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Tag: प्रेम नारायण मेहरोत्रा

होली राम रंग संग खेलो
कविता

होली राम रंग संग खेलो

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** होली राम रंग संग खेलो, हनुमत झूम के नाचेंगे। लगेगा भक्तों का दरबार, नाम महिमा वे बाचेंगे। होली राम रंग.......... बहाओ रा से रंग फुहार, म में है माँ सीता का प्यार। चढ़ेगा जिनपर हनुमत रंग, वे माँ के चरण पखारेंगे। होली राम रंग.......... नहीं हुड़दंग का ये त्यौहार, लुटादो सबपर अपना प्यार। बढ़ी कटुता जिससे इस साल, मिटाकर गले लगा लेंगे। होली राम रंग........ न डूबो दारू में या भांग, यही है सात्विकता की मांग। आओ बैठो हनुमत दरबार, नाम का नशा चढ़ा देंगे। होली राम रंग.............. परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय...
माँ कौशल्या ने राम जी से पूछा
कविता

माँ कौशल्या ने राम जी से पूछा

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** जब प्रभु राम १४ वर्ष के बनवास के बाद वापस आये और माँ कौशल्या से मिलने गए तो अत्यन्त दुखी होने के कारण उन्होंने अपनी कोख को ही अभागिन कह देखे प्रभु राम कितनी शालीनता से उनकी पीड़ा को हर लिया और माँ कैकेयी, हनुमान जी, भरत जी और लक्ष्मण जी का मान बढ़ाया। माँ कौशल्या ने राम जी से पूछा राम क्यों दुःख भोगने को इस अभागिन कोख आया, राज्य छुटा, वन गया, चौदह वर्ष तक कष्ट पाया। राम जी ने मुस्करा कर उत्तर दिया हूँ परम सौभग्यशाली मातु तेरी कोख पाया, शीश धर आज्ञा पिता की, मैंने जग में मान पाया। जग को कुछ आदर्श देने आया है माँ राम तेरा, तप के कंचन सा निखरना, मातु था उद्देश्य मेरा। कैकेयी माता ने अपजस सह मुझे कंचन बनाया। हूँ परम सौभग्यशाली... यदि न जाता वन तो हनुमत और लेखन सेवा न पाते, त्याग की प्रतिमूर्ति मेरे भरत भैया बन न पाते। में बंधा था ...