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मुक्तक

ग्रीष्म के मुक्तक
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ग्रीष्म के मुक्तक

ग्रीष्म के मुक्तक =============================================== रचयिता : रशीद अहमद शेख धूप लगे अब तो अंगार! पथ खोजें सब छायादार! तापमान बढ़ता जाए, पारा चढ़ता है प्रतिवार! त्रस्त चेतन हैं तप रहे हैं जड़! अनेक बाग़ भी गए हैं उजड़! बस्तियां गर्म हो रहीं कितनी, धूप में सिंक रहे हैं अब पापड़! है शेष जून अभी तो हुआ है ग्रीष्म-प्रवेश! प्रत्येक सूर्य-किरण में है तापमान-निवेश! कहीं है लू की लपट तो कहीं अनल- वर्षा, झुलस रहें हैं ज़िले सब झुलस रहा है प्रदेश!   लेखक परिचय :-  नाम ~ रशीद अहमद शेख साहित्यिक उपनाम ~ ‘रशीद’ जन्मतिथि~ ०१/०४/१९५१ जन्म स्थान ~ महू ज़िला इन्दौर (म•प्र•) भाषा ज्ञान ~ हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, संस्कृत शिक्षा ~ एम• ए• (हिन्दी और अंग्रेज़ी साहित्य), बी• एससी•, बी• एड•, एलएल•बी•, साहित्य रत्न, कोविद कार्यक्षेत्र ~ सेवानिवृत प्राचार्य सामाजिक गतिविध...