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Tag: मृत्युंजय उपाध्याय नवल

मगहर में
कविता

मगहर में

मृत्युंजय उपाध्याय नवल सिरसिया (कुशीनगर-गोरखपुर) ******************** मगहर में कबीर की समाधि पर हमने चढाए थे फूल वहीं तुमने पढाया था मुझे ढाई आखर प्रेम का मै पढता चला गया हलाँकि मुझे पढकर कोई पण्डित नही बनना था मैं तो सिर्फ महसूस करना चाहता था प्रेम को जिना चाहता था प्रेम को आमी में झाँकते हुए मैने देखी थी मेरी परछाईं को ढकती तुम्हारी परछाईं को साखी, सबद, रमैनी भी आमी के उठते जल तरंगो पर तुमने गाया था प्रेम गीत अब तुम कहती हो ये बातें सिर्फ किताबी है सच कहती हो प्रेम तो कबीर है कबीर सिर्फ किताबो में और हम कबीर से बहुत दूर हैं। . लेखक परिचय :- नाम - मृत्युंजय उपाध्याय नवल निवासी - सिरसिया नम्बर जिला - कुशीनगर शिक्षा - एम.कॉम., एम.ए. (अर्थशास्त्र, शिक्षाशास्त्र), बी.एड.,पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (एम.जे.) सम्प्रति - आकाशवाणी उद्घोषक, आकाशवाणी गोरखपुर पत्र-पत्रिका - कथा क्रम, आजकल, ...