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Tag: डॉ. संध्या शुक्ल ‘मृदुल’

मैं भारत की नारी हूं
कविता

मैं भारत की नारी हूं

डॉ. संध्या शुक्ल 'मृदुल' मंडला (मध्य प्रदेश) ******************** फूलों से कोमल मैं दिखती, शोला और चिनगारी हूं। मैं भारत की नारी हूं।। घर आंगन को हूं महकाती, पावन उपवन क्यारी हूं। मैं भारत की नारी हूं।। सृष्टि की मैं सुंदर सुंदरतम कृति, लगती बड़ी ही प्यारी हूं। मैं भारत की नारी हूं।। सीता सति और सावित्री, इंदिरा और गांधारी हूं। मैं भारत की नारी हूं।। अबला नहीं मैं सबला हूं, हर नारी से भारी हूं। मैं भारत की नारी हूं।। सृष्टि की मैं ही हूं रचयिता, जगत जननी प्यारी हूं। मैं भारत की नारी हूं।। करुणा और त्याग की मूरत, संघर्षों से कभी न हारी हूं। मैं भारत की नारी हूं।। परिचय :- डॉ. संध्या शुक्ल 'मृदुल' निवासी : मंडला (मध्य प्रदेश) सम्प्रति : प्रदेशाध्यक्ष- अखिल भारतीय हिंदी सेवा समिति म प्र., जिला संयोजक- मध्यप्रदेश राष्ट्र भाषा प्रचार समिति मंड...
होली के रंग मस्ती के संग
कविता

होली के रंग मस्ती के संग

डॉ. संध्या शुक्ल 'मृदुल' मंडला (मध्य प्रदेश) ******************** मौसम हुआ है फागुनी, फागों पर छाया शवाब। हरम मन में सजने लगे, फिर रंग-बिरंगे ख्वाब। हर कली को है चूमता, चंचल भ्रर सदाबहार। फिजाओं में है घुल रही, देखो अब बसंती बयार। गली-गली में हो रही, अब रंगों की बरसात। रंग-बिरंगे से दिन हुए, हुई मस्ती वाली रात। बहके बहके से कदम, हो गई नशीली चाल। भंग की मस्ती में अब, तन मन हुए हैं बेहाल। अंगारों सा दहक उठा, गोरी का तन है आज। सुध बुध है बिसराय के, भूल गई वो सब काज। भींग गई लहंगा चोली, भींग गई चुनरी आज। गोरी का घूंघट सरका, तज करके सारी लाज। मुखड़ों पर हैं सज रहे, अब इंद्र धनुषी ये रंग। हुलियारी टोली निकली, फिर से मस्ती के संग। परिचय :- डॉ. संध्या शुक्ल 'मृदुल' निवासी : मंडला (मध्य प्रदेश) सम्प्रति : प्रदेशाध्यक्ष- अखिल भारतीय हिंदी से...
लो बसंत के दिन अब आए
कविता

लो बसंत के दिन अब आए

डॉ. संध्या शुक्ल 'मृदुल' मंडला (मध्य प्रदेश) ******************** सरसों फूले टेसू महके, आम्र तरु मंजरी बौराए, लो बसंत के दिन अब आए। कोयल कूके मयूर है नाचे, भ्रमर कलि संग गुनगुनाए, लो बसंत के दिन अब आए। बासंती बयार सखि को, प्रिय का संदेश पहुंचाए, लो बसंत के दिन अब आए। हरियाली और पुष्पों से, प्रकृति का दामन भर जाए, लो बसंत के दिन अब आए। मदमस्त बसंत के मौसम में, सजनी साजन संग सुहाए। लो बसंत के दिन अब आए। चहुं दिशाएं सुरभित हो जाए, प्रकृति संग मानव हर्षाए, लो बसंत के दिन अब आए। परिचय :- डॉ. संध्या शुक्ल 'मृदुल' निवासी : मंडला (मध्य प्रदेश) सम्प्रति : प्रदेशाध्यक्ष- अखिल भारतीय हिंदी सेवा समिति म प्र., जिला संयोजक- मध्यप्रदेश राष्ट्र भाषा प्रचार समिति मंडला। घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौल...