कठिन डगर
किरण विजय पोरवाल
सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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जीवन की यह राह कठिन है,
जीवन की यह डगर कठिन है,
कितनी उलझन कितना भार
कितनी चिंता कितना काम।
हर उम्र के पड़ाव में
बढ़ता जाता है यह भार,
मानसिक शारीरिक
व्यापारिक सांसारिक,
उलझन में फसता जाता इंसान।
चिंतन कम चिंता ज्यादा,
भक्ति कम बदलाव ज्यादा,
स्मरण कम उलझन ज्यादा,
दर्शन कम प्रदर्शन ज्यादा।
होड़ की इस दौड़ में घानी
का सा बेल जुत गया प्यारा,
जीवन के इस चक्र में
घूमता-घूमता रह गया न्यारा,
आओ इस उलझन को हम दूर करें।
चिंतन और मनन से,
पठन और पाठन से,
ज्ञान ध्यान
योग और विद्या से,
संतो महंतों की वाणी से ,
दान और पुण्य से,
तीर्थो में भ्रमण से,
आदर और सत्कार से,
सेवा और पूजा से,
प्रेम और विश्वास से ,
इस काया को कंचन
करें मेल और मिला से।
परिचय : किरण विजय पोरवाल
पति : विजय प...

