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गीतिका

जब से जली है इस अँधेरे, उर कुटी में वर्तिका…
गीतिका

जब से जली है इस अँधेरे, उर कुटी में वर्तिका…

भीमराव झरबड़े 'जीवन' बैतूल मध्य प्रदेश ******************** जब से जली है इस अँधेरे, उर कुटी में वर्तिका। नव पुष्पदल से सज गई है, प्रीत की हर वीथिका।।१ इस मन मरुस्थल में तृषा की, शेष है अब भी तड़प, आ मानसूनी मेह ने पल, में खिला दी मल्लिका।।२ गाने लगा है मन भ्रमर भी, गीत अब तो फागुनी, परिधान पुष्पों के पहन कर, आ गई जो वाटिका।।३ जब कोकिला ने कंठ में स्वर, भर दिए है काव्य के, नव छंद से नैना लड़ाने, चल पड़ी अब गीतिका।।४ जो तारिका मधु चूसने में, मग्न थी तन पुष्प से, इस गृहनगर की बन गई वह, आजकल संचालिका।।५ कुछ बिंब के तिनके लिए निज, नीड़ जो बुनती बया, उस छंद के नव नीड़ में नित, गुनगुनाती सारिका।।६ यह कृष्ण'जीवन' मग्न है बस, शारदे के द्वार पर, इस लेखनी ने राधिका बन, मन बनाया द्वारिका।।७ परिचय :- भीमराव झरबड़े 'जीवन' निवासी- बैतूल मध्य प्रदेश घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह ...
नायाब दिसम्बर
गीतिका

नायाब दिसम्बर

भीमराव झरबड़े 'जीवन' बैतूल मध्य प्रदेश ******************** नायाब जिन्दगी का, सुर ताल है दिसम्बर। इसको न मौन कहना, वाचाल है दिसम्बर।।१ भाने लगी रजाई, मन प्रीत सज रही है। रंगीन टोप स्वेटर, नव शाल है दिसम्बर।।२ है वक्त नापने का, अपना प्रतीक सुन्दर। अब साल पूर्ण होगा, ये काल है दिसम्बर।।३ प्रतिघात शीत का अब, होने लगा हृदय पर। बेडौल से बदन को, जंजाल है दिसम्बर।।४ काजू खजूर पिस्ता, बादाम नारियल घी। पकवान खूब खाओ, प्रतिपाल है दिसम्बर।।५ अब जन्मदिन सभी का, होगा नया नवेला। जो साल को बदलता, वो चाल है दिसम्बर।।६ जीवन बढ़ो निरंतर, संकेत मिल रहा है। भरपेट दाल रोटी, का थाल है दिसम्बर।।७ परिचय :- भीमराव झरबड़े 'जीवन' निवासी- बैतूल मध्य प्रदेश घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच पर अपने पर...
भाव-सागर को मथाती लेखनी
गीतिका

भाव-सागर को मथाती लेखनी

रामकिशोर श्रीवास्तव 'रवि' कोलार रोड, भोपाल (म.प्र.) ******************** भाव-सागर को ~ मथाती लेखन। काव्य का अमृत ~ पिलाती लेखन। शारदे माँ की अगर कवि पर कृपा, ज्ञान-रस-आनंद ~ लाती लेखन। रोज दुनिया में ~ घटित जो हो रहा, पूर्ण जस का तस दिखाती लेखन। जानते हैं सब कलम की शक्ति को, राज सिंहासन ~ डिगाती लेखन। सत्य हो या झूठ ~ छिप सकता नहीं, छद्म के परदे ~ हटाती लेखन। देश सर्वोपरि ~ जिएँ हम देशहित, बोध समता का ~ कराती लेखन। गीत-कविता-लेख ~ सुख आनंद दें, 'रवि' तभी जग को ~ सुहाती लेखन। परिचय :- रामकिशोर श्रीवास्तव 'रवि' निवासी : कोलार रोड, भोपाल (म•प्र•) * २००५ से सक्रिय लेखन। * २०१० से फेसबुक पर विभिन्न साहित्यिक मंचों पर प्रतिदिन लेखन। * विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित। * लगभग १० साझा संकलनों में सहभागिता। सम्प्रति : पुस्तक प्रकाशन की तैयारी, छंदबद्ध रचनाओं में विशेष रुचि, गीत, ग...