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नारी की उड़ान: स्वतंत्रता की ओर
कविता

नारी की उड़ान: स्वतंत्रता की ओर

डॉ. सोनल मेहता भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** अखिल भारतीय कविता लिखो प्रतियोगिता विषय :- "नारी और स्वतन्त्रता की उड़ान" तृतीय पुरस्कार प्राप्त रचना सीता-सावित्री की भूमि में, नारी ने इतिहास रचाया, और झाँसी की रानी बन, पराक्रम का दीप भी सजाया। मीरा का भक्ति प्रेम और अहिल्या की शक्ति महान, हर युग में नारी ने किया नेतृत्व सभी तरह का स्वतंत्रता अभियान। गांधी संग कस्तूरबा चलीं, सत्याग्रह की राह, सरोजिनी, कमला, विजयलक्ष्मी ने बढ़ाया देश का प्रवाह। आज की नारी तकनीक में, विज्ञान में दे रही योगदान, चंद्रयान से मंगल तक, पहुँचा रही अपनी पहचान। पर मनमानी, स्वतंत्रता का सही अर्थ नहीं, इसका का करो प्रस्थान, स्वतंत्रता तो है आत्म-सम्मान, और कर्तव्यों का ज्ञान। अपने अधिकारों संग, न भूलें कर्म- धर्म महान, मन के संतुलन से ही संभव है, समाज का उत्थान। बेहतर भविष्य की ओर ...
स्त्री भी एक इंसान है
कविता

स्त्री भी एक इंसान है

डॉ. सोनल मेहता भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** अच्छा लगता है जब अपने लिए कुछ अच्छा सुनती हूँ. कानों में संगीत सा बजता है. झूठ होगा कहना कि मुझे तारीफ़ से फ़र्क़ नहीं पढ़ता, ये फ़र्क़ तब महसूस होता है जब अपनों से अपनी ख़्वाहिशों पर ताना मिलता है जब महसूस कराया जाता है कि घर की ज़रूरतें पूरी करना मेरा शौक़ है मेरा वजूद सिर्फ़ किचन तक है . उफ़्फ़ ये क्या कह दिया. वजूद ! ये कब मेरा हुआ हुआ है मेरा तो वो है मेरा अकेलापन जो बर्तनों के शोर से कभी घबरा सा जाता है और खुद के लिए एक निवाला सुकून का चाहता है. परिचय :- डॉ. सोनल मेहता निवासी : भोपाल म.प्र. सम्प्रति : इंसान बनने की कोशिश शैक्षणिक योग्यता : पी.एचडी., एम.फ़िल, एल.एल.बी., एम.बीए, एम.एड, एम.ए, बीएससी घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अप...