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Tag: मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

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कविता

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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा फतेहाबाद, आगरा (उत्तर प्रदेश) ******************** मां के आंचल सी पावन हिंदी आंगन में तुलसी सी महके हिंदी। गंगा की निर्मल धारा सी बहती हिंदी दादी मां की मीठी लोरी सी हिंदी। भारत भू के माथे पर सजी हिंदी जन-जन के हृदय में बसी हिंदी। मीरा के भजन सी मधुर हिंदी प्रेमचंद की कथा-व्यथा कहती हिंदी। आज हमारी अमिट पहचान बनी हिंदी आओ राजभाषा से राष्ट्रभाषा बनाएं हिंदी। लाल किले से दहाड़ती शेरनी सी हिंदी देश-दुनिया में परचम लहराती हिंदी। खेतों में खलिहानों में चहकती हिंदी नगरों में महानगरों में बुलंद होती हिंदी। कश्मीर से कन्याकुमारी तक प्यारी हिंदी हैं हम बहुभाषी, एकसूत्र में पिरोती हिंदी। आओ सब जन मिल गुणगान करें हिंदी सब मतभेद भूल, मान बढाएं हिंदी। परिचय :- मुकेश कुमार ऋषि वर्मा निवासी : फतेहाबाद, आगरा (उत्तर प्रदेश) घोषणा पत्र...