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माहवारी
कविता

माहवारी

अन्नपूर्णा रामटेके डुमरडीह- दुर्ग (छत्तीसगढ़) ******************** मत समझो इसको बोझ कभी, यह नारी जीवन की धारा है। माँ बनने का वरदान यही, सृष्टि का सुंदर सितारा है।! जिससे जीवन अंकुर फूटे, वह प्रक्रिया क्यों शर्म बने? जिससे जग में खुशियाँ आएँ, वह कारण क्यों भ्रम बने? कुछ दिन की पीड़ा सहकर भी, नारी मुस्कान सजाती है। धरती जैसी सहनशील बन, हर रिश्ता प्रेम निभाती है।! माहवारी कोई रोग नहीं, यह प्रकृति का उपहार है। ज्ञान, स्वच्छता, जागरूकता, हर बेटी का अधिकार है।! संकोचों की दीवार गिराओ, खुलकर अब संवाद करो। स्वास्थ्य, सफाई, सही समझ से, जीवन को आबाद करो।! ना टोको उसको मंदिर में, ना सपनों पर रोक लगाओ। नारी शक्ति का मान करो, सम्मान का दीप जलाओ।! हर माँ, बहना और बेटी को, सम्मान भरा व्यवहार मिले। माहवारी पर मौन नहीं अब, जागरूकता का प्रचार मिले।! प...