव को दुनिया में।। मानवता की जोत जलेगी, आएगी खुशहाली। अनुपम आभा बिखराएगी, दीपयुक्त शुभ थाली।। सच्चाई की पूजा होगी, सत्कर्मों की माला। कर्मयोग संचालक कान्हा, राधा सम भव बाला।। रामराज्य संचारित जग में, समरसता की लाली। अनुपम आभा बिखराएगी, दीपयुक्त शुभ थाली।। नेह-सिक्त शुभ संबंधों से, महकेगा जग सारा। कोण-कोण रसधार बहेगी, घर-घर भाईचारा।। देख प्रफुल्लित प्रीति-वाटिका,...
दीपावली
गीत

दीपावली

प्रो. डॉ. विनीता सिंह न्यू हैदराबाद लखनऊ (उत्तरप्रदेश) ******************** मन का उपवन खिला खिला खुशियों के हैं दीप जलाए मेरे राम प्रभु हैं घर आए, हम दीपावली मनाये हैं घर घर में है जग मग, खुशियों के हैं दीप जलाए दीपों का उत्सव ये सबके मन में अनुपम प्रीत जगाए। मेरे राम प्रभु हैं घर आए, हम दीपावली मनाये हैं अंगना में लक्ष्मी स्वागत को, रंगोली की शोभा न्यारी द्वारे बंदनवार सजाए, तेरी कृपा की आस लगाए मेरे राम प्रभु हैं घर आए, हम दीपावली मनाये हैं प्रभु जी तुम नित खेल करो दीन दुखी के कष्ट हरो तेरी करुणा पाने को आशा के हैं दीप जलाए मेरे राम प्रभु हैं घर आए, हम दीपावली मनाये हैं परिचय :- प्रो. डॉ. विनीता सिंह निवासी : न्यू हैदराबाद लखनऊ (उत्तरप्रदेश) व्यवसाय : नेत्र विशेषज्ञ सेवा निवृत, भूतपूर्व विभागाध्यक्ष नेत्र विभाग, के.जी.एम.यू. लखनऊ अन्य गतिविधिया...
शुभम् दीपावली
गीत

शुभम् दीपावली

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** आओ दीपावली हम मनाएँ। घर आँगन में दीपक जलाएँ। युग युगान्तर से है मान्यताएं। राम वन गमन से लौट आए। आओ ….. ऐश्वर्य, वैभव की माता लक्ष्मी जी। संग गणपति, सरस्वती भी पुजाये। उतारें आरती और करें प्रार्थनाएँ। सब भक्तों की पूरण हो कामनाएँ। आओ…… पूर्वजों ने जो रीति रिवाज बनाए। करके सम्मान रस्मों को निभाये। देवी देवताओं के गुणगान गाए। करें आराधना और आशीष पाए। आओ …… परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक :१४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी. निवासी : उज्जैन (मध्य प्रदेश) रुचि : आपकी बचपन में व्यायाम शाला में व्यायाम, क्षिप्रा नदी में तैराकी और शिक्षा अध्ययन के साथ कविता, गीत, नाटक लेखन मंचन आदि में गहन रूचि रही है। व्यवसाय सेवा : आप सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग. सन् १९६४ से सन् १९७० तक एवं स...
सपन सलोने
गीत

सपन सलोने

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** सपन सलोने मेरे हिय। में सदा पलते रहे, कुछ उजाले कम भले हों, दीप तो जलते रहे। सपन सलोने मेरे हिय, में सदा पलते रहे।। मृण्मयी गगन तके धरा, प्रणय घट अब तो भरा। मदन रुत चंचल है भ्रमर, कण कण देख है हरा।। प्रेम गीत गाते हम तो, चाल सब चलते रहे। सपन सलोने मेरे हिय, में सदा पलते रहे।। मर्मस्पर्शी घटा आई, नैन से बर्षा हुई। नागिन सी डसती रातें, होती थी छुईमुई।। साथ तेरा जब से मिला, फूल से खिलते रहे। सपन सलोने मेरे हिय, में सदा पलते रहे।। शूल भरी थीं जब राहें, प्रतिबिंब हृदय बसता। खूशबू प्रेम की बिखरी हिय सितार है बजता।। संग रहे जब हमदम फिर, हाथ सब मलते रहे। सपन सलोने मेरे हिय, में सदा पलते रहे।। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्...
कलियुग में बिकती सच्चाई
गीत

कलियुग में बिकती सच्चाई

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** कलियुग में बिकती सच्चाई, झूठ कपट भी भारी है। तृष्णा के गहरे सागर में, जाने की तैयारी है।। खेले खेल सियासत भी अब, कालेधन की है माया। खींचें टाँग एक दूजे की, सत्ता लोलुप है काया।। बस विपक्ष की पोल खोलना, नई नीति सरकारी है। दौड़ सीट हथियाने की है, देते पद की सौगातें। भ्रष्टाचार प्रमुख मुद्दा भी, राम राज्य की हैं बातें। रंग बदलते गिरगिट जैसा, नेता खद्दरधारी है। गागर रीती है खुशियों की, भीगी अँखियाँ रमिया की। तोता मैना करते क्रंदन, रहती चिंता बगिया की।। करें देश को नित्य खोखला, जनता भी दुखियारी है। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट...
पथ सभी अवरुद्ध हैं
गीत

पथ सभी अवरुद्ध हैं

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** पथ सभी अवरुद्ध हैं अब, नेत्र भी देते छलावे। कुंडली भी मौन बैठी, झूठ निकले आज दावे।। रक्त भी पानी हुआ है, अस्थि पंजर आज तन भी। पाश यम का बाँधता है, रूह काँपे और मन भी।। प्राण-पंछी उड़ गए हैं, कर चुके देखो दिखावे। मौसमी बदलाव लाया, साथ जहरीली हवाएँ। घोंसले सब लुट गए अब, आसुरी ये आपदाएँ।। सिर शनीचर है चढ़ा भी, कौन अब आकर बचावे। मौत से परिणय हुआ है, नृत्य तांडव हो रहा है। ढेर लाशों के लगे हैं, श्वान बैठा रो रहा है।। सिर झुका झींगुर चले अब, दादुरों के हैं बुलावे।। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका सम्प्रति...
पितृ नमः
गीत

पितृ नमः

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** आशीषें देने धरती पर, पितर पहुँच ही जाते। श्राद्ध पक्ष में पिंडदान से, पितर तृप्त हो जाते। पितर देव रूपों में होते, सदा भला ही करते। आशीषों से सदा हमारा, पल में घर वो भरते।। साथ सदा ही देखो अपने, शुभ-मंगल ले आते। श्राद्ध पक्ष में पिंडदान से, पितर तृप्त हो जाते।। क्वार मास का पखवाड़ा तो, पितरों को है लाता। श्रद्धा और नेह के सँग में, पितरों से मिलवाता।। पितर हमारे कोमल दिल के, बस मंगल बरसाते। श्राद्ध पक्ष में पिंडदान से, पितर तृप्त हो जाते।। रीति-नीति कहती है हमसे, हम चोखे हो जाएँ। भाव सँजो लें उर में अपने, श्रद्धा के गुण गाएँ।। जीवन का हर क्षण महकेगा, शुभ के पल हैं आते। श्राद्ध पक्ष में पिंडदान से, पितर तृप्त हो जाते।। तर्पण-अर्पण,पूजा-वंदन, अभिनंदन की बेला। देवलोक के पितर धरा पर, आकर भरते मेला।। ख़...
हिन्दी मस्तक की बिंदी
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हिन्दी मस्तक की बिंदी

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** हिन्दी हितकर है सदा, हिन्दी तो अभियान है। हिन्दी है मस्तक की बिंदी, हिंदी तो सम्मान है।। हिन्दी में तो आन है, हिन्दी में तो शान है। हिन्दी नित उत्कृष्ट है, हिन्दी सदा महान है।। हिन्दी अपनायें सभी, यही आज अरमान है। कला और साहित्य है, भरा हुआ यशगान है।। हिन्दी गीत, कुंडलिया, कविता, चौपाई की शान है। हिन्दी है मस्तक की बिंदी, हिंदी तो सम्मान है।। हिन्दी में है उच्चता, मनुज सभी इसको मानें। हिन्दी का उत्थान सदा हो, हिन्दी को सब ही जानें।। हिन्दी पर अभिमान हमें हो, हिन्दी अपनायें सब। हिंदी से हम प्रीति लगा लें, मंगलगीत सुनायें सब।। वह हर हिंदी के पथ में जो सचमुच चतुर सुजान है। हिन्दी है मस्तक की बिंदी, हिंदी तो सम्मान है।। हिन्दी में सामर्थ्य भरा है, हिन्दी में है वेग भरा। हिन्दी में ...
आसमान खाली है
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आसमान खाली है

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** आसमान खाली है लेकिन, धरती फिर भी डोले। बढ़ती जाती बैचेनी भी, हौले-हौले बोले।। चले चांद की तानाशाही, चुप रहते सब तारे। मुँह छिपाकर रोती चाँदनी, पीती आँसू खारे।। डरते धरती के जुगनू भी, कौन राज़ अब खोले। जादू है जंतर-मंतर का, उड़ें हवा गुब्बारे। ताना बाना बस सपनों का, झूठे होते नारे।। जेब काटते सभी टैक्स भी, नित्य बदलते चोले। भूखे बैठे रहते घर में, बाहर जल के लाले। शिलान्यास की राजनीति में, खोटों के दिल काले।। त्रास दे रहे अपने भाई, दिखने के बस भोले। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका सम्प्रति : सेवानिव...