मैं जो पुकारूं… दौड़ी चली आना
हरिदास बड़ोदे "हरिप्रेम"
गंजबासौदा, विदिशा (मध्य प्रदेश)
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"मैं जो पुकारूं, दौड़ी चली आना,
मैं तेरा भक्त हूं, देर ना लगाना।"
मैं जो पुकारूं, दौड़ी चली आना,
मैं तेरा भक्त हूं, देर ना लगाना।
सदा नमन करूं, मेरी मईया...,
पखारूं तेरे पईया।
ऐसी दया करो, ऐसी दया करो,
ऐसी दया करो,
मेरी मईया..., पखारूं तेरे पईया।।
तू..., पर्वत विराजी कहीं,
धरातल विराजी,
तेरे..., सच्चे भक्तों के तू,
मन में विराजी,
मन मंदिर पूजो,
सब मन मंदिर पूजो,
श्रद्धा भाव भक्ति से,
मन मंदिर पूजो।
सदा नमन करूं,
मेरी मईया...,
पखारूं तेरे पईया।
ऐसी दया करो, ऐसी दया करो,
ऐसी दया करो,
मेरी मईया..., पखारूं तेरे पईया।।
तेरे..., द्वारपाल बजरंगी,
पवनसुत बाला,
तूने..., धन्य किया है प्यारे,
अंजनी का लाला,
पल-पल पुकारूं,
तुझें हर-पल पुकारूं,
श्रद्धा भाव भक्ति से,
पल-पल पुकारूं...

















