समाज का दर्पण है डॉ. मुकेश “असीमित” की पुस्तक: गिरने में क्या हर्ज है
डॉ. मुकेश ‘असीमित’
गंगापुर सिटी, (राजस्थान)
********************
व्यंग्य संग्रह - गिरने में क्या हर्ज़ है।
व्यंग्यकार - डॉ. मुकेश गर्ग "असीमित"
प्रकाशक - भावना प्रकाशन, दिल्ली।
मूल्य - ३०० रु. (पेपरबैक)
समीक्षक - डॉ. गणेश तारे (शिक्षाविद, साहित्यकार, संस्थापक अल्बर्ट आइन्स्टाइन एजुकेशन ग्रुप कोटा)
डॉ. मुकेश गर्ग "असीमित" की पुस्तक "गिरने में क्या हर्ज है" एक रोचक कृति है जो हिन्दी साहित्य में व्यंग्य लेखन, पठन, पाठन में रूचि रखने वाले साहित्य प्रेमियों का ध्यान बरबस खींचने में सक्षम है। पहले बात शीर्षक की। शीर्षक अपने आप में एक तीव्र आकर्षण लिए है। जब मुझे यह पुस्तक प्राप्त हुई तो आमुख पढ़ने के बाद सबसे पहले मैंने पुस्तक के शीर्षक वाला व्यंग्य पढ़ने का विचार किया। व्यंग्य पढ़ने के पहले मैंने सोचा कि डॉ. मुकेश ने इसमें क्या लिखा होगा? तो मैं मेरा...


