हिन्दी भाषा
डॉ. भावना सावलिया
हरमडिया, राजकोट (गुजरात)
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(आल्हा छ्न्द)
हिन्दी भाषा भारत माता
की गरिमा की है पहचान।
अपनी अद्भुत विशेषता पर,
संविधान में पाया स्थान।
भाषाओं की वह साम्राज्ञी,
सुख-दुख की सरगम का सार।
मंत्र कि सूत्रात्मकता का वह,
जीवन मूल्यों का भण्डार।
संघर्षों का किया सामना,
अन्यों को करके स्वीकार।
दृढ प्रण, धैर्य, प्रयास शील से,
पाया हिंदी ने अधिकार।।
माह सितंबर की चौदह तिथि,
थी सन् उन्नीस सौ उन्चास।
मिला राजभाषा का दर्जा,
फैला भारत में उल्लास।।
नहीं वर्णमाला हिन्दी-सी,
वैज्ञानिकता भी अन्यत्र ।
हिन्दी भावात्मकता लेकर
हुई प्रतिष्ठित है सर्वत्र।।
सीमा पर बंधुत्व भाव से,
करती है सबसे व्यवहार।
गले लगाती अमित प्रेम से,
करती सबका है सत्कार।।
आत्मोत्सर्ग प्रजा में जागृत
करने का हिन्दी आधार।
हिन्दी वीर शहीदों का है,
त्याग समर्पण का शृ...


