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Tag: डॉ. रागिनी सिंह परिहार

दर्द दिल का
ग़ज़ल

दर्द दिल का

डॉ. रागिनी सिंह परिहार रीवा (मध्य प्रदेश) ******************** दर्द दिल का तेरी आँखों से बयाँ हो जाए। तू भी ख़ामोश रहे शोर-ए-फ़ुग़ाँ हो जाए। तू मेरे दिल में बसा है मेरी धड़कन की तरह, तेरा एहसास न गर हो तो मकाँ हो जाए। मेरे दिल को भी मिले कोई मरासिम ऐसा, जिसकी चाहत में रहूँ मस्त-समाँ हो जाए। कोई शबनम सा ठहरता है अगर दिल में तो, ख़ूबसूरत ये मुहब्बत का जहाँ हो जाए। चाहतों की मैं हसीं कुछ तो तरफ़दारी में, 'रागिनी' गर ये ग़ज़ल हो तो गुमाँ हो जाए। परिचय :- डॉ. रागिनी सिंह परिहार जन्मतिथि : १ जुलाई १९९१ पिता : रमाकंत सिंह माता : ऊषा सिंह पति : सचिन देव सिंह निवासी : रीवा (मध्य प्रदेश) सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा "हिंदी रक्षक राष्ट्रीय सम्मान २०१८" से सम्मानित शिक्षा : एम.ए हिन्दी साहित्य, डीएड शिक्षाशात्र, पी.जी.डी.सी.ए. कंप्यूटर, ए...
उड़ान
कविता

उड़ान

डॉ. रागिनी सिंह परिहार रीवा (मध्य प्रदेश) ******************** सपनों में अगर चाहिए उड़ान तो सुनो गुरु ज्ञान के बिना संभव नहीं सुनो बचपन में मां ने मुझको चलना सिखाया उंगली पकड़ के मेरी सही रास्ता दिखाया जब थोड़ी सी बड़ी हुई विद्यालय पहुंचाया गुरुओं के बीच मुझको नादान बताया फिर गुरुओं ने हमारी हमें मंजिल है दिखाया के से कबूतर ज्ञ से ज्ञानी मुझको सिखाया थोड़ी और बड़ी हुई तो विषय वस्तु बट गए हिंदी,गणित,विज्ञान का मतलब समझ गए पर आज तक अंग्रेजी समझ आई ना हमें A फॉर एप्पल Z फॉर ज़ेबरा समझ आया ना हमें प्रथम गुरु मेरी मां बनी जिसने दिया है जन्म उस जन्म को साकार बनाया है गुरुजन अबोध है अज्ञान है अंधकार में है हम आपके सानिध्य से चीनू बाई, कल्पना चावला बने हम बस आरजू यही कि देश में हर नारी का हो नारित्व हर घर में लक्ष्मीबाई हो हर घर में विवेकानंद सपनों म...