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Tag: जयंत मेहरा

मैं आज हु और कल भी रहूंगा
कविता

मैं आज हु और कल भी रहूंगा

जयंत मेहरा उज्जैन (म.प्र) ******************** मैं कल था में आज हु और कल भी रहूंगा लहु हु में कलम से, किताब पर बहुंगा रात के अँधेरो में जो जागती है रातें उन रातों को अंधेरों के राज में कहुँगा उन लंबे रास्तों में जो, भटका रहीं है राहें उन रास्तों में पैरों कि आवाज़ में करूंगा गुनाह की जो जंजीरें, पैरों बस बंधी है उन जंजीरों के फैसलें हिसाब में करूंगा उन सड़कों पर, रातों में जो सो रही हैं सांसें उन धड़कनों कि बेबसी हालात में कहुँगा हवाओं का रूख आज, जिस तरफ हो चाहें उन कागजों कि नाव का भी रुख, में उस तरफ करूंगा एक शोर जो चारों तरफ़ बढ़ता ही जा रहा है उन बहरें कानों कि तरफ, आवाज़ में करूंगा मैं कल था में आज हु और कल भी रहूंगा लहु हूँ में कलम से, किताब पर बहुंगा . परिचय :- नाम : जयंत मेहरा जन्म : ०६.१२.१९९४ पिता : श्री दिलीप मेहरा माता : श्रीमती रुक्मणी मेहरा निवासी : उज्जैन (म.प्र) ...
लब चुप थे
कविता

लब चुप थे

जयंत मेहरा उज्जैन (म.प्र) ******************** लब चुप थे, आँखों ने कहना सिख लिया लौ ने, तेज हवाओं को सहना सिख लिया धड़कने उम्र भर वक़्त के इंतजार में बैठी रही बेशर्म सांसो ने जज्बातों को कहना सिख लिया हर उम्र को गुज़रते देखा है आँगन ने मेरे इन बच्चों ने कहीं और हि बहना सिख लिया दुनिया ने ही दुनिया बिगाड़ रखी है हमने अपने घरों में रहना सिख लिया उसे गरूर है कि यहाँ कि हवाऐं वो चलाता है लोगो ने भी धुंध में रहना सिख लिया . परिचय :- नाम : जयंत मेहरा जन्म : ०६.१२.१९९४ पिता : श्री दिलीप मेहरा माता : श्रीमती रुक्मणी मेहरा निवासी : उज्जैन (म.प्र) सम्प्रति : वर्तमान में कनिष्क कार्यपालक अधिकारी (इंजीनियरिंग - सिविल डिपार्टमेंट) भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, सेलम हवाईअड्डे पर पदस्थ शिक्षा : बी.ई. (सिविल इंजीनियरिंग) २०१६, एम .टेक - (Geotechnical Engineering ) २०१८ भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगल...
बाबा की शर्ट में जो दाग है
कविता

बाबा की शर्ट में जो दाग है

जयंत मेहरा उज्जैन (म.प्र) ******************** माँ बाबा की शर्ट में जो दाग है, तू उसे धोती क्यों नहीं कुछ दिन से चेहरा तेरा उदास है, तू सोती क्यों नहीं तेरी चुड़ी, बिंदिया, कँगन बहुत ढूंढे मेने माँ गिरे हुए उस धागे के मोती, तू पिरोती क्यों नहीं माँ बाबा की शर्ट में जो दाग है, तू उसे धोती क्यों नहीं दरवाजे पर जो मिट्टी हे, मेने देख ली माँ तेरे सिरहाने पर जो चिट्टी है, मेने देख ली माँ मेरा नया खिलोना अब शायद ना आएगा मेरा बाबा लौट कर अब वापस ना आएगा बाहर निकाल तेरे अश्कों को, जी भर तू रोती क्यों नहीं माँ बाबा की शर्ट में जो दाग है, तू उसे धोती क्यों नहीं जैसे तु हर कदम मेरे साथ रहती है उन बेटो को भारत माँ की फिक्र, दिन रात रहती है माँ बाबा मेरा महान था, अपने देश की शान था जाते जाते उसने बंदूक चूमि थी आखिरी सांस में भी उसने अपनी धरती चूमि थीं बहुत रात हो गई हैं माँ, अब तू सोती क्यों नहीं ...
पूरी बस्ती में अँधेरा है
कविता

पूरी बस्ती में अँधेरा है

जयंत मेहरा उज्जैन (म.प्र) ******************** पूरी बस्ती में अँधेरा है, ना जाने कहाँ घर मेरा है चलो मन्दिर चलते है, पर वहा भी चोरों का बसेरा है रातों के जुगनु किधर जा रहे हैं, पीछा करो शायद वहीं पर आगे सवेरा है बस्ती में सभी घरों में छिपे बैठे हैं घरों के बाहर चोरो का पहरा है सारे चोर बस्ती में सूरज बाटते फ़िरते है जिनके अपने खुदके घरों में, अंधेरा है सभी रांझे को पत्थर मार रहे थे उनमें भी जो सबसे बड़ा पत्थर है वो मेरा है अब किनारे पर है तो उतर भी जाएंगे अंदर तुम पता तो करो कि पानी कितना गहरा है अँधेरे में न जाने किसका हाथ पकड़े हो मरीजों पर वेद, हाकिमों का चेहरा है . परिचय :- नाम : जयंत मेहरा जन्म : ०६.१२.१९९४ पिता : श्री दिलीप मेहरा माता : श्रीमती रुक्मणी मेहरा निवासी : उज्जैन (म.प्र) सम्प्रति : वर्तमान में कनिष्क कार्यपालक अधिकारी (इंजीनियरिंग - सिविल डिपार्टमेंट) भारतीय ...
माँ है जो मकान को घर करती है
कविता

माँ है जो मकान को घर करती है

********** जयंत मेहरा उज्जैन (म.प्र) मुझसे ज्यादा मेरी फिकर करती है वो माँ है जो उस मकान को घर करती है धूप मे जब जब में निकलता हु पलकों की छाव मेरे सर करती है वो माँ है जो उस मकान को घर करती है कभी गिरने नही देती मुझे कहीं उसकी दुआ इतना लंबा तय, सफर करती है वो माँ है जो उस मकान को घर करती है जब जब भी कभी बिमार होता हूं उसकी यादों की दवा हि बस मुझ पर असर करती है वो माँ है जो उस मकान को घर करती है लोग चेहरों पर नक़ाब लिए रखते हैं सभी के सारे हिसाब लिए रखते हैं में मेरी तकदीर लिए चलता हूं ज्यादा कुछ नहीं, माँ कि तसवीर लिए चलता हूं उसकी दुआ मेरे साथ साथ सारे, सफर करती है वो माँ है जो उस मकान को घर करती है . परिचय :- नाम : जयंत मेहरा जन्म : ०६.१२.१९९४ पिता : श्री दिलीप मेहरा माता : श्रीमती रुक्मणी मेहरा निवासी : उज्जैन (म.प्र) सम्प्रति : वर्तमान में कनिष्क कार्यपालक अधिकारी (इंजीनि...
छत की कवेलु में
कविता

छत की कवेलु में

********** जयंत मेहरा उज्जैन (म.प्र) "इन इमारतों में ये जो हाथ लगे हैं कई भुखे प्यासों के जज़्बात लगे है हर एक पत्थर में दर्द बहुत गहरा है किसी की मजबूरी और हालात लगे है जेब मे बच्चों की भूख रखी है कंधों पर माँ बाप के हाथ लगे है मिट्टी की चादर, चाँद का सिरहाना रख छत की कवेलु में अमरनाथ लगे हैं" परिचय :- नाम : जयंत मेहरा जन्म : ०६.१२.१९९४ पिता : श्री दिलीप मेहरा माता : श्रीमती रुक्मणी मेहरा निवासी : उज्जैन (म.प्र) सम्प्रति : वर्तमान में कनिष्क कार्यपालक अधिकारी (इंजीनियरिंग - सिविल डिपार्टमेंट) भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, सेलम हवाईअड्डे पर पदस्थ शिक्षा : बी.ई. (सिविल इंजीनियरिंग) २०१६, एम .टेक - (Geotechnical Engineering ) २०१८ भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर से आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, हिंद...