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Tag: डॉ. जियाउर रहमान जाफरी

तमाम मामले ग़ैरों पे डाल देता है
कविता

तमाम मामले ग़ैरों पे डाल देता है

डॉ. जियाउर रहमान जाफरी गया, (बिहार) ******************** तमाम मामले ग़ैरों पे डाल देता है वो बार बार सलीके से टाल देता है मेरा खुदा भी गुनाहों की दे रहा है सज़ा मेरा नसीब भी सिक्का उछाल देता है कभी समझ ही न पाया मैं अपने हाकिम को ज़रा सी बात पे कितने सवाल देता है मैं कितने लफ़्ज़ को आख़िर संभाल कर बोलूं वो एक लहजे पे दिल से निकाल देता है नहीं कुछ होगा तुम्हारी किसी भी कोशिश से वही उरूज वही फिर ज़वाल देता है परिचय :-  डॉ. जियाउर रहमान जाफरी निवासी : गया, (बिहार) वर्तमान में : सहायक प्रोफेसर हिन्दी- स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, मिर्जा गालिब कॉलेज गया, बिहार सम्प्रति : हिन्दी से पीएचडी, नेट और पत्रकारिता, आलोचना, बाल कविता और ग़ज़ल की कुल आठ किताबें प्रकाशित, हिन्दी ग़ज़ल के जाने माने आलोचक, देश भर से सम्मान। घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचन...
बैठती है
ग़ज़ल

बैठती है

डॉ. जियाउर रहमान जाफरी गया, (बिहार) ******************** न यों फूलों पे सुर्खी बैठती है तुम्हारे लब पे तितली बैठती है फिराया था कभी जो उंगलियां मैं ना अब बालों में कंघी बैठती है जो तुम पैवस्त हमे में हो गए हो दिसंबर की भी सर्दी बैठती है मुझे बाहर से मुश्किल है समझना बहुत अंदर से हल्दी बैठती है ना उस कॉलेज में पढ़ना मुझे है जहां बाहर से लड़की बैठती है परिचय :-  डॉ. जियाउर रहमान जाफरी निवासी : गया, (बिहार) वर्तमान में : सहायक प्रोफेसर हिन्दी- स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, मिर्जा गालिब कॉलेज गया, बिहार सम्प्रति : हिन्दी से पीएचडी, नेट और पत्रकारिता, आलोचना, बाल कविता और ग़ज़ल की कुल आठ किताबें प्रकाशित, हिन्दी ग़ज़ल के जाने माने आलोचक, देश भर से सम्मान। घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कवित...
आ गई है
कविता

आ गई है

डॉ. जियाउर रहमान जाफरी गया, (बिहार) ******************** वो लड़की घर पे कैसे आ गई है शिकन बिस्तर पे कैसे आ गई है कभी जो चाहती थी बस मोहब्बत वो अब जेवर पे कैसे आ गई है कभी कुछ बात हो जाती है घर में ये तूं खंजर पे कैसे आ गई है हर इक कतरा इसी से है परेशां नदी पत्थर पे कैसे आ गई है कोई देखे अगर बदनाम कर दे वो फिर छप्पर पे कैसे आ गई है गजल पनघट पे शरमाती थी कल तक वो अब शॉवर पर कैसे आ गई है परिचय :-  डॉ. जियाउर रहमान जाफरी निवासी : गया, (बिहार) वर्तमान में : सहायक प्रोफेसर हिन्दी- स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, मिर्जा गालिब कॉलेज गया, बिहार सम्प्रति : हिन्दी से पीएचडी, नेट और पत्रकारिता, आलोचना, बाल कविता और ग़ज़ल की कुल आठ किताबें प्रकाशित, हिन्दी ग़ज़ल के जाने माने आलोचक, देश भर से सम्मान। घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एव...