
प्रियंका पाराशर
भीलवाडा (राजस्थान)
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सभ्यता, संस्कृति, मान्यता,
विश्वास है यहाँ विद्यमान
भिन्न-भिन्न रंगों से सुशोभित
मेरा रंगीला राजस्थान
धरातल का एक भाग रेतीला
तो दूसरा भाग हरा-भरा
इतिहास यहाँ के लोगों की
वीरता के किस्सों से भरा
पद्मिनी का जौहर, मीरा की भक्ति,
पन्ना का बलिदान
प्रताप, चेतक, राणा सांगा के
रण कौशल पर अभिमान
महल, मंदिर, दुर्ग, हवेलियों
की है अद्भुत शिल्पकारी
घूमर, कालबेलिया जैसा लोकनृत्य,
बणीठणी की चित्रकारी
संत, सत्तियों, कवियों और
भगतो की है आन-बान
यहाँ की सांस्कृतिक धरोहर पर
देश को है अभिमान
आकर्षक पर्यटन स्थल,
मेले और हाट बाजार
रंगीले राजस्थान का
सजीला है श्रृंगार
त्यौहारो का संगम,
अतिथि का सम्मान
लोकगीतो की गूँज संग
तानपुरे की तान
घूंघट की मर्यादा
और पगड़ी की शान
शौर्य, साहित्य, कला,
संगीत की है यहाँ खान
मेरे रंगीले राजस्थान का
अनंत है गुणगान
परिचय :- प्रियंका पाराशर
शिक्षा : एम.एस.सी (सूचना प्रौद्योगिकी)
पिता : राजेन्द्र पाराशर
पति : पंकज पाराशर
निवासी : भीलवाडा (राजस्थान)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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