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ग़ज़ल

तबीयत उदास है
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तबीयत उदास है

मुकेश शर्मा कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) ******************** दूर हर लम्हा मुझसे मेरी होशो-हवास है, आ भी जा बहारे-ज़िंदगी तबीयत उदास है। बहार है अपनी शबाब पे, हर मंज़र हसीं है, मगर आता हसरतों को कुछ भी नहीं रास है। दर्दों में ही सिमट कर रह गयी है ज़िन्दगी मेरी, सिर्फ़ ग़मों का जहाँ ही आजकल मेरे पास है। उदासियों के दौर में सुकून नज़र आता नहीं है, एक मुद्दत से ज़हन बे-सुकून है, बदहवास है। भूले से भी नहीं आती हैं अब बहारें दर पे मेरे, राब्ता वीरानियों से ही आजकल मेरा ख़ास है। परिचय :- मुकेश शर्मा पिता : स्व. श्री रामदयाल शर्मा माता : श्रीमती किस्मती देवी जन्म तिथि : १५/९/१९९८ शैक्षिक योग्यता : स्नातक निवासी : ग्राम- डुमरी, पडरौना जनपद- कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कवित...
भूल गई थी सच्चाई ये
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भूल गई थी सच्चाई ये

अख्तर अली शाह "अनन्त" नीमच (मध्य प्रदेश) ******************** भूल गई थी सच्चाई ये, वो अपनी नादानी से। मछली कैसे रह पाएगी, दूर, गई जो पानी से।। मानवता तो आभूषण है, मरने तक जो साथ रहे। मानव कैसे भुला सकेगा, मानवता मनमानी से।। तर्क जीत भी जाए लेकिन, सच तो हार नहीं सकता। ज्ञानी कब हारा है लोगों, दुनिया में अज्ञानी से।। नाहक, चुपड़ी रोटी खाए, हक जेलों में सिर पीटे। आंखें देख रही है मंजर, सारा ये हैरानी से।। नम होने की देर फकत है, मिट्टी है जरखेज बहुत। जल्दी ही चहकेगा गुलशन, बाहर आ वीरानी से।। माना जान है तुझमें लेकिन, है क्या जानवरों सा तू। कब तक दूर रखेगा खुदको, तू फितरत इंसानी से।। दूर करें क्यों "अनंत" उनको, रूहें जिनकी एक हुई। मर जाता है दूर हुआ तो, दीवाना, दीवानी से।। परिचय :- अख्तर अली शाह "अनन्त" पिता : कासमशाह जन्म : ११/०७...
अंगूर की ये बेटी
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अंगूर की ये बेटी

निज़ाम फतेहपुरी मदोकीपुर ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) ******************************** २२१ २१२२ २२१ २१२२ अरकान- मफ़ऊल फ़ाइलातुन मफ़ऊल फ़ाइलातुन अंगूर की ये बेटी कितनी है ग़म कि मारी। रहती है क़ैद हरदम बोतल में ये बेचारी।। बेबस समझ के इसको जिसने भी चाहा छेड़ा। कितनों ने साथ इसके यूँ रात है गुजारी।। दर-दर भटक रही है सड़कों पे बिक रही है। है बदनसीब कितनी अंगूर की दुलारी।। गलियों से ये महल तक हर रात बनती दुल्हन। देखो नसीब इसका फिर भी रही कुंवारी।। ग़म हो या हो खुशी ये होती शरीक सब में। फिर भी इसे बुरी क्यों कहती है दुनिया सारी।। दिल टूटा जब किसी का इसने दिया सहारा। ग़म के मरीज़ों को है ये जान से भी प्यारी।। समझा न ग़म किसी ने देखो निज़ाम इसका। हँस-हँस के सह रही है हर ज़ुल्म ये बेचारी।। परिचय :- निज़ाम फतेहपुरी निवासी : मदोकीपुर ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)...
मिलो तो तबीयत से
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मिलो तो तबीयत से

मईनुदीन कोहरी बीकानेर (राजस्थान) ******************** मिलो तो तबीयत से मिला करो। दिल खोल कर मुस्कराया करो।। कितने दिनों की है ये जिन्दगी। खुश होकर जिन्दगी जिया करो।। दिल से दिल मिला कर जीओ। मौज से जिन्दगी को जिया करो।। अपनों से जी भर मिला करो। हालचाल सबके पूछते रहा करो।। सदा प्रसन्नता से जिन्दगी जीओ। क्रोध से भी कोसों दूर रहा करो।। हम आपस में यूँ ही मिलते रहें। दुआ सबके लिए भी किया करो।। सुख-दुख का नाम ही है जिन्दगी। तालमेल से ही 'नाचीज' जिया करो।। परिचय :- मईनुदीन कोहरी उपनाम : नाचीज बीकानेरी निवासी - बीकानेर राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी र...
क्या नहीं है मुझमें
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क्या नहीं है मुझमें

विकास सोलंकी खगड़िया (बिहार) ******************** देखो क्या-क्या नहीं है मुझमें सब कुछ तुझसा नहीं है मुझमें। मिट्टी पानी वही आग हवा केवल आसमा नहीं है मुझमें। आती - जाती बहारें तो हैं कोई ठहरा नहीं है मुझमें। आईना देख के लगता है सब पहले सा नहीं है मुझमें। दुनिया से अब छुपाऊं क्या मैं कुछ भी ऐसा नहीं है मुझमें। इतना खाली हुआ सोलंकी कुछ आज बचा नहीं है मुझमें। परिचय :-विकास सोलंकी निवासी : खगड़िया (बिहार)) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करक...
अँधेरे में दिखते सितारे हमेशा
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अँधेरे में दिखते सितारे हमेशा

अब्दुल हमीद इदरीसी मीरपुर, कैण्ट, (कानपुर) ******************** ख़ुदा की रज़ा पर जो चलते नहीं हैं। कभी भाग्य उनके संवरते नहीं है। अँधेरे में दिखते सितारे हमेशा, उजाले में हरगिज़ निकलते नहीं हैं। उन्हीं को मिला करते नायाब मोती, किनारे किनारे जो चलते नहीं हैं। नहीं जीत सकते मुकम्मल वो बाज़ी, समर में जो पूरा उतरते नहीं हैं। नसीबों में आती नहीं हैं बहारें, समय के मुताबिक जो चलते नहीं हैं। उन्हें हर घड़ी रहता गिरने का खतरा, क़दम दर क़दम जो सम्भलते नहीं हैं। कोई मानता ही नहीं उनका कहना, खरे बात पर जो उतरते नहीं हैं। समय का जो उपयोग करते हैं अच्छा, कभी हाथ अपने वो मलते नहीं हैं। परिचय :- अब्दुल हमीद इदरीसी  निवास - मीरपुर, कैण्ट, (कानपुर) साहित्यिक नाम : हमीद कानपुरी घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानिया...
मैं ख़ुद से ही प्यार करूँ
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मैं ख़ुद से ही प्यार करूँ

नवीन माथुर पंचोली अमझेरा धार म.प्र. ******************** मैं ख़ुद से ही प्यार करूँ। या उनसे व्यापार करूँ । जितनी साख कमाई है, उसको तारों-तार करूँ। सबकी नज़रें हैं मुझ पर, किससे आँखें चार करूँ। जीत किसी के हिस्से कर, अपने हक में हार करूँ। कहना है जो कहना है, कितना सोच विचार करूँ। परिचय :- नवीन माथुर पंचोली निवास - अमझेरा धार म.प्र. सम्प्रति - शिक्षक प्रकाशन - देश की विभिन्न पत्रिकाओं में गजलों का नियमित प्रकाशन, तीन ग़ज़ल सन्ग्रह प्रकाशित। सम्मान - साहित्य गुंजन, शब्द प्रवाह, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिन्दी रक्षक २०२० राष्ट्रीय सम्मान घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी ...
शर्त जीने की
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शर्त जीने की

सतपाल 'स्नेही' बहादुरगढ़ (हरियाणा) ******************** शर्त जीने की मुझे यूँ यार बतलाई गई ज़िंदगी की हर तमन्ना हो गई आई-गई वक़्त कम होना रहीं उसकी सदा मजबूरियाँ जब कभी मिलने मिरी लाचार तनहाई गई आजकल की ज़िंदगी से ख़ूब है बेहतर मियाँ ये बता कर मौत मेरे सामने लाई गई मैं नहीं समझा मगर वो भी कहाँ जाना मुझे कुछ न कुछ दोनों दिलों में ही कमी पाई गई दास्ताँ में जबकि दोनों का अहम किरदार था बारहा मेरी कहानी थी कि दुहराई गई आख़िरी वो ही हुआ जो इश्क़ में होता रहा बाद मरने के हमारी दास्ताँ गाई गई परिचय :- सतपाल 'स्नेही' पिताश्री : पंडित खजान सिंह माताश्री : श्रीमती परभी देवी जीवन साथी : श्रीमती सुनीता शर्मा जन्म तिथि : १५ अप्रेल,१९५४ जन्म स्थान : गाँव-ताजपुर,जिला-सोनीपत (हरियाणा) स्थाई निवास : बहादुरगढ़ (हरियाणा) शिक्षा : स्नातक + डी एम एल टी सम्प्रति : ...
हुस्न देखा तेरा
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हुस्न देखा तेरा

रजनी गुप्ता 'पूनम चंद्रिका' लखनऊ ******************** बहर - २१२ २१२ २१२ २१२ हुस्न देखा तेरा तो ठगा रह गया चाँद अपनी जगह पर खड़ा रह गया क़ह्र अँगड़ाइयाँ ख़ूब ढाती रहीं पास मेरे न कुछ भी बचा रह गया ज़ुल्फ़ तेरी घटा बन गई रात को दिल का आँगन यहाँ भीगता रह गया गिरह अनकही सी अधर ने कही बात जब आपको देखकर देखता रह गया कर रही आँख से जो इशारे सनम मैं तो तेरी अदा पर लुटा रह गया खिल रही है ये 'रजनी' सितारे लिए आसमां का भी दामन भरा रह गया परिचय : रजनी गुप्ता 'पूनम चंद्रिका' उपनाम :- 'चंद्रिका' पिता :- श्री रामचंद्र गुप्ता माता - श्रीमती रामदुलारी गुप्ता पति :- श्री संजय गुप्ता जन्मतिथि व निवास स्थान :- १६ जुलाई १९६७, तहज़ीब व नवाबों का शहर लखनऊ की सरज़मीं शिक्षा :- एम.ए.- (राजनीति शास्त्र) बीएड व्यवसाय :- गृहणी प्रकाशन :- राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर म.प्र. के  hindi...
माल पराया
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माल पराया

अख्तर अली शाह "अनन्त" नीमच (मध्य प्रदेश) ******************** माल पराया खाने वाले, जो धन जोड़ रहे हत्यारे। कितने पागल हैं अपनी ही, किस्मत फोड़ रहे हत्यारे।। जैसे गीद्धों की बन आती, झपट रहे देखो ये हरसूं। अवसर खोज रहे अवसर में, कैसे दौड़ रहे हत्यारे।। कोरोना में जिंदा लाशों, के अंबार अस्पतालों में। मौका पाते ही ताकत से, खूब झंझोड़ रहे हत्यारे।। जिनका फर्ज रहा है आंसू, इस विपदा के वक्त में पोंछें। बेशर्मी से देखा वो ही, खून निचोड रहे हत्यारे।। हमदर्दी के पथ को थामे, लोग यहां कम ही दिखते हैं। दुनिया में जो डूब गए हैं, रिश्ते तोड़ रहे हत्यारे।। कैसे हैं नालायक वे जो, फूलों कांटो को ना जानें। कांटो पर ही चलने की जो, करते होड़ रहे हत्यारे।। सेवा का अवसर सम्मुख हैं, ऐसे जैसे घट पीयुष का। तज कर ऐसा अवसर लगता, घट वो फोड़ रहे हत्यारे।। पर...
जिंदगी का फलसफा
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जिंदगी का फलसफा

धीरेन्द्र कुमार जोशी कोदरिया, महू जिला इंदौर म.प्र. ******************** जी ले इन लम्हों को, शाम ना हो जाए। ख्वाहिशों की सांसें तमाम ना हो जाएं। क्या हुआ वो जो, चिलमन में छुपे बैठे हैं? नजर मत हटा ,जब तक सलाम न हो जाए। खुद की कमजोरी की बेड़ियों को तोड़ दे, आदतों का तू कहीं गुलाम न हो जाए। सपनों को देखने का जुनू छोड़ना नहीं, हसरतों के पैर , कहीं जाम ना हो जाएं । भीड़ से अलग चल, बना अपनी पगडंडी, हर एक अदा जुदा रहे, आम ना हो जाए। कोशिशों में दम भर ,हार को भी जीत ले, जब तलक दुनिया में तेरा नाम न हो जाए। रुक मत, तू रुक मत, तू रुक मत "धीरज, जब तलक तेरा कोई मक़ाम ना हो जाए। परिचय :- धीरेन्द्र कुमार जोशी जन्मतिथि ~ १५/०७/१९६२ जन्म स्थान ~ महू ज़िला इन्दौर (म.प्र.) भाषा ज्ञान ~ हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, संस्कृत शिक्षा ~ एम. एससी.एम. एड. कार्यक्षेत्र ~ व्याख्याता सामाजिक गतिवि...
हाथ में हाथ
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हाथ में हाथ

रजनी गुप्ता 'पूनम चंद्रिका' लखनऊ ******************** हाथ में हाथ का है सहारा मिला प्यार तेरा मुझे ख़ूब सारा मिला दर्द मेरे ज़ुदा हो गए हैं सभी जैसे डूबे को पल में किनारा मिला तू करे बेवफ़ाई या कोई सितम क्या कभी तुझको मैं ग़म से हारा मिला जो दग़ा तू करे ये भी अहसान है मान लो मैं मुक़द्दर का मारा मिला राज़ दिल में छुपाए ये पूनम खड़ी रात उसको भी जलता शरारा मिला परिचय : रजनी गुप्ता 'पूनम चंद्रिका' उपनाम :- 'चंद्रिका' पिता :- श्री रामचंद्र गुप्ता माता - श्रीमती रामदुलारी गुप्ता पति :- श्री संजय गुप्ता जन्मतिथि व निवास स्थान :- १६ जुलाई १९६७, तहज़ीब व नवाबों का शहर लखनऊ की सरज़मीं शिक्षा :- एम.ए.- (राजनीति शास्त्र) बीएड व्यवसाय :- गृहणी प्रकाशन :- राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर म.प्र. के  hindirakshak.com पर रचना प्रकाशन के साथ ही कतिपय पत्रिकाओं में कुछ रचनाओं का प्रकाशन हुआ है सम्मान :- समूहों ...
श्मशानो में देह धधकती
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श्मशानो में देह धधकती

अख्तर अली शाह "अनन्त" नीमच (मध्य प्रदेश) ******************** श्मशानो में देह धधकती, कुछ लालच में अटके हैं। दुनिया के बीहड़ में राही, वे ही पथ से भटके हैं।। जिन पे जिम्मेदारी सौंपी, दुनिया ने भगवान कहा। चोरी पर सीना जोरी है, देखो कैसे खटके हैं।। कुछ को राहत मिट्टी ने दी, कुछ के साथ किया ऐसा। इस दहरी से उस दहरी पे, ले जाकर के पटके हैं।। उम्मीदों का दामन जिस-जिस, ने भी छोड़ दिया हारे। घर के पंखों पर शव उनके, हमने देखा लटके हैं।। जिससे ताकत भू से पाई, ताकतवर वे पेड़ रहे। फूल उन्ही की शाखों पे तो, बाधाओं में चटके हैं।। सब कुछ देकर भी जो खुश हैं, मानवता के वाहक हैं। लोग यहां कुछ ऐसे ही तो, अलग सभी से हट के हैं।। परिचय :- अख्तर अली शाह "अनन्त" पिता : कासमशाह जन्म : ११/०७/१९४७ (ग्यारह जुलाई सन् उन्नीस सौ सैंतालीस) सम्प्रति : अधिवक्ता पता : नीमच जिला- नीमच (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : ...
जमीं पर फिर कहीं अब
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जमीं पर फिर कहीं अब

नवीन माथुर पंचोली अमझेरा धार म.प्र. ******************** जमीं पर फिर कहीं अब आसमान उतरेगा। मुसीबत में कहीं वो मेहरबान उतरेगा। न कुछ कहना जरूरी, न कुछ सुनना जरूरी। दिलों के रास्ते वो बेजुबान उतरेगा। इबादत और दुआएँ, असर अपना करेगी, कहीं पर राम-यीशु, रेहमान उतरेगा। रहे महफ़ूज जिसमें, सभी हम लोग सारे, वो लेकर साथ अपने घर-मकान उतरेगा। फ़िकर उसको वहाँ है, यहाँ भर के सभी की, वो लेकर और थोड़ा इम्तिहान उतरेगा। दिया उसने कभी कुछ जो है अपना-हमारा, कहाँ हमसे कभी वो एहसान उतरेगा। परिचय :- नवीन माथुर पंचोली निवास - अमझेरा धार म.प्र. सम्प्रति - शिक्षक प्रकाशन - देश की विभिन्न पत्रिकाओं में गजलों का नियमित प्रकाशन, तीन ग़ज़ल सन्ग्रह प्रकाशित। सम्मान - साहित्य गुंजन, शब्द प्रवाह, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिन्दी रक्षक २०२० राष्ट्रीय सम्मान घोषणा पत...
कोई मुझ पर झुकाव कब देगा
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कोई मुझ पर झुकाव कब देगा

नवीन माथुर पंचोली अमझेरा धार म.प्र. ******************** कोई मुझ पर झुकाव कब देगा। उम्र भर का लगाव कब देगा। अब रहूँ दूर या पास में उसके, इश्क़ इसका चुनाव कब देगा। आ गया हूँ मैं फिर यहाँ बिकने, वो मुझे भाव-ताव कब देगा। इस जमीं के लिए घटाओं को, ये समन्दर बहाव कब देगा। रब मुझे मेरी हर इबादत पर, चैन का रख-रखाव कब देगा। रोग पसरा है इन हवाओं में, वक़्त इससे बचाव कब देगा। परिचय :- नवीन माथुर पंचोली निवास - अमझेरा धार म.प्र. सम्प्रति - शिक्षक प्रकाशन - देश की विभिन्न पत्रिकाओं में गजलों का नियमित प्रकाशन, तीन ग़ज़ल सन्ग्रह प्रकाशित। सम्मान - साहित्य गुंजन, शब्द प्रवाह, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिन्दी रक्षक २०२० राष्ट्रीय सम्मान घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने ...
सुन मेरे छंद मेरे गीत
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सुन मेरे छंद मेरे गीत

अखिलेश राव इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** सुन मेरे छंद मेरे गीत सुन लो मेरी ग़ज़ल हर पल साथ रहें खिले जीवन में कमल। कभी डूबें कभी तैरें झील से नयनों में तेरे खुशनुमा माहौल जिंदगी आये ऐसा पल। में तेरा फरियाद मजनू तेरा शाहजहां मेरी सीरी मेरी लैला मेरी मुमताज महल। तुझ पे कुर्बान छोटी सी कायनात मेरी तेरी हर राह पे डाले हैं फूल चुन कर। अखिल कहता सारी फिजां तुझी से है नहीं जो तू तो जहां बेजान और गुल। सुन मेरे छंद मेरे गीत सुन लो मेरी ग़ज़ल हर पल साथ रहें खिले जीवन में कमल। परिचय :- अखिलेश राव सम्प्रति : सहायक प्राध्यापक हिंदी साहित्य देवी अहिल्या कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय इंदौर निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परि...
उसे क्या गिला है
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उसे क्या गिला है

धैर्यशील येवले इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** कहा है बताओ उसे क्या गिला है जहाँ में अकेला मुझे वो मिला है मुझे देख गाते उसे भी बुलाया खुले में गवाओ उसे जो मिला है जवानी दिवानी बनी है कहानी मुझे जो दिया है वही तो मिला है शमा के उजालो मुझे साथ लेलो उजाला दिखाने यही तो मिला है लगाया जिसे है गले से हमारे वही आज तेरे घरों से मिला है नही है भरोसा जिसे जो मिला है जहाँ में हमारे सभी को मिला है परिचय :- धैर्यशील येवले जन्म : ३१ अगस्त १९६३ शिक्षा : एम कॉम सेवासदन महाविद्याल बुरहानपुर म. प्र. से सम्प्रति : १९८७ बैच के सीधी भर्ती के पुलिस उप निरीक्षक वर्तमान में पुलिस निरीक्षक के पद पर पीटीसी इंदौर में पदस्थ। सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर hindirakshak.com द्वारा हिंदी रक्षक २०२० राष्ट्रीय सम्मान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरच...
हवाएँ
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हवाएँ

नवीन माथुर पंचोली अमझेरा धार म.प्र. ******************** हवाएँ चली है ये कैसी जहाँ की। घड़ी है सभी के लिये इम्तिहाँ की। मुसाफ़िर सरे आम थकने लगे हैं, बड़ी तेज रफ़्तार है कारवाँ की। परों की हिफाज़त है करना ज़रूरी, उड़ाने रहेगी तभी आसमाँ की। जो महफ़ूज होकर खिले थे चमन में, नज़र लग गयी है उन्हें बागबाँ की। हिफाज़त रहेगी उसी की चमन में, रहे कैद में जो अपने मकाँ की। बने कोई अपना, भले हो पराया, ज़रूरत है सबको उसी मेहरबाँ की। परिचय :- नवीन माथुर पंचोली निवास - अमझेरा धार म.प्र. सम्प्रति - शिक्षक प्रकाशन - देश की विभिन्न पत्रिकाओं में गजलों का नियमित प्रकाशन, तीन ग़ज़ल सन्ग्रह प्रकाशित। सम्मान - साहित्य गुंजन, शब्द प्रवाह, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिन्दी रक्षक २०२० राष्ट्रीय सम्मान घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां...
यहां दुश्मनी शिद्दत से निभाई जाती है
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यहां दुश्मनी शिद्दत से निभाई जाती है

धीरेन्द्र कुमार जोशी कोदरिया, महू जिला इंदौर म.प्र. ******************** यहां दुश्मनी शिद्दत से निभाई जाती है। पर हमें ये ढाई घर चाल कहां आती है? उफ वो लहराते बाल, वो बल खाती चाल, वल्लाह ये कातिल अदाएं कहां से लाती है? वो बनके चांद निकलती हैं मेरे सपनों में, उनके खयालों में हमें नींद कहां आती है? ये उल्फत भी कम नहीं किसी बीमारी से, कभी ये हंसाती है तो कभी रुलाती है। पराई आग में हाथ जलाने का बड़ा शौक है, मत भूल ये दुनिया जले पे नमक लगाती है। बड़े भंवर जाल हैं इस जीवन धार में धीरज, ये सफीने को किनारे पे लाकर डुबाती है। परिचय :- धीरेन्द्र कुमार जोशी जन्मतिथि ~ १५/०७/१९६२ जन्म स्थान ~ महू ज़िला इन्दौर (म.प्र.) भाषा ज्ञान ~ हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, संस्कृत शिक्षा ~ एम. एससी.एम. एड. कार्यक्षेत्र ~ व्याख्याता सामाजिक गतिविधि ~ मार्गदर्शन और प्रेरणा, सामाजिक कुरीतियों और अंध...
जिएँ हम ज़िन्दगी कैसे
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जिएँ हम ज़िन्दगी कैसे

शरद जोशी "शलभ" धार (म.प्र.) ******************** जिएँ हम ज़िन्दगी कैसे हमें तदबीर लिखना है। हमारे हाथ से अपनी हमें तक़दीर लिखना है।। जिगर में दर्द, आँसू आँख में, है लब पे ख़ामोशी। हमारी ज़िन्दगी अब ग़म की है तस्वीर लिखना है।। निगाहें फेर ली जिसने समझ कर अजनबी मुझको। उसी के हक़ में अब मुझको तो इक तहरीर लिखना है।। वो मुस्लिम हैं मगर रब को कभी सिज्दा नहीं करते। उन्हीं के वास्ते मुफ़्ती को कुछ ताज़ीर लिखना है।। तुम्हें तो ख़्वाब में आना था आकर चल दिए लेकिन। हमारे ख़्वाब की हमको अभी ताबीर लिखना है।। मुहब्बत की ही दौलत है मिरे दिल के ख़ज़ाने में। तुम्हारे नाम अपनी आज ये जागीर लिखना है।। रहा करते "शलभ" जो यार की धुन में हमेशा गुम। हमें ऐसे ही दीवानों की अब तासीर लिखना है।। परिचय :- धार (म.प्र.) निवासी शरद जोशी "शलभ" कवि एवंं गीतकार हैं। विधा- कविता, गीत, ग़ज़ल। प्राप्त सम्मान-पुरस्कार- राष्ट्रीय हिंद...
कभी काश हमारे होते
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कभी काश हमारे होते

बबली राठौर पृथ्वीपुर टीकमगढ़ (म.प्र.) ******************** २८- मापी मेरे तुम कि जीवन में कभी काश हमारे होते और कभी सुख के साए भी काश हमारे होते ये आज मेरी जो जिन्दगी में गम, दर्द, घाव हैं ना होते ये जख्म आप जो काश हमारे होते ना साथ है ये किस्मत और तकदीर मेरी सजन जला तदबीर हाथों दिल तुम काश हमारे होते खुदा जाने है मेरी हर वो बात मुहोब्बत की करती हूँ इबादत की आप काश हमारे होते तुमसे जन्म-जन्म से की ख्वाईश थी हमारी ना अरमां बिखरते तुम अगर काश हमारे होते परिचय :- बबली राठौर निवासी - पृथ्वीपुर टीकमगढ़ म.प्र. घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख,...
जियो जिंदगी
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जियो जिंदगी

अनूप कुमार श्रीवास्तव "सहर" इंदौर मध्य प्रदेश ******************** जियो जिंदगी जीत दुनिया को लो, बात ख़ुदा की चलें बंदगी जीत लो। इतनी तन्हाई यहां है किसके लिए, बंद पलकों में मंजर सभी खींच लो। फूल उसका बदन तीखें जैसें नयन अंजुरी अंजुरी सी उतरी मेरे सपन। एलौरा की दिवारों में अब उकेरो उसे, मन अंजता में उसको बसालों जरा। बंद पलकों में मंजर सभी खींच लो, जैसे चन्दन से जग सारा यें सींच लों। यतन के जतन भी बहुत खूब किए गुनगुनानें की खातिर कोई गीत लों। बांसुरी राधा बजाएं कहीं श्याम की पीर भुलाने की खातिर यहीं प्रीत लों। परिचय :- अनूप कुमार श्रीवास्तव "सहर" निवासी : इंदौर मध्य प्रदेश घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन...
ग़म भुलाने की
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ग़म भुलाने की

अनन्या राय पराशर संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश) ******************** ग़म भुलाने की बात क्यों ना करें मुस्कुराने की बात क्यों ना करें अपनी तहज़ीब है रिवायत है हम ज़माने की बात क्यों ना करें क्या ये शिकवे ज़ुबां पे रखते हैं दिल चुराने की बात क्यों ना करें बैठकर साथ हम बुजुर्गों के घर घराने की बात क्यों ना करें वो जो मरता है मेरी बातों पे उस दीवाने की बात क्यों ना करें बात क्यों कर हो आंधियों की भला आशियाने की बात क्यों ना करें इतनी ख़ामोशियां भी अच्छी नहीं गुनगुनाने की बात क्यों ना करें परिचय :- अनन्या राय पराशर निवासी : संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, रा...
तुम मेरी ज़द से
ग़ज़ल

तुम मेरी ज़द से

विवेक सावरीकर मृदुल (कानपुर) ****************** तुम मेरी ज़द से अक्सर जरा-सी कम रही कोशिशें पर मैंने की ये खुशी भी कम नहीं औरों की बेबसी पर आती है उनको हँसी झेल सकें हालात दो पल को भी दम नहीं उनपे हौसला न था, हम किस्मत के मारे थे वगरना हमने पेशनगोई, की कोई कम नहीं कब तलक रोते रहोगे, जख्म़ सहलाते हुए मुस्कुराओ इससे, बढ़कर कोई मरहम नहीं नेकियों का साथ मिल रहा है मुसलसल बदी करने वालों तुम इतने भी तुर्रम नहीं . परिचय :-  विवेक सावरीकर मृदुल जन्म : १९६५ (कानपुर) शिक्षा : एम.कॉम, एम.सी.जे.रूसी भाषा में एडवांस डिप्लोमा हिंदी काव्यसंग्रह : सृजनपथ २०१४ में प्रकाशित, मराठी काव्य संग्रह लयवलये, उपलब्धियां : वरिष्ठ मराठी कवि के रूप में दुबई में आयोजित मराठी साहित्य सम्मेलन में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व, वरिष्ठ कला समीक्षक, रंगकर्मी, टीवी प्रस्तोता, अभिनेता के रूप में सतत कार्य, हिंदी और मराठी दो...
ख्वाब नही आते अब रातों में
ग़ज़ल

ख्वाब नही आते अब रातों में

धैर्यशील येवले इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** ख्वाब नही आते अब रातों में असर तो है आपकी बातों में लड़ता भिड़ता हूँ हालात से थक के चूर सोता हूँ रातों में जीने का सबक सिखा गया हँसते-हँसते, बातों-बातों में आओ आज जुर्म करते है लोगो के दर्द चुराते है रातों में काश की तू मुझे समझ पाता तुझे यकीन लोगो की बातों में सच हमेशा मीठा नही होता तू घिरा रहा मीठी-मीठी बातों में आओ मिल कर ढूढ़ते है उसे जो खोया हमने कड़वी बातों में नफरतों से भरे पड़े है सब प्यार ही नही किसी खातों में अंधेरा हर सिम्त पसरा है दोस्त दहलीज़ पर दिया जलाए रातों में तेरी याद शिद्दत से आती है देखता हूँ जब सितारें रातों में मुंतज़िर हूँ लौट आ, धैर्यशील, रूठा जो तू मुझसे बातों-बातों में परिचय :- धैर्यशील येवले जन्म : ३१ अगस्त १९६३ शिक्षा : एम कॉम सेवासदन महाविद्याल बुरहानपुर म. प्र. से सम्प्रति : १९८७ बैच के सीधी भर्ती के...