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Tag: केशी गुप्ता

आखिरी सफर
लघुकथा

आखिरी सफर

केशी गुप्ता (दिल्ली) ********************** मंजुला के पार्थिव शरीर को देखकर कोई कह नहीं सकता कितना संघर्ष से भरा जीवन रहा होगा उसका। चेहरे पर वही सौम्यता और शांति थी। किरण टकटकी लगाए मंजुला के बेजान शरीर को देख रही थी। आंखों से रिमझिम रिमझिम बरस रही थी। अतीत की यादें आ जा रही थी। मंजुला और किरण बचपन की सहेलियां थी। जीवन के उतार-चढ़ाव सुख-दुख की भागीदार। एक दूसरे की सीक्रेट डायरी जैसी। जिसमें इंसान अपने अंदर के सब विचार खोल देता है। आज मंजुला का अंतिम सफर था किरण को अकेला महसूस हो रहा था। अब किससे वह अपने दिल की बात कह पाएगी। कुछ देर में मंजुला का शरीर भी नहीं रहेगा। आने जाने वाले सभी लोग मंजुला के जीवन पर चर्चा कर रहे थे। बेहद शांत मधुर सादगी वाली थी मंजुला। हर हाल में खुश रहने वाली ईश्वर पर भरोसा करने वाली इस तरह की कई बातें रिश्तेदार और अन्य आने जाने वाले कर रहे थे। किरण ही जानती थी कि ...
लोहड़ी मकर संक्रांति  का सामाजिक पहलू
आलेख

लोहड़ी मकर संक्रांति का सामाजिक पहलू

केशी गुप्ता (दिल्ली) ********************** भारतीय संस्कृति में त्योहारों का अपना एक विशेष महत्व है। जिनको धार्मिक नजर से देखा जाता है परंतु हर त्यौहार को मनाने का सबसे बड़ा सामाजिक कारण समाज को बांधना और जोड़ना है।  यदि हम किसी भी त्योहार को सामाजिक दृष्टि से देखें तो एक दूसरे से गले मिलना ,साथ बैठना ,मिलकर उत्साह से खुशी मनाना तथा नाचना गाना ,खाना-पीना यह सभी हर त्यौहार का हिस्सा होते हैं। भारत जो एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है इसमें भिन्न-भिन्न तरह के त्योहार मनाए जाते हैं। लोहड़ी का त्यौहार  देशभर में  मनाया जाता है। लोहड़ी  मकर संक्रांति पोंगल इत्यादि अलग-अलग नामों से यह त्यौहार भिन्न-भिन्न राज्य और धर्म के हिसाब से  मनाया जाता है। यूं तो  लोहड़ी मकर संक्रांत का महत्व सर्दी के खत्म होने और सूर्य के स्थान बदलने  का  सूचक माना जाता है। संक्रांति के दिन बहुत से लोग सूर्य की पूजा कर पवित्र न...
कुदरत का पैगाम
कविता

कुदरत का पैगाम

केशी गुप्ता (दिल्ली) ********************** रो रहा है आसमां देख धरती का हाल दंगाइयों के हाथ से पिट रहा यूथ यहां पथ भ्रमित है दिशा चल रही नफरत की हवा खेल रहे भविष्य से आज के पहरेदार दबा रहे जज्बातों को खींच दिलों में दीवार लड़ा रहे एक दूजे से धर्म के पहरेदार गरज रहे हैं मेघ भी देख कर यह अत्याचार ना बांटो इंसान को रहने दो इंसानियत कुदरत यह दे रही चीख चीख कर पैगाम . परिचय :- केशी गुप्ता लेखिका, समाज सेविका निवास - द्बारका, दिल्ली आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, हिंदी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें … और अप...
परवरिश
लघुकथा

परवरिश

केशी गुप्ता (दिल्ली) ********************** कॉफी हाउस से गुस्से में उठ स्नेहल बदहवास सी बिना रुके चलती ही जा रही थी स्वाति ने आवाज दी स्नेहल रुक जाओ मगर स्नेहल अनसुना कर वहां से निकल गई उसे मंजिल की खबर नहीं थी। ना जाने वह किस बात की सजा खुद को दे रही थी? आनंद और स्वाति कुछ ना कर सके। स्नेहिल जिंदगी से खफा थी सब कुछ होते हुए भी जिंदगी में कड़वाहट थी। मां बाप के बीच की दूरी ने उसके अंदर एक अजब अहसास पैदा कर दिया था। जाने अनजाने कब वह दोनों से दूर हो गई पता ही नहीं चला। स्वाति ने स्नेहल के पैदा होने पर अपनी दुनिया को बहुत छोटा कर लिया था। उठते बैठते उसे सिर्फ और सिर्फ स्नेहल का ख्याल था। जी जान से उसकी परवरिश में खो गई यहां तक कि नौकरी भी छोड़ दी मगर फिर भी स्नेहल को बांध ना सकी। बच्चों की परवरिश में कितना ही समय दो मगर बात फिर वही जन्मों के संबंधों और किस्मत के लिखे पर आ जाती है, चाहे अनचा...
बदलेंगे हम तो बदलेगा समाज
आलेख

बदलेंगे हम तो बदलेगा समाज

केशी गुप्ता (दिल्ली) ********************** सृष्टि की रचना में सब समान है मगर हम इंसानों ने अपने हिसाब से नियम कानून बनाकर समाज की स्थापना की है। किसी भी नियम कानून व्यवस्था को इसलिए बनाया जाता है की जीवन सुचारू रूप से चल सके मगर हम इंसान ही उन नियमों कानूनों का उल्लंघन कर और उनकी आड़ में समाज में कुरीतियां पैदा कर देते है। मगर यहां यह समझना जरूरी है की कोई भी नियम जो किसी भेद विशेष को लेकर  बनाया जाए वह इंसानियत के विरुद्ध है। जो समय के साथ साथ एक विकराल रूप ले लेता हैं। प्राचीन काल से ही मर्द औरत के बीच केवल मात्र लिंगभेद को लेकर बहुत से नियम कानून औरतों के लिए बनाए गए और उन्हें सामाजिक तौर पर सदैव दबाया गया जो इंसानियत के विरुद्ध है। समय के बदलाव के साथ नारी जाति के उत्थान के लिए बहुत से शिक्षित लोग आगे आए जिन्होंने समाज द्वारा बनाई गई कुरीतियों का खंडन किया और उसे एक सामान्य जीवन जीने...
प्रसंग
कविता

प्रसंग

केशी गुप्ता (दिल्ली) ********************** अंबे गौरी के देश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का गूंज रहा नारा है काली दुर्गा की धरती पर हो रहा चीरहरण मीरा सीता के आंचल पर करते हर पल शक गंगा जमुना की धारा में धो कर अपने दुष्कर्म मर्यादा की आड़ में करते हैं पाखंड मंदिर मस्जिद के नाम पर लड़ते हैं हरदम संस्कृति के नाम पर कहते देश महान कब जागेंगे कब सोचेंगे जीवन का प्रसंग . लेखक परिचय :- केशी गुप्ता लेखिका, समाज सेविका निवास - द्बारका, दिल्ली आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, हिंदी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें … औ...
धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र और मानवता
आलेख

धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र और मानवता

केशी गुप्ता (दिल्ली) ********************** भारत एक धर्मनिरपेक्ष  राष्ट्र है। जिसमें भिन्न भिन्न प्रकार के धर्म पाए जाते हैं जैसे हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, अलग-अलग  धर्मों के अपने अलग-अलग रीति रिवाज और परंपराएं हैं। हर धर्म का अपना अलग इतिहास और पृष्ठभूमि है। सभी धर्मों के अपने त्यौहार भी अलग हैं जिन्हें वह अपनी धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार मनाते हैं। ईश्वर ने सृष्टि मैं मानव को उच्च स्थान दिया  मानवता ही मानव का  सर्वोत्तम धर्म है मगर समय के बदलाव के साथ-साथ मानव ने कई सारे धर्म खड़े कर दिए जिसने समाज को विभिन्न भागों में विभाजित कर दिया, जो कई रंगों की तरह लुभावना है तो दूसरी ओर समाज में फैली नफरत का प्रमुख कारण है। कोई भी धर्म मानव को नफरत या अहिंसा का पाठ नहीं पढ़ाता है मगर  मानव मानवता को भूलकर अपने बनाए हुए धर्म रीति-रिवाजों परंपराओं त्योहारों का सही महत्व तथा यथार्थ भूल जात...
प्रदूषित सांसे और जिंदगी
आलेख

प्रदूषित सांसे और जिंदगी

केशी गुप्ता (दिल्ली) ********************** दिल्ली का प्रदूषण इतना बढ़ गया है की सांस लेना मुश्किल हो गया है। जिसके चलते दिल्ली सरकार को एहतियात के तौर पर स्कूलों में ४ नवंबर तक की छुट्टी घोषित करनी पड़ी है। ४ नवंबर से यातायात मे सम और विषम नंबर का कानून भी कुछ दिन के लिए लागू किया जा रहा है जिससे कुछ हद तक यातायात और प्रदूषण को लेकर आवाम को कुछ राहत मिल पाएगी। सवाल यह उठता है की प्रदूषण का कारण क्या है? जबकि इस साल दिवाली पर एक बड़ी संख्या में लोगों ने पटाखे नहीं जलाए। पटाखों को लेकर सख्त कानून बनाया गया है मगर फिर भी वातावरण दूषित है। वातावरण में धुंआ फैला हुआ है जो अत्यंत हानिकारक और जानलेवा साबित हो रहा है। इस बात से सरकार और आवाम ना खबर नहीं कि यह प्रदूषण खेतों में जलाए जाने वाली पराली से है। अनाज काटने के बाद जो अवशेष बच जाते हैं उसे पराली कहा जाता है जिसे बाद में जला दिया जाता है। ...
सच्चाई
कविता

सच्चाई

केशी गुप्ता (दिल्ली) ********************** सिसक रही है जिंदगी उमर के पड़ाव पर देख के होता है, अहसास सिर्फ अपनी लाचारी का उम्र लंबी हो या ना हो जिंदगी खुशहाल हो तय करे जो सफर ये सच्चाई वो जान ले मौत मंजील नही किसी की रास्ता है उस पार का ज़िदगी का मजा तभी है गर सफर आसान हो . लेखक परिचय :- केशी गुप्ता लेखिका, समाज सेविका निवास - द्बारका, दिल्ली आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, हिंदी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें … और अपनी कविताएं, लेख पढ़ें अपने चलभाष पर या गूगल पर www.hindirakshak.com खोजें...🙏🏻 आपको यह...
लोकतन्त्र की मार
लघुकथा

लोकतन्त्र की मार

केशी गुप्ता (दिल्ली) ********************** कैसे है मुहम्मद भाई? शर्मा जी ने दूर ही से आवाज लगाई। शुक्र है खुदा का भाई जान मुहम्मद भाई मुस्कुराते हुए बोले। बहुत अरसे से मुहम्मद भाई और शर्मा जी एक ही महौल्ले में रहते थे दोनों में अच्छी जान पहचान थी। गली से गुजरते दुआ सलाम होती ही थी . क्या खबर छपी है ? आज पेपर में शर्मा जी ने पूछा . भाई जान अब कहां कुछ खबर छपती है हर तरफ हाहाकार फैली है मगर मीडिया बिकाऊ हो चला है . सही कह रहे है आप . लोकतन्त्र सिर्फ नाम भर का है . जाने लोग किस ओर जा रहा है . राजनीति का स्तर गिर गया है. उठने वाली हर आवाज को दबा दिया जाता है . ईश्वर नेक राह दिखाए. आमीन मुहम्मद मुस्कुरा उठे. शर्मा जी गली से निकल गए , आज उन्हे अपनी बेटी के ससुराल जाना था शादि का कार्ड देने .शादि की तारिख पास आ चूकी थी , उसी सिलसिले में बाजार से कुछ सामान लेने निकले थे . बैंकों में पैसा होते हु...
करवा चौथ आस्था और प्रेम
आलेख

करवा चौथ आस्था और प्रेम

केशी गुप्ता (दिल्ली) ********************** कुदरत ने औरत को जितना शारिरिक तौर पर कोमल बनाया है उतना ही उसे प्यार , ममत्व से भरा है . हमारी भारतीय संस्कृति पुरूष प्रधान रही है . औरत का अस्तित्व सदैव पुरूष से जोड़ा जाता है . अधिकतर परंम्पराएं या दायित्व  औरत से ही जोड़े  है . करवा चौथ का व्रत भी उन्ही परंम्पराओं का हिस्सा है . अलग अलग धर्मो और जातियों के अपने अलग अलग रिवाज तथा आस्थाएं है .  महिलाएं कई तरह के व्रत रखती है , जिनमें से एक करवा चौथ का व्रत है . जिसे पत्नी अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती है . कई कंवारी लड़कियां भी अपने प्रेमी के लिए या गणपति जी से अच्छे पति की  कामना के लिए रखती है . इस व्रत के अनुसार सुबह तारों की छाय में सरगी खाई जाती है , उसके बाद दिन भर चादं निकलने तक पानी या भोजन कुछ नही . चांद निकलने के बाद चादं को अर्क दे कर ही व्रत खुला जाता है . इस व्रत को लेकर स्त्रिय...
जम्मू उधमपुर
यात्रा वृतांत

जम्मू उधमपुर

केशी गुप्ता (दिल्ली) ********************* कुदरत बेहद ही खुबसुरत है , मगर उसकी खुबसूरती को बनाए रखना मानव पर निर्भर करता है . जम्मू उधमपुर शहर हमारे भारत का हिस्सा है . पहाड़ों की नगरी . जम्मू का नाम सदैव कश्मीर घाटी से जोड़ा जाता है , जिसे कभी धरती का स्वर्ग माना जाता था मगर बटवारे के बाद से राजनैतिक लिए गए फैसलों ने कश्मीर मुद्दे को कभी खत्म होने नही दिया .देखते देखते धरती का स्वर्ग उजड़ता चला गया . हर वक्त खौफ के साय में ऱहती आवाम की हालात किसी से छूपी नही है , जिसका असर जम्मू , उधमपुर में देखने को भी मिलता है . हर गली चौहारे पे फौजी दिखाई देते है. अभी हाल ही में भांजे की शादि में उधमपुर जाना हुआ क्योंकि हमारे पूर्वज कौटली , मीरपूर से है तो हमारी बिरादरी के बहुत से लोग जम्मू , उधमपुर शहर में बसते है . दिल्ली से जम्मू हम अपनी कार में ही गए . हाई वे का रास्ता अच्छा है , किसी तरह की कोई प...
दोस्त की पहचान
लघुकथा

दोस्त की पहचान

*********** केशी गुप्ता (दिल्ली) राम और श्याम दोनो बहुत ही गहरे मित्र थे .  उनकी मित्रता बचपन की थी, साथ खेले और साथ ही बड़े हुए . बारवीं की  परिक्षा खत्म हो चुकी थी .  विध्यालय की शिक्षा के पश्चात अब आगे विश्व विध्यालय में जाने का समय था .  अन्य विधायर्थियों की भातिं ये दोनों मित्र भी इसी चिंता में थे कि आगे क्या और कैसे किया जाए  . राम जहां  पढ़ाई में ठीक सा था तो श्याम सदैव कक्षा में अवल  स्थान प्राप्त करता था .   दोनो के परिवारों में रहन -सहन  की भी अन्तर था .  परन्तु इन सब अन्तर के बावजूद दोनों में अटूट मित्रता रही .  विध्यालय के परिणीम स्वरूप दोनों को अलग अलग विश्व विध्यालय में दाखिला मिला .  वह दोनो ही अपनी अपनी दिन चर्या और पढ़ाई में व्यस्त हो गए . अब वह कभी-कभार ही मिल पाते और  पिछले समय को याद करते . फिर एक दिन राम ने अपने जन्मदिन की पार्टि रखी और अपने सभी नए पूराने दोस्तो ते अम...
हिचकिचाहट
लघुकथा

हिचकिचाहट

*********** केशी गुप्ता (दिल्ली) संजय और नीलम रिश्ते में यूं तो एक दूसरे के कुछ नही लगते थे, पर एक ही बिरदारी से थे . बस इसी नाते आपस में जान पहचान थी . फिर एक बार किसी करीबी रिश्तेदार के यंहा, उनके बेटे की शादि में नीलम का जाना हुआ . इतफाक से वंहा संजय भी आया हुआ था . शादि से पहले की भी कई रस्में होती है, जैसे महंदी, सगन इत्यादि .  बाहर से आने वाले सभी अतिथी तीन , चार दिन का प्रोग्राम बना कर आए हुए थे . नीलम और संजय भी चार दिन के लिए दिल्ली से जयपूर पहुंचे थे . एक ही शहर के होने के बावजूद भी कभी दोनों का आमना सामना नही हुआ, पर यहां शादि के इन चार दिनों में वह एक दूसरे के बेहद करीब आ गए . दोनों को यूं लग रहा था जैसे वह एक दूसरे को बहुत पहले से जानते और समझते है .  चार दिन का समय अच्छे से गुजर गया . वक्त का पता ही नही चला फिर वापसी की उड़ान भरने का समय आ गया . दोनो ने एक दूसरे का नम्बर लेत...
देहाड़ी
लघुकथा

देहाड़ी

*********** केशी गुप्ता (दिल्ली) हथौड़ की चोट से सारा महौल्ला गूंज रहा था .  तपती दोपहर में गोपाल देहाड़ी पर  लगा हआ था . एक पुराना घर गिरा कर नई तीन मंजीला ईमारत बनाई जा रही थी . गोपाल और उसके साथी अब्दुल को इस पुराने ढांचे को तोड़ने का काम मिला था . गोपाल को कुछ हल्का सा बुखार भी था पर वह आराम नही कर सकता था . आखिर गरीब का घर दिन भर की देहाड़ी से ही तो चलता है .  बुखार की वजह से तेज चमकता सूरज आज उसे परेशान कर रहा था  वरना ये तो उस जैसे मजदूर का रोज का काम है . अब्दुल ने गोपाल के सुखे होंठ और बहते पसीने को देख कहा भाई" थोड़ी देर आराम कर लो,  पानी पी रोटी खा कुछ देर लेट जाओ यहीं कहीं छाया में" . मै तो कर ही रहा हूं काम और कौन सा आज ही ढह जाएगा ये ढांचा और कल नई ईमारत खड़ी हो जाएगी .   जान नही प्यारी क्या ? ठेकेदार के आने में अभी वक्त है . गोपाल हांफ रहा था .   सो अब्दुल  की बात सुन छाया ...
अधुरापन
लघुकथा

अधुरापन

*********** रचियता : केशी गुप्ता झील के किनारे नीला बैठी हुई पानी की  कल कल की मधुर आवाज का आंनद ले रही थी कि तभी पिछे से बंटी ने आवाज दी , नीला अब अंदर आ जाओ सूरज ढल चुका है और ठंड भी बड़ गई है . नीला और बटीं चार दिन के लिए नैनीताल घुमने आए थे.  नैनी झील के पास ही होटल बुक किया था .  बंटी की आवाज सुन नीला उछी और उसका हाथ थामें होटल की ओर चल दी .  नीला और बंटी आज भी ये समझ नही पा रहे थे कि ऐसी क्या बात है दोनों के बीच जिसने उनहे चाहे अनचाहे अक दूसरे के इतने करीब कर दिया है कि उन्हे इब समाज की परवाह नही रही . नीला शादि के 20 साल गुजर जाने के बाद भी प्रमोद के साथ ऱिश्ता जोड़ नही पाई थी .  उसके और प्रमोद के बीच एक अजीब सी खामोशी थी , जिसने कभी उन्हे करीब होने नही दिया . कारण प्रमोद ही था शुरू से ही वह हर छोटी बात पर नीला से खफा हो कई कई महीन बात नही करता था . धीरे धीरे नीला उस सबकी आदि हो गई...