
ओमप्रकाश सिंह
चंपारण (बिहार)
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कोरोना की घने कोहरे की वीरानगी में
छिपी दुबकी जिंदगी
सूर्य की प्रखर किरणों की ताप से
उल्लासित,सुवासित,मुखरित हो उठी है।
विधालयो में पुनः मै देखता हूं कि
छात्र -छात्राओं की संख्याओ में बेतहासा
बृद्धि समृद्धि सी हो गई है।
खिले धूप में फिर से पढन-पाढन
आरम्भ हो गई है पढन से उत्साहित
छात्र छत्राए एक नई जीवन की
उम्मीद बांध एक नईं स्फूर्ति के साथ
नये वर्ग में माँ सरस्वती की आराधना में
अपने आपको सतर्कता के साथ संलग्न कर।
जिन्दगी की डोर को स्नेह और करुणामयी
याचना के साथ इस कोरोना के कालखण्ड में।
ओत प्रोत हो माँ शारदे कि कर कमलों में
समर्पित अर्पित कर रहा है अपना सब कुछ।
कोरोना के घने कोहरे की वीरानगी में
छिपी दुबकी जिंदगी ,उल्लासित,सुवासित
फिर से मुखरित हो उठी है।
वैक्सिन के लिए अपने राष्ट्र के
महान वैज्ञानिको को धन्यवाद ज्ञापित कर रहे है।
परिचय :- ओमप्रकाश सिंह (शिक्षक मध्य विद्यालय रूपहारा)
ग्राम – गंगापीपर
जिला – पूर्वी चंपारण (बिहार)
सम्मान – राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिन्दी रक्षक २०२० राष्ट्रीय सम्मान
घोषणा पत्र : मेरे द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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