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Tag: डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”

खाली हाथ आये
कविता

खाली हाथ आये

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** खाली हाथ आये है खाली हाथ जाना है। फिर क्यों संसार में बटोर कर अपना वक्त गवाना है। ******** खाली हाथ आये है जरूर पर खाली हाथ नहीं जायेंगे। अच्छे कर्म कर कर लोगों की दुआए ले जायेंगे। ******** जितना ही हम एकत्र करेंगे सब यहाँ रह जायेगा। केवल कर्म का पिटारा हमारे साथ जायेगा। ******** अब जोड़ो मत बांटना शुरू करो। अपनी ज़िन्दगी को खुशियों से भरो। ******* सबसे अच्छा व्यवहार करो सबके काम आओ। सबकी करो भलाई दुनिया में यही यश कमाओ। ********* जब आप नहीं रहेंगे लोग आपका व्यवहार याद करेंगे। और आप मृत्यु के बाद भी लोगो के दिलों में आप ज़िंदा रहेंगे। ******** अब संचय को छोड़कर प्रभु वंदन में लग जाओ। और इस दुनियां के सब सागर से तर जाओ। ********* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ...
जीवन एक संगीत है
कविता

जीवन एक संगीत है

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** जीवन एक संगीत है और यही मेरा मीत है और यह मेरी जिंदगी का गीत है। ******* जिस प्रकार संगीत के स्वर है सात। हमारी जिंदगी में सच होती है ये बात। ******** संगीत से हमें खुशी मिलती है जिंदगी की उदासी दूर रहती है। ******** हमारी सांसों में हमारी बातों में संगीत है। मधुर है ये जिंदगी का गीत है ******** संगीत हमारी जिंदगी में आनंद भर देता है। ग़म से खुशी की ओर ले चलता है। ******** जो संगीत को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाता है। वो अपनी जीवन को खुशियों का द्वार बनाता है। ********* संगीत के स्वरों को अपनी जिंदगी में घोलिए। और अपने आप को आनंद की तराजू में तौलिए ******* अगर आपको जाना है ग़म की दुनियां से दूर तो अपनाईये संगीत को जरूर। ********* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार...
नयी सी हवा है नया आसमां
कविता

नयी सी हवा है नया आसमां

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** नयी सी हवा है नया आसमां ठंडी हवा का दौर चल रहा है। मन तुमसे मिलने को मचल रहा है। ******** नयी सी हवा है नया आसमां। तुम आ जाओगे तो बदलेगा समां। ******** मौसम सुहाना है हमने ये माना है। सब कुछ छोड़कर तुम्हे चले आना है। ******** आसमां में बादल छाये है हम तुमपे नजरे विछाये है। अपना लो मुझको इसके पहले कि कहीं मौसम बदल न जाये। ********* इस समय जरुरत है धुप की जो कुछ गर्मी दे जाय। कड़कड़ाती ठंडी से कुछ रहत दे जाये। ******** मौसम बदल रहा है तुम मत बदल जाना। रोज की तरह जरूर मिलने आना। ********* हवाएं भले नयी है हमारे संबंध पुराने है। तुमसे से तो रोज मिलता हूँ बाक़ी लोग अनजाने है। ******** नयी हवा तुम्हारे आगमन का संकेत दे रही है पल-पल मुझे बैचैन कर रही है। ********* परिचय : डॉ. प्रताप म...
न जाने क्या बदला है
कविता

न जाने क्या बदला है

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** वो बदल गये समझ नहीं आया। न जाने क्या बदला है। ******** वक्त के साथ हर चीज बदलती है। पर तुम न बदल जाना वक्त के साथ। ******** कली बदलकर फूल बनती है। बच्चा युवा बन जाता है। ******* बदलना प्रगति की निशानी है। जिंदगी के आगे बढ़ने की कहानी है। ******** मौसम भी बदलता है ख्याल भी बदलते है। चुनाव जीतने के बाद नेता भी बदलता है। ******** बहुत दुख होता है जब अपना कोई बदल जाता है। हमें छोड़कर किसी दूसरे की बाहों में समा जाता है। ********* केवल वक्त को बदलने दीजिए। अपना स्वभाव और संस्कार मत बदलिए। ******** कोई दल बदलता है कोई शहर बदलता है। होता हैं जिसमें फायदा आदमी वह चीज बदलता है। ******** बदलो जरूर बदलो मगर इतना मत बदलो। कि तुमसे बदला लेने की इच्छा हो। ********* परिचय : डॉ. प्रत...
तन्हाई के सायें
कविता

तन्हाई के सायें

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** वो मुझे तन्हा कर गयी मुझे छोड़कर किसी और पर फिदा हो गयी। ******** तन्हाई मुझे बहुत सताती है। हर वक्त उसकी याद आती हैं। ******** पता नहीं क्या कमी थी मेरे प्यार में जो मुझे तन्हा छोड़ गयी इस संसार में। ******* अब तो मैने तन्हाई को अपना दोस्त बनाया है। जुदाई के घाव पर यह मरहम लगाया है। ******* वक्त नहीं कटता तन्हाई में बड़े दुख मिले मुझे बेवफाई में। ******** भगवान किसी को तन्हा न करें। किसी को अपने प्यार से जुदा न करें। ******** कोई कभी तो शिकायत करे। बेवफा बनकर तन्हा न करे। ******* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।...
अलबेला मौसम आया
कविता

अलबेला मौसम आया

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** मौसम को मैने इस समय बदलते पाया । वास्तव में अब अलबेला मौसम है आया। ******* न पंखे की जरूरत है न हीटर की जरूरत है। देखिए मौसम कितना खूब सूरत है। ******** ऐसे अलबेले मौसम का अलग ही मजा है। मौसम खराब हो तो लगता सजा है। ******** मौसम बदल रहा है तुम मत बदल जाना। सात जन्म तक मेरा ही साथ निभाना। ******** ये मौसम प्यार का है आओ एक दूसरे में समा जायें । और दोनों मिलकर एक हो जाय। ******* चारों तरफ शांति है न कही शोर है। खुशहाली फैली चारों ओर है। ******** वे बदल गये मौसम की तरह हम इंतजार करते रहे। वे हो गये किसी और के हम सपने देखते रहे। ******** सबसे अच्छा है ये मौसम सबसे प्यारा है ये मौसम। जो करना है कर लो दोबारा नहीं आयेगा ये मौसम। ******* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : च...
मुकद्दर
कविता

मुकद्दर

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** मेरे मुकद्दर में है "मुकद्दर" पर कविता लिखना। और उसको प्रकाशन के लिए भेजना। ******* मिलता वही है हमें जो मुकद्दर में लिखा होता है। फिर इंसान क्यों अपने मुकद्दर पर रोता है। ******* हमारे कर्मों से ही हमारा मुकद्दर बनता है। अच्छा करने पर हमें अच्छा ही मिलता है। ******* जो हमारी किस्मत में लिखा हो वो मुकद्दर कहलाता है। यह जन्म के समय विधाता द्वारा लिखा जाता है। ******* कभी किसी की लॉटरी लगती है और गरीब अमीर बन जाता है। यही सब मुकद्दर कहलाता है। ******* लोगों की दुआओं से आपका मुकद्दर बदल सकता है। आपको रंक से राजा बना सकता है। ******** केवल मुकद्दर के आसरे मत बैठे रहिये। कुछ अच्छे काम कर अपनी सफलता की कहानी कहिए। ******** तुमको मैने अपना "मुकद्दर" समझा था। लगता है अब मुकद्दर ने साथ छ...
आजमा कर छोड़ दिया
कविता

आजमा कर छोड़ दिया

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** कौन अपना है कौन पराया है। ये तब पता लगा जब मैने आजमाया है। ****** आजमाने से हकीकत पता चलती है। अगले की हमारे प्रति सोच पता चलती है। ******* सामने से तो सब लोग मीठे बातें बोलते है। पर मौका मिलने पर पीठ में छुरा भोकते है। ******* तस्वीर में तो सभी नज़र आते है। तकलीफ में सारे लोग गायब हो जाते है। ******* सौ नहीं बल्कि एक ही हमदर्द बनायें। जो हर परिस्थिति में आपके साथ नज़र आये। ******* मौका मिलने पर सबको आजमाया करो। जो अच्छा हो उसे मित्र बनाया करो। ******* आजमाने पर जो गलत निकले उसे छोड़ दिया करो। सारे रिश्ते नाते उससे तोड़ दिया करो। ******* हम जिंदगी भर उन्हें अच्छा समझते रहे। और वो पीठ पीछे नाग की तरह हमको डसते रहे। ******* पहिले आजमाओ फिर मित्र बनाओ जिंदगी की दौड़ में आगे बढ...
सतरंगी दुनियां
आलेख

सतरंगी दुनियां

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** क्या कड़वे पौधे से मीठे फल आ सकता है? जी हां धैर्य एक कड़वा पौधा है पर फल हमेशा मीठे ही आते है। अपना बैंक बैलेंस देखकर खुश मत होइए जनाब, ऊपर वाला हिसाब तो आपके कर्मों का करेगा। चार लोग क्या कहेंगे? अक्सर कोई भी काम करने से पहिले हम सोचते है। चार लोग आपकी आपकी तेरहवीं पर कहेंगे "पूड़ी गरम लाना।" इसलिए उन चार लोगों में अपना अमूल्य समय बर्बाद न करें अपने कार्य में व्यस्त रहें। समय सबसे बलवान है। आप कुछ भी योजना बना ले पर होता वही है जो समय चाहता है। एक महिला सरकारी कार्यालय पहुंची और विधवा पेंशन का फार्म भरने लगी क्लर्क ने पूछा आपके पति को मरे कितना समय हुआ है? महिला ने बताया वो अभी बीमार है। फिर आप विधवा पेंशन का फार्म क्यों भर रही है? अरे भाई सरकारी काम में बहुत समय लगता है। जब तक मेरी पेंशन पास हो जायेगी तब तक शाय...
कहा गया रिश्तों से प्रेम
कविता

कहा गया रिश्तों से प्रेम

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** कहा गया रिश्तों से प्रेम आजकल रिश्तों से प्रेम कही खो गया है। प्रेम से बिछड़े एक जमाना हो गया है। ******** आजकल बनते हैं पैसे से रिश्ते यदि आप धनवान है तो सब बनायेंगे आपसे रिश्ते। ******* सगा गरीब रिश्तेदार भी किसी को नहीं सुहाता है। अमीर हो कोई दूर का रिश्तेदार वह सबको भाता हैं। ******* आजकल प्रेम की जगह पैसे ने ले ली है। दुनियां ने अब पतन की राह ले ली है। ******* गरीब रिश्तेदारों से लोग मुंह फेर लेते है। और धनवान रिश्तेदार को चारों तरफ से घेर लेते है। ******** हर रिश्ते में प्रेम बनकर रखिए पैसों से रिश्ते को दूर रखिए। ******** आजकल हर रिश्ते मतलब से चलते है अगर काम निकल गया तो ******** बिना प्रेम के रिश्ते स्थाई नहीं होते ऐसे रिश्ते है पानी के बुलबुले जैसे होते । ******** ह...
आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक युद्ध
कविता

आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक युद्ध

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** पहलगाम में हुआ है भयंकर नर संहार। अब हमें करना होगा आतंकवाद पर प्रहार। ******** धर्म की आड़ में खून खराबा हुआ है। इसमें बहुत सारे लोगो का लहू बहा है। ******** अब हम आतंकियों को चुन चुन कर मारेंगे। एक एक को धरती में जिंदा गाड़ेंगे। ******* ऐसी देंगे सजा की आतंकियों की रूह कांप जायेगी। फिर किसी आतंकवादी की हिम्मत नहीं हो पायेगी। ******* आतंकियों को मुंह तोड़ जवाब देना होगा। उनको बिल से बाहर निकाल कर मारना होगा। ******** इस बार आतंकियों का ऐसा करे हम हाल, कि उनकी आत्म कांप जाय। और भविष्य में कोई नया आतंकवादी न बन पाय। ********* आतंकवाद मानवता के विरुद्ध एक भयंकर अपराध है। इसका खात्मा जरूरी है क्योंकि इसमें मरते निर अपराध है। ******** परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार...
नाशवान
कविता

नाशवान

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** शीघ्र खराब होने वाली चीज नाशवान कहलाती है। फल और सब्जियां इसके अंतर्गत आती है। ******* दुनियां की प्रत्येक वस्तु नाशवान है। सकून से रहिये किस चीज का गुमान है? ******* मानव शरीर भी नाशवान कहलाता हैं। क्योंकि जिसने जन्म लिया है वह मृत्यु को जरूर पता है। ******* मनुष्य पर माया का असर आया है। तभी तो उसने नाशवान संसार को अपना बनाया है ******** आज आप हो कल कोई आपकी जगह आयेगा। एक नाश होगा और दूसरा पैदा होता जायेगा। ******* मत करो घमंड यह शरीर नाशवान कहलाता है। मिट्टी में जन्म लेता और मिट्टी में मिल जाता है। ******* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है। आ...
झंझावात
कविता

झंझावात

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** जब वायुमंडल में प्रचंड रूप से आंधी और तूफान आता है। यही मौसम झंझावात कहलाता है। ******* चमकती है आकाश में बिजली और ओले भी बरसते है। चारों तरफ होता है पानी पानी बादल भी गरजते है। ******* जब जब झंझावात आता है मुल्क में बर्बादी आती है। और हमारे जीवन को अस्त व्यस्त कर जाती है। ******* झंझावत प्रकृति का प्रकोप है जब हम प्राकृतिक साधनों का दुरुपयोग करते है तो झंझावत आता है। और यही फिर प्रकृति का प्रकोप कहलाता है। ******* रखें पर्यावरण का ध्यान तभी हम झंझावात से बच पायेंगे। नहीं तो व्यर्थ में जन-धन की हानि पायेंगे। ********* झंझावात कभी कभी हमारे जीवन में भी आते है। यदि हम सावधान न रहें तो बड़ी तबाही कर जाते है। ******** परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड...
दरमियां हम दोनों के दीवार
कविता

दरमियां हम दोनों के दीवार

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** दीवार बंटवारा करती है। दो लोगों को अलग-अलग करती है। ******* काम ऐसे करें कि आपस में दीवार न पड़ जाय। अच्छा भला रिश्ता खाक में न मिल जाय। ******* टूटे धागे को जोड़ने पर उसमें गठन पड़ती है। दो दिलों के बीच की दीवार बड़ी मुश्किल से हटती हैं। ******* प्यार में विश्वास जरूरी है। उसके बिना दिल की दास्तान अधूरी है। ******* दो दिलों को अलग होकर बंटना नहीं है। दिलों के दरमियां दीवार अच्छी नहीं है। ******* तोड़ दो उस हर दीवार को जो तुम्हारे रास्ते में आती है। और तुम्हारी हसीन जिंदगी को बर्बाद कर जाती है। ******* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है। आप भी अ...
वेद और विज्ञान
कविता

वेद और विज्ञान

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** विज्ञान की जो खोज हमारे सामने आई है। वो पहले से ही हमारे वेदों में समाई है। ******* हम गलत पढ़ते हैं कि विमान राईट ब्रदर्स ने था बनाया । क्योंकि रामायण काल में हमने पुष्पक विमान को है पाया। ******** हमारे वेदों में सारा विज्ञान समाया है। वेदों का ही सारा ज्ञान विज्ञान में आया है। ******* अर्थवेद में चिकित्सा ज्ञान समाया है। सारे आयुर्वेद को हमने इसमें पाया है। ******** हमारे चारों वेदों में शिल्प, विज्ञान और इंजीनियरिंग समाई है यहां से जानकारी अन्य देशों ने चुराई है। ******** बीजगणित हो या अंकगणित वनस्पतिशस्त्र हो या जीवशास्त्र भौतिक या रसायन विज्ञान वेदों में समाया है सारा ज्ञान। ******** परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी घोषणा : मैं यह शपथ ...
मृत्यु शय्या
कविता

मृत्यु शय्या

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** जन्म और मृत्यु शाश्वत सत्य है। नहीं कोई इसका विकल्प है। ******* एक दिन सभी को मृत्यु शय्या पर सोना है। चाहे आप हो या डॉक्टर सभी का यह हाल होना है। ******** जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निशचित होगी। किसी की आज तो किसकी कल होगी। ******* मृत्यु से आज तक कोई जीत नहीं पाया है। जिसने भी लिया है जन्म अवश्य मृत्यु को पाया है। ******* मृत्यु शय्या पर पहुंचने से पहिले जिंदगी जीना सीख लीजिए। कुछ अच्छे कर्म करें कभी किसी को कष्ट न दीजिए। ****** जब आपने अच्छे कर्म किये होंगे तभी यह बात होवेगी। जन्म लेने पर आप रोये थे। मृत्यु होने पर दुनियां आपके लिये रोयेगी। ******* मृत्यु शय्या हमारी अंतिम शय्या है। जिस से हम उठ नहीं पाते है। मिट्टी से जन्म लिया है और मिट्टी में ही मिल जाते है।...
जिंदगी जीने की कला
कविता

जिंदगी जीने की कला

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** ईश्वर से सबको जिंदगी मिली है। किसी को कम किसीको ज्यादा मिली है। ******** जिंदगी सबके पास है पर सबको जीना नहीं आता। हर व्यक्ति खोने और पाने की चिंता में है जिंदगी गुजरता । ******* कुछ लोग जिंदगी गुजारते है। कुछ लोग जिंदगी काटते हैं। ******* जिंदगी मिली है तो जिंदगी का मजा लीजिये। जिंदगी जीने की कला सीख लीजिए। ******* सुख और दुख तो जिंदगी का हिस्सा है। यह सभी की जिंदगी का किस्सा है। ******* खुद भी खुश रहें दूसरों की भी खुशी का रखें ध्यान। तभी आप बन पायेंगे सबसे अलग इंसान। ******* सभी से प्यार और मोहब्बत करें। अपनी जिंदगी को खुशियों से भरे। ******* जिसको आ गयी जिंदगी जीने की कला। वही कर सकता है स्वयं और दूसरों का भला। ******* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२...
आत्मदाह
कविता

आत्मदाह

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** इस दुनियां में हर व्यक्ति परेशान है। आत्मदाह किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। ******* आत्मदाह करने से हम तो दुनियां छोड़कर चले जायेंगें। पीछे घर वालों के लिये हजारों समस्याएं छोड़ जायेंगे। ******* दुनियां की प्रत्येक समस्या का समाधान है। आत्मदाह करना एक कायराना काम है। ******* ८४ लाख योनियों के बाद मानव जीवन मिलता है। आत्मदाह करने से हमें कुछ भी नहीं मिलता है। ******* आत्मदाह से हमारी समस्या सुलझ नहीं पायेगी। उलटा वह बिगड़ती जायेगी। ******* समस्याएं तो जिंदगी का हिस्सा है। इनका डटकर सामना करें आत्मदाह करना तो बुजदिलों का किस्सा है। ******* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलि...
पीला बसंत
कविता

पीला बसंत

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** बसंत पंचमी का उत्सव मां सरस्वती को समर्पित है। पूजा कर के उनको पीले फूल पीले वस्त्र करते समर्पित हैं। ******* पीला रंग मां सरस्वती को भाता है। सभी धार्मिक कार्य में भी पीला रंग नज़र आता है। ******** ज्ञान की देवी सरस्वती इनका सच्चे मन से पूजन करें। और अपने आपको ज्ञान से भरें। ******** देवी सरस्वती ने वीणा बजाकर पूरे संसार में मधुर आवाज फैलाई। तभी तो सुषुप्त श्रृष्टि जागृत अवस्था में आई। ******** भगवान शिव और माता पार्वती का तिलक भी बसंत पंचमी को हुआ था। और मां सरस्वती का जन्म भी बसंत पंचमी को हुआ था। ******* बसंत पंचमी का दिन विवाह का शुभ मुहूर्त कहलाता है। इस दिन होने वाला विवाह सुखमय होता है। ******* बसंत पंचमी से बसंत ऋतु का आगमन होता है। प्रकृति में नई ऊर्जा और उत्साह का संचा...
चलो कुंभ चले
कविता

चलो कुंभ चले

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** प्रयागराज आपके स्वागत के लिये सजा है। १४४ साल बाद कुंभ का अलग मजा है। ******* त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाएं अपना जीवन सफल बनाऐ। ******* देश विदेश से लोग कुंभ आ रहे है। सनातन धर्म के प्रति अपनी आस्था जता रहे है। ******* यह अवसर हमारी जिंदगी में दोबारा कभी नहीं आयेगा। अगर नहीं जा पाये कुंभ तो मन में अफसोस रह जायेगा। ******** महा स्नान के अवसर पर करोड़ों लोग आ रहे है। आस्था की डुबकी लगाकर पापों से मुक्ति पा रहे है। ******* कुंभ में चारों तरफ़ आध्यात्मिक माहौल छाया है। हर संन्यासी अखाड़े ने अपना स्थान बनाया है। ******* कुंभ जरूर जाये परन्तु सावधानी अपनाये। भीड़ बहुत है दुर्घटना से खुद को बचाएं। ********* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी घो...
संदेह
कविता

संदेह

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** संदेह को संदेह मत रहने दे। इसके निवारण का उपाय ढूंढ ले। ******* जिसके प्रति संदेह होता है। वह विश्वास योग्य नहीं होता है। ******* संदेह होने का जरूर होता है कारण। यह सच है या झूठ कर लीजिए निवारण। ******* संदेह से अच्छे अच्छे रिश्ते भी खत्म हो जाते है। जिगरी दोस्त भी दुश्मन बन जाते है। ******** उन्होंने अपने प्यार के पौधे में शक का पानी डाला बेवजह अपने रिश्ते को उजाड़ डाला। ******** संदेह एक धीमा जहर है जो अपना असर धीरे-धीरे दिखाता है। हमारे रिश्ते को दीमक की तरह खाता है। ******* विश्वास सभी पे करें अंध विश्वास किसी पर नहीं थोड़ा शक भले हो बेशक पर उसको मिटा लेना है सही। परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता...
नया साल-नया संकल्प
कविता

नया साल-नया संकल्प

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** नये साल का आज नया सवेरा आया है। चारों तरफ हर्ष और उल्लास का माहौल छाया है। ******* हर 365 दिन बाद नया साल आता है। और हमारा समय यूं ही बीतता जाता है। ******* जब तक हम कोई उद्देश्य नहीं बनायेंगे। तब तक जिंदगी के पल यूं ही व्यर्थ में गंवायेंगे। ******* नए साल से हम नई आशाएं रखें। और नई सफलता का स्वाद चखें। ******* लीजिए कुछ नए संकल्प जीवन को प्रगतिशील बनाईये। कुछ अच्छे नये काम करकर जग में नाम कमाइये। ******* किसी भी परिस्थिति में न माने हार। डटे रहेंगे तो जीत में बदल जायेगी हार। ******* संकल्प के अनुसार ही अपना योजना बनाएं। कड़ी मेहनत कर अपनी इच्छित मंजिल को पाएं। परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उ...
भोर आई अलबेली
कविता

भोर आई अलबेली

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** रोज सुबह अलबेली भोर होती है। आधी दुनिया तब तक सोती है। ******* चिड़ियों का चहचहाना चारों तरफ मस्त हवाएं। लगता है ऐसे कि हम किसी नयी दुनियां में आये। ******* चारों तरफ शांति का वास होता है। हर व्यक्ति प्रकृति के पास होता है। ******* गुनगुनी धूप में बहुत मजा आता है और साथ में कोई हो साथी तो आनंद छा जाता है। ******** भोर में भ्रमण का अलग ही मजा है। पेड़ की टहनी पर जैसे गुलाब सजा है। ******* सुबह भोर में उठकर करें प्रतिदिन व्यायाम योग,साधना कर अपना जीवन बनाए आसान। ******** जो रोज उठकर भोर को देखता है। वह कभी जिंदगी में डॉक्टर को नहीं देखता है। परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौ...
शीशा और भविष्य
कविता

शीशा और भविष्य

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** शीशा कोई भविष्य नहीं दिखाता है। शीशा केवल हमारी सूरत दिखाता हैं। ******* हम जैसे होते है शीशा वैसा दर्शाता है। भविष्य से तो उसका दूर दूर न कोई नाता है। ****** हमारा भविष्य हमारे कार्य पर निर्भर होता है। जैसे कार्य करते है वैसा परिणाम होता है। ******* भविष्य जानने के चक्कर में अपनी जिंदगी बर्बाद न करें। जिंदगी का एक लक्ष्य बना उसपर कार्य करें। ****** यदि ज्योतिषी भविष्य जानते तो अपना क्यों नहीं देखता है। व्यर्थ की दुकानदारी चलाकर भोले लोगों को नोचते है। ****** आने वाले अच्छे कल के लिए अपना आज मत गंवाओ बिना किसी चिंता या डर के अपना वक्त बिताओ। परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक...
प्यार की पहली नज़र
कविता

प्यार की पहली नज़र

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** उस नज़र के सदके जाऊं जब तुमसे प्यार हुआ। उस नज़र पर कुर्बान जाऊं जब तुम्हारा दीदार हुआ। ******* जब देखा तुम्हे पहली बार हम सुध-बुध खो बैठे। पहिली नज़र में ही अपना दिल हार बैठे। ******* तुम्हारे कातिल नयनों ने किया था मुझे घायल देख के तुम्हारा सौंदर्य मैं हो गया था पागल। ******* तुम्हारे नयन नक्शे पर मैं फिदा हो गया। खुद से तुमको आज तक जुदा नही कर पाया। ******* मत ऐसे सज-संवर के निकला करो बाजार में। हम अपना सब कुछ लूटा देंगे तुम्हारे प्यार में। ******* प्यार की पहली नज़र का भूत अभी तक मुझपर चढ़ा है। परन्तु उसकी तरफ से एक भी कदम आगे नहीं बढ़ा है। परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः ...