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मुक्तक

आज़ादी पर मुक्तक
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आज़ादी पर मुक्तक

=========================== रचयिता : रशीद अहमद शेख युगों-युगों तक ज़ुल्म किया बर्बादी ने। सहा बहुत कुछ भारत की आबादी ने। आ पंहुचा पन्द्रह अगस्त सन् सैंतालीस, तब अपना आशीष दिया आज़ादी ने। ये ज़मीं आज़ाद है अब ये गगन आज़ाद है। हम सभी आज़ाद हैं, अपना चमन आज़ाद है। गुल भी अब आज़ाद है, बुलबुल भी अब आज़ाद है, बाग़बां आज़ाद है, अपना चमन आज़ाद है। धरा अधिक स्वतंत्र अब, गगन अधिक स्वतंत्र है। स्वतंत्र पथ हुए सभी, पथिक-पथिक स्वतंत्र है। स्वतंत्र हैं रहन-सहन, कथन,चलन, निजीकरण, स्वतंत्र राष्ट्र में प्रत्येक नागरिक स्वतंत्र है। लेखक परिचय :-  नाम ~ रशीद अहमद शेख साहित्यिक उपनाम ~ ‘रशीद’ जन्मतिथि~ ०१/०४/१९५१ जन्म स्थान ~ महू ज़िला इन्दौर (म•प्र•) भाषा ज्ञान ~ हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, संस्कृत शिक्षा ~ एम• ए• (हिन्दी और अंग्रेज़ी साहित्य), बी• एससी•, बी• एड•, एलएल•बी•, साहित्य रत्न, कोविद कार्यक्षेत्...
ग्रीष्म के मुक्तक
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ग्रीष्म के मुक्तक

ग्रीष्म के मुक्तक =============================================== रचयिता : रशीद अहमद शेख धूप लगे अब तो अंगार! पथ खोजें सब छायादार! तापमान बढ़ता जाए, पारा चढ़ता है प्रतिवार! त्रस्त चेतन हैं तप रहे हैं जड़! अनेक बाग़ भी गए हैं उजड़! बस्तियां गर्म हो रहीं कितनी, धूप में सिंक रहे हैं अब पापड़! है शेष जून अभी तो हुआ है ग्रीष्म-प्रवेश! प्रत्येक सूर्य-किरण में है तापमान-निवेश! कहीं है लू की लपट तो कहीं अनल- वर्षा, झुलस रहें हैं ज़िले सब झुलस रहा है प्रदेश!   लेखक परिचय :-  नाम ~ रशीद अहमद शेख साहित्यिक उपनाम ~ ‘रशीद’ जन्मतिथि~ ०१/०४/१९५१ जन्म स्थान ~ महू ज़िला इन्दौर (म•प्र•) भाषा ज्ञान ~ हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, संस्कृत शिक्षा ~ एम• ए• (हिन्दी और अंग्रेज़ी साहित्य), बी• एससी•, बी• एड•, एलएल•बी•, साहित्य रत्न, कोविद कार्यक्षेत्र ~ सेवानिवृत प्राचार्य सामाजिक गतिविध...