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Tag: डॉ. संध्या शुक्ल ‘मृदुल’

लो बसंत के दिन अब आए
कविता

लो बसंत के दिन अब आए

डॉ. संध्या शुक्ल 'मृदुल' मंडला (मध्य प्रदेश) ******************** सरसों फूले टेसू महके, आम्र तरु मंजरी बौराए, लो बसंत के दिन अब आए। कोयल कूके मयूर है नाचे, भ्रमर कलि संग गुनगुनाए, लो बसंत के दिन अब आए। बासंती बयार सखि को, प्रिय का संदेश पहुंचाए, लो बसंत के दिन अब आए। हरियाली और पुष्पों से, प्रकृति का दामन भर जाए, लो बसंत के दिन अब आए। मदमस्त बसंत के मौसम में, सजनी साजन संग सुहाए। लो बसंत के दिन अब आए। चहुं दिशाएं सुरभित हो जाए, प्रकृति संग मानव हर्षाए, लो बसंत के दिन अब आए। परिचय :- डॉ. संध्या शुक्ल 'मृदुल' निवासी : मंडला (मध्य प्रदेश) सम्प्रति : प्रदेशाध्यक्ष- अखिल भारतीय हिंदी सेवा समिति म प्र., जिला संयोजक- मध्यप्रदेश राष्ट्र भाषा प्रचार समिति मंडला। घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौल...