नया साल बे-मिसाल
डॉ. मुकेश ‘असीमित’
गंगापुर सिटी, (राजस्थान)
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३१ दिसंबर की सर्द रात है। दो दोस्त अलाव के पास बैठे नए साल का इंतज़ार कर रहे हैं । हाड़ कंपा देने वाली सर्दी। उनके जमे हुए गलों को गर्म करने के लिए अलाव के अलावा पेग के घूँट ही थे। एक दोस्त अपने गले के वोकल कार्ड पर सुरूर का तान छेड़ते हुए बोला,
"यार, नया साल आ रहा है। इसका स्वागत नहीं करोगे तो नाराज़ हो जाएगा स्साला।"
दूसरा दोस्त हँसते हुए बोला, "यार, नया साल तो आ ही जाएगा। लेकिन ये बता, पहचानेंगे कैसे? क्या फर्क है पिछले साल और इस साल में? पहले भी धोखा खा चुके हैं यार। हर बार "नया" बोलकर पुराना ही चिपका दिया जाता है। कुछ भी तो नया नहीं था। बिलकुल वो फ़िल्म "रन" में देखा ना, कैसे "छोटी गंगा" बोल के नाले में कूदवा दिया। सलमान खान इस बार भी कुंवारा ही है। पाकिस्तान इस बार भी अमेरिका के आ...







