
विनोद सिंह गुर्जर
महू (इंदौर)
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(हिन्दी रक्षक मंच द्वारा आयोजित अखिल भारतीय कविता लेखन प्रतियोगिता “प्रीत की पाती” में प्रेषित कविता)
प्रेम की गली में ये उदारता है क्यों ? …
बार-बार दिल तुझे पुकारता है क्यों ?…तू नहीं तो तेरा एहसास है मुझे,
ऐसा लगे जैसे आस-पास है मुझे।-२
तेरे-मेरे चित्र नयन, उतारता है क्यों ?
बार-बार दिल तुझे पुकारता है क्यों ?सच मानिए जब से आप मिल गए।
मन मधुबन में कई पुष्प खिल गए।-२
अंग-अंग दीप अब उजारता है क्यों ?
बार-बार दिल तुझे पुकारता है क्यों ?मीरा श्याम रंग में दीवानी हो गई।
भक्ति अनुराग की कहानी हो गई।-२
गरल में सुधा, नेह उतारता है क्यों ?
बार-बार दिल तुझे पुकारता है क्यों ?राधा व्याकुल हुई घनश्याम आ गए।
शबरी के जूठे बेर राम खा गए । -२
ईश्वर भी प्रेम बस हारता है क्यों ?
बार-बार दिल तुझे पुकारता है क्योँ ?
परिचय :- विनोद सिंह गुर्जर आर्मी महू में सेवारत होकर साहित्य सेवा में भी क्रिया शील हैं। आप अभा साहित्य परिषद मालवा प्रांत कार्यकारिणी सदस्य हैं एवं पत्र-पत्रिकाओं के अलावा इंदौर आकाशवाणी केन्द्र से कई बार प्रसारण, कवि सम्मेलन में भी सहभागिता रही है।
सम्मान – हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिंदी रक्षक २०२० सम्मान
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