मुझे भी बिकना है
डॉ. मुकेश ‘असीमित’
गंगापुर सिटी, (राजस्थान)
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आईपीएल मैच का सीजन चल रहा था। क्रिकेट के बारे में मेरा ज्ञान शुरू से ही सिर्फ फील्ड के बाहर गई गेंद को दौड़-दौड़ कर लाकर बॉलर को पकड़ाने तक सीमित है। कभी-कभी मेरे साथी किसी पड़ोस वाली आंटी के मकान का शीशा तोड़ने पर मेरा झूठा नाम लगा देते थे। इसी बहाने यह झूठी तसल्ली मिल जाती थी कि चलो, पड़ोस की आंटी और अंकल ही सही, कोई तो मानता है कि गेंद हम भी मार सकते हैं, शीशा हम भी तोड़ सकते हैं। क्रिकेट का बाजारीकरण भी देखा है। क्रिकेट अब गलियों से निकलकर बड़े-बड़े उद्योगपतियों की जेब में आ गया है और सेलिब्रिटी के तीसरे पेज पर अपनी जगह बना चुका है। आईपीएल शुरू होते ही मीडिया हाउस की चांदी हो जाती है। बड़े-बड़े होर्डिंग्स और विज्ञापन, आईपीएल की बिडिंग से ही शुरू हो जाते हैं। हर तरफ गहमागहमी का माहौल ...

