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Tag: चेतना सिंह प्रकाश “चितेरी”

जिंदगी की सीख
कविता

जिंदगी की सीख

चेतना सिंह प्रकाश "चितेरी" प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) ******************** जिंदगी रुला रही है-रो लें, जिंदगी हँसा रही है-हँस लें। जिंदगी अभिनय करा रही है- मुस्कुरा निभा लें, जिंदगी एक सफर है- अनंत की ओर बढ़ चलें। जिंदगी मुसाफिर है इस संसार में, आना-जाना इसका नियम पुराना है। रुक न पाया कोई यहाँ कभी, यादों का ही बस खजाना है। यहीं मोह का बंधन है, गहरे रिश्तें भी टूट जाना है । अपनों का बिछड़ना- यहीं रोना है। सबको एक दिन छोड़ जाना है, चाहे जितना चाहें भी कुछ न भूल पाना है। परिचय :- चेतना सिंह प्रकाश "चितेरी" निवासी : प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपन...
बरसते मेघों की पुकार
कविता

बरसते मेघों की पुकार

चेतना सिंह प्रकाश "चितेरी" प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) ******************** बरस रहे हैं मेघ, तड़प रही हूँ मैं, भीगनें को दिल चाहता है, रोक न पाऊँगी ख़ुद को, तुमसे मिलने जी करता है। आकर देखो अपने द्वार पर, बागों में मोर नाच रहा, पक्षियों का कलरव हो रहा, रोक न पाओगे ख़ुद को, मुझसे मिलने को मन करेगा। आनेवाला है सावन, अभी से धानी चुनरिया ओढ़कर, पलकें बिछा के रखी हूँ, आना होगा तुम्हें, न कोई अब बहाना चलेगा। मेरा हाल सुनकर, मेरे प्रियतम! रोक न पाओगे ख़ूद को, बरस रहे हैं मेघ गरज रहा है बादल। परिचय :- चेतना सिंह प्रकाश "चितेरी" निवासी : प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्...
गोरैया
कविता

गोरैया

चेतना सिंह प्रकाश "चितेरी" प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) ******************** मैं नन्ही-सी जान, ऊंँची है मेरी उड़ान। भला मैं कैसे? थक के हार जाऊंँ, मेरी भी बने पहचान। मेरी भी चाह है! नन्हें-नन्हें कदमों से चलती जाऊंँ, पंख पसारे गगन में उड़ती जाऊंँ। माना कठिन है दौर, कहीं नही है मेरा ठौर, रुकेंगे वहीं पे मेरे कदम, जहांँ में होगा मेरा स्थान। मैं नन्ही-सी जान, चेहरे पर है मुस्कान। परिचय :- चेतना सिंह प्रकाश "चितेरी" निवासी : प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कव...
मांँ
कविता

मांँ

चेतना सिंह प्रकाश "चितेरी" प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) ******************** बताओ पापा ! मांँ कैसी होती है? जितना मैंने जाना मांँ भगवान की प्रतिरूप होती है। बताओ दीदी! माँ कैसी होती है? जितना मैंने पहचाना माँ ममता की मूरत होती है। बताओ भैया! माँ कैसी होती है? जितना मैंने समझा, हर मांँ सुंदर है, जिसके हृदय में स्नेह अपार होती है। मेरे पापा! मेरी दीदी! मेरे भैया! मैंने महसूस किया, माँ तारा बनकर भी हम सबके पास रहती है। माँ की सूरत कभी नहीं देखी, लेकिन मैं जान गया, माँ किसी से भेदभाव नही करती, माँ सबसे अच्छी होती है। परिचय :- चेतना सिंह प्रकाश "चितेरी" निवासी : प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं...