Notice: Function wp_get_inline_script_tag was called incorrectly. Unable to set inline script data. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 7.0.0.) in /home4/hindim8d/public_html/wp-includes/functions.php on line 6170
Tuesday, July 21राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

Tag: डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”

सतरंगी दुनिया- ३२
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया- ३२

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** *गिरगिट ने आत्महत्या कर ली और सुसाईड नोट में लिखा-इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता।* हमें हमेशा अपने लिए अच्छा सोचना चाहिए, क्योंकि गलत सोचने के लिए तो दुनिया बैठी है। *कभी भी अफवाहों पर ध्यान मत दीजिए, क्योंकि अफवाह जलने वाले पकाते हैं, इसे मूर्ख परोसते हैं और बेवकूफ उसे खाते हैं।* 'सब्र का फल मीठा होता है', इसी कहावत के चक्कर में मेरे २ सब्र के फलों की शादी हो गई और कल एक और की सगाई होने वाली है। *जमाने का सच देखिए- "अफवाहें बिना पैर के दौड़ती है और सच लंगड़ाकर चलता है।* अगर आपको उपवास करने का शौक है तो विचारों का करें, अगर भूखे रहने से भगवान खुश होते तो गरीब सबसे सुखी होते। *आजकल रोटी गैस पर बनती है, इसलिए खाने के बाद पेट में गैस बनती है।* आजकल रिश्तेदार भी बदल गए हैं, बचपन में जब वो हमारे घर आते थे तो पैसे द...
सतरंगी दुनिया- ३१
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया- ३१

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ********************  एक कंजूस महिला ने अपनी वसीयत तैयार की, लिखा-मैं पुर्नजन्म में विश्वास करती हूँ, इसलिए यह वसीयत अपने नाम कर रही हूँ, ताकि मेरे द्वारा छोड़ी हुई सम्पत्ति अगले जन्म में मुझे ही मिले। बूंद-सा जीवन है इंसान का ? लेकिन अहंकार सागर से भी बड़ा है। *ये ज़िंदगी तब तक हल्की है, जब तक सारे बोझ माँ-बाप ने उठाए होते हैं।* केवल खून के रिश्ते ही महत्वपूर्ण नहीं होते। मुसीबत में हाथ थाम लेने से बड़ा कोई रिश्ता नहीं। सच बोलना तो दूर की बात, आजकल लोग सच सुनना भी पसंद नहीं करते हैं। नियंत्रण जरूरी है यदि आमदनी कम हो तो खर्चों पर और जानकारी कम हो तो शब्दों पर। *बहुत पढ़ाई कर ली, पर मैं भी कुछ सवाल हल नहीं कर पाया। यदि आपके पास इनके जवाब हों तो अवश्य बताइए-यदि भाड़ में जाना हो तो किससे जाय पैदल, आटो या रेलगाड़ी से ? यदि किसी के पाप का घड़ा भर...
सतरंगी दुनिया-३०
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया-३०

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ********************  इस दुनिया में सिर्फ धोखा एवं धक्का ही मुफ्त में मिलता है, बाकी हर चीज की कीमत चुकानी पड़‌ती है। *देखिए हमारे देश की हालत- कचरा उठाने वाला अनपढ़‌ है और कचरा फेंकने वाले पढ़े-लिखे।* हर कोशिश में शायद सफलता नहीं मिल पाती है, लेकिन प्रत्येक सफलता का कारण कोशिश ही होती है। आपका लहज़ा बता देता है कि जुबान बोल रही है या पैसा। महंगाई इतनी बढ़ गई है कि १०० में आने वाली पुलिस ११२ में आ रही है। कर्म वो चिठ्ठी है, जो कभी भी गलत पते पर नहीं पहुंचती है, जिसने भेजी है, उसी के पास लौटती है। *सुन लेने से कितने ही सवाल सुलझ जाते हैं और सुना देने से हम फिर वहीं उलझ जाते हैं।* अगर आप सोचते हैं, कि सब दु:ख दूर होने के बाद मन प्रसन्न होगा तो ये आपका वहम है...। मन प्रसन्न रखें, सब दु:ख स्वयं दूर हो जाएंगे। उन रिश्तों को टूटने दें, जिनकी वजह ...
सतरंगी दुनिया – २९
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया – २९

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ********************  वास्कोडिगामा अगर शादी-शुदा होता तो को कभी भी भारत की खोज नहीं कर पाता, क्योंकि कहां जा रहे हो ? कहाँ से आ रहे हो ? किसके साथ जा रहे हो ? कब वापस आओगे ? मुझे भी साथ ले चलो। मेरे लिए वहाँ से क्या लाओगे ? ये सब सवाल पूछने वाली पत्नी उसके पास नहीं थी। कभी साथ बैठोगे तो अपने दर्द बताएंगे, यूँ फोन से पूछोगे तो खैरियत ही बताएंगे। अब दुनिया भरोसे लायक नहीं रही, क्योंकि लोग अब कसम खाकर भी झूठ बोलते हैं। *उम्र से पहले ही बड़े हो जाते हैं वो बेटे, जिन्हें बाप से दौलत नहीं, बल्कि जिम्मेदारियाँ मिलती हैं।* आजकल नींद भी बदल गई है, अब सपने नहीं आते। अब तो थकान सुलाती है, और जिम्मेदारियाँ उठाती है। मैं वो समझदार हूँ, जिसे पता है कि मुझे किसने, कब और कितना बेवकू‌फ बनाया था। *भारत में सिर्फ १ प्रतिशत लड़कियाँ क्रिकेट, टैनिस, हॉकी और ...
सतरंगी दुनिया- २८
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया- २८

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ********************  पत्नी ने घर में ज्यादा खाना बनाया तो पति ने पूछा कि घर में खाने वाले हम ३ लोग हैं, फिर तुमने ढेर सारा खाना किसके लिए बनाया है। पत्नी ने प्यारा-सा उत्तर दिया,- मुझे बचे हुए भोजन से विविध व्यंजन बनाने की विधि सीखनी है। आजकल की नौकरानी का हाल देखिए, मालकिन ने नई नौकरानी को समझाते हुए कहा, देख मैं ज्यादा बोलना पसंद नहीं करती। अगर में अंगुली का इशारा करूं तो समझ लेना कि में बुला रही हूँ। नौकरानी बोली,- मैडम मैं भी ज्यादा बोलना पसंद नहीं करती। अगर मैं सर हिला दूं तो आप समझ लेना कि मैं नहीं आ सकती। *एक ६० साल की उम्र वाले व्यक्ति की टी शर्ट पर एक शानदार वाक्य लिखा था- मेरी उम्र ६० साल नहीं है, मैं तो केवल १६ साल का हूँ ४४ साल के अनुभव के साथ। इसे कहते हैं नजरिया।* परमात्मा कभी किसी का भाग्य नहीं लिखता है, बल्कि जीवन के ...
सतरंगी दुनिया -२६
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया -२६

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** *अजीब बात है, कि वो इंजीनियर नहीं है फिर भी तारीफ के पुल बाँध लेता है।* हँसना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है, पर दूसरों पर हँसना हमारे लिए हानिकारक है। उम्र बढ़ने के साथ हमें यह नहीं सोचता चाहिए कि हम ओल्ड हो गए हैं, बल्कि ऐसा सोचना चाहिए, कि हम तपकर गोल्ड हो गए हैं। उमर कहती है कि अभी थोड़ी भक्ति कर ले, पर दिल कहाँ है, मानता वो तो कहता है कुछ मस्ती कर ले। *यदि आप उम्र को हराना चाहते हैं, तो आप अपने शौक जिन्दा रखिए।* यदि आप खुश रहना चाहते हैं तो इस बात पर ध्यान मत दीजिए कि कौन क्या कर रहा है, कब कर रहा है और क्यों कर रहा है ? अब मुझे उम्र समझाती है कि अब जिंदगी की शाम हो गयी है, परतुं दिल कहता है कि महफिल तो शाम को ही शुरू होती है। बुढ़ापे में भी जवानी का जोश रखिए। माना हमारा तन कछुआ होता है, मगर जनाब हमारा मन तो खरगो...
सतरंगी दुनिया – २५
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया – २५

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ********************  आज प्रधानमंत्री द्वारा देश की जनता से जो निवेदन किया गया, उसका असर अब दिखने लगा है। आज सुबह-सुबह कामवाली बाई का फोन आया- बर्तन, कपड़े मेरे घर-घर भेज दो। मोदी जी ने वर्क फ्राम होम का आर्डर दिया है। *जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, छोटे अक्षर दिखाई नहीं देते। शायद यह एक इशारा ही है, कि बढ़‌ती उम्र के साथ छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करें।* इस दुनिया में खुश वही लोग हैं, जो स्वयं का मूल्यांकन करते हैं, और दुखी वो हैं, जो दूसरों का मूल्यांकन करते हैं। अजीब बात है कि एक पत्थर एक बार मंदिर जाने पर भगवान बन जाता है, परन्तु इंसान हजार बार मंदिर जाता है पर इंसान नहीं बन पाता है। अपने रिश्तों की बगिया में एक रिश्ता नीम के पौधे जैसा भी रखिए, जो सीख भले ही कड़वी देता है, पर तकलीफ में मरहम का काम करता है। *आधुनिक युग मिलावट का युग है। सब...
सतरंगी दुनिया- २३
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया- २३

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ********************  जो लोग आपको नहीं समझते- उन्हें मत सममझाइए। समुंदर खारा है-खारा ही रहेगा, उसमें शक्कर मत मिलाइए। हम अक्सर खून की जांच करवाकर देखते हैं, कि शरीर में कैल्शियम और विटामिन घट तो नहीं रहे हैं। मेरे ख्याल से कभी ऐसे अपने व्यक्तित्व की भी जाँच करवा लेनी चाहिए। क्या पता दया, करुणा, मानवता, दोस्ती और इंसानियत भी घट रही हो। याद रखिए- तारीफ करने वाला आपकी स्थिति देखता है और परवाह करने वाला आपकी परिस्थिति देखता है। *भुट्टा बेचने वाला फूट-फूट कर रोया, जब एक एक मार्डन लड़‌की ने कहा- अंकल एक हैंडिल वाला पापकॉर्न देना।* हमारे साथ अक्सर वही लोग चलते हैं, जिन्हें हमसे फायदा नहीं बल्कि हमारी फिक्र होती है। १९९० में लड़कियाँ डरती थी कि सास कैसी मिलेगी ? २०२० में सास डर रही है, कि बहू कैसी मिलेगी ? देखिए अजीब संजोग कि जो लड़‌कियाँ १९९० ...
रिटामटमेंट
लघुकथा

रिटामटमेंट

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ********************  रामशरण जी कालेज में प्रोफेसर थे। स्वभाव के मस्त-मौला थे। अपने काम से मतलब रखते थे, अपने कर्तव्य के प्रति हमेशा जागरूक रहते थे, इसलिए छात्रों में भी वे लोकप्रिय थे। समय बीतता गया, आखिर उनके रिटामटमेंट का समय भी आ गया। रिटायरमेन्ट के बाद उन्होंने एक बड़ी पार्टी का आयोजन किया, जिसमें उनके प्रोफेसर साथी, कालेज का स्टॉफ, पूर्व छात्रों तथा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों सभी को आमंत्रित किया। पार्टी आराम से चल रही थी। अचानक उनकी पत्नी शीला चक्कर खा कर गिर पड़ी। रंग में भंग पड़ गया गया। शीला जी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर ने जाँच करके कहा, "ये अब जिन्दा नहीं हैं।" खुशी का माहौल दु:ख में बदल गया। देखिए, प्रकृति का खेल-रामशरण जी कालेज से रिटायर हो गए और उनकी पत्नी इस दुनिया से रिटायर हो गयी। असली रिटामटमेंट किसका था, म...
सतरंगी दुनिया- २२
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया- २२

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** *ज़िंदगी को ठंड और घमंड दोनों से बचाकर रखना चाहिए, क्योंकि दोनों ही परिस्थितियों में आदमी अकड़ जाता है।* हम लोग घर के दरवाजे पर शुभ-लाभ लिखते हैं। केवल शुभ-लाभ लिखने से कुछ नहीं होगा। शुभ विचार रखिए अपने लिए भी और दूसरों के लिए भी, फिर लाभ ही लाभ होगा। भगवान ने हर इंसान को किसी वजह से बनाया है, इसलिए खुद को स्पेशल समझना शुरू कर दो। *वाणी और विचार ये दोनों प्रोडक्ट हमारी खुद की कम्पनी के हैं। इनकी क्वालिटी जितनी अच्छी रखेंगे, कीमत उतनी ही ज्यादा मिलेगी।* भिखारी भी कभी-कभी विशेष जवाब देकर सोचने को मजबूर कर देते हैं। एक व्यक्ति प्रतिदिन भिखारी को दस रुपए देता था। अचानक पिछले कुछ दिनों से उसने भिखारी को एक रूपया प्रतिदिन देना शुरू कर दिया। भिखारी ने कारण पूछा तो उस व्यक्ति ने बताया कि अब उसकी शादी हो गयी है। तब भिखारी न...
सतरंगी दुनिया- २१
कविता

सतरंगी दुनिया- २१

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** अपनी ज़िंदगी को खुली किताब मत बनाइए, क्योंकि लोगों को पढ़ने में नहीं, बल्कि पन्ने फाड़ने में मजा आता है। *खिचड़ी की विशेषता देखिए- अगर बर्तन में पकती है तो बीमार को ठीक कर देती है और दिमाग में पके तो इंसान को बीमार कर देती है।* अजीब है दुनिया मरने वाले को रोने वाले हजार मिल जाएंगे, मगर जो जिंदा है, उसे समझने वाला एक भी नहीं मिलता है। समय का खेल भी निराला है, भरी जेब ने दु‌निया से पहचान कराई, और खाली जेब ने इंसानों की। जो लोग हमें पसंद नहीं करते हैं, उनके बारे में अजीब बात यह है, कि वे हमारी हर चीज पर नजर रखते हैं। हमारी ज़िन्दगी भी अजीब है, होती तो है हमारी, पर जीना दूसरों के लिए पड़ता है। गर्लफ्रेंड को शराब पीते देख ब्वाय फ्रेंड ने पूछा- तुम लड़की हो के भी शराब पीती हो ? गर्लफ्रेंड ने जवाब दिया, कि क्या २-४ पैग पीने के...
संतरंगी दुनिया- २०
व्यंग्य

संतरंगी दुनिया- २०

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** यदि आप अपनी पत्नी को खुश रखना चाहते हैं तो अपने पर्स का मुँह खुला रखें और अपना मुँह बंद रखें। वक़्त बदल गया है, पहले लड़कियाँ सफेद घोड़े पर राजकु‌मार की कल्पना किया करती थी, आजकल बीएमडब्ल्यू में गधा भी आ जाए तो चलता है। *दुनिया में सिर्फ एक दिल ही है, जो बिना रूके काम करता है; इसलिए दिल को खुश रखो, वो आपका हो या पराया।* कोई इंसान अगर आपको केवल जरूरत पड़‌ने पर याद करता है, तो उस बात का बुरा मत मानिए, क्योंकि जब अंधेरा हो जाता है, तभी दीए की याद आती है। डाकू और नेता दोनों ही डाका डालते हैं, पर देखिए- डाकू को कारावास मिलता है और नेता को कार-आवास !! *हमारे देश में लॉजिक कोई नहीं मानता, सबको मैजिक चाहिए, इसलिए यहाँ साइंटिस्ट के बजाय बाबा फेमस है।* मैं नास्तिक हूँ, क्योंकि मैंने धर्म की आड़ में धंधे देखे हैं; ईश्वर नहीं। हमार...
सतरंगी दुनिया- १९
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया- १९

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** भगवान ने हथेली के आगे अंगुलियाँ इसलिए बनाई है कि पहले आप कर्म करें, फिर भाग्य को महत्व दें। बिना कर्म के आपका अच्छा भाग्य नहीं बन सकता है। इंसान कितना भी गोरा क्यों न हो, परन्तु उसकी परछाई काली ही होती है। *मरने के बाद अर्थी को चार लोग कंधा देते हैं, अर्थात सहारा देते हैं। अगर इन चारों में से किसी एक ने जिन्दा रहते हुए उस व्यक्ति को सहारा दिया होता तो शायद मरने की नौबत नहीं आती।* एक बात गाँठ बांधकर रखिए- ज़िंदगी की दौड़ में जो आपको दौड़ कर नहीं हरा सकते, वे आपको तोड़ कर हराने की कोशिश जरूर करते हैं। उम्र के इस दौर में मैं क्या 'वैलेन्टाईन डे' मनाऊँगा, क्योंकि अब 'टेडी बियर' भी 'ठंडी बियर' सुनाई देता है। ज़िंदगी का यह कड़‌वा सत्य है कि हम पहला स्नान भी स्वयं नहीं कर पाते हैं और अंतिम स्नान भी हमें दूसरे लोग कराते हैं। ज़िं...
सतरंगी दुनिया-१८
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया-१८

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** ईमानदारी का महत्व इसी बात से समझ में आता है, कि जो व्यक्ति स्वयं गलत काम करता है, परंतु अपने नौकर से ईमानदारी की अपेक्षा करता है। वफादार सभी कोई चाहते हैं, परन्तु स्वयं कोई बनता नहीं चाहता। *हमारे देश में सरकारी अस्पताल का मतलब है- जान से हाथ धोना, और प्राईवेट अस्पताल का मतलब है-जायदाद से हाथ धोना, इसलिए समझदार बनिए और अपनी सेहत का ध्यान रखिए, ताकि आपको अस्पताल के चक्कर काटने पड़ें।* जो दूसरों को इज्जत देता होता है, असल में वो इज्जतदार होता है, क्योंकि इंसान दूसरों को वही दे पाता है, जो उसके पास होता है। *एक बात समझ से परे है कि 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर शराब के ठेके बंद रहते हैं और ३० जनवरी गांधी जी की मृत्यु के दिन शराब के ठेके खुले रहते हैं।* रुद्राक्ष हो या इंसान, एकमुखी बहुत कम ही मिलते हैं। उपदेश और सलाह हमारे ...
सत्रहवां संस्कार
आलेख

सत्रहवां संस्कार

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ********************  सोलह संस्कारों का वर्णन हमारे वेदों में वर्णित है। जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य के जीवन में सोलह संस्कार किए जाते हैं। आप सोच रहे होंगे, ये सत्रहवां संस्कार कहाँ से आ गया, जिसको आज तक आपने सुना या देखा नहीं। "आवश्यकता अविष्कार की जननी है।" जो भी परम्पराएं समाज में स्थापित होती है, वो वक़्त और समाज की जरूरत के हिसाब से तय होती है। वर्तमान में छात्र डॉक्टरी की पढ़ाई करते हैं। उसके लिए उन्हें मनुष्य के मृत शरीर अर्थात देह की आवश्यकता होती है, जिसके बिना वे मानव शरीर की बारीकियों का अध्ययन नहीं कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त शोध यानी रिसर्च के लिए भी मानव देह की आवश्यकता पड़ती है। वर्तमान में देश के मेडिकल कालेजों में जितनी देहों की आवश्यकता है, उस अनु‌पात में मिल नहीं पा रही है। मृत्यु के बाद हम अपने धर्म के अनुसार देह को...
सतरंगी दुनिया- १७
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया- १७

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** आपका भव्य महल हो या छोटी-सी झोपड़ी, घर उसी को कहते हैं जहां शांति और सुकून मिले। *यदि आप खुश रहना चाहते हैं तो दूसरों के जीवन में अपनी जगह ढूंढना बंद कर दो।* हमें अपनी ज़िंदगी का आनंद अपने तरीके से लेना चाहिए, लोगों की खुशी के चक्कर में तो शेर को भी सर्कस में नाचना पड़ता है। स्टेटस ज़िंदगी का हो या मोबाईल का, स्टेटस ऐसा रखें कि लोग कॉपी करने पर मजबूर हो जाएँ। जब बुरा करने के बाद भी बुरा ना लगे तो समझना चाहिए कि बुराई अब हमारे चरित्र में आ गई है। आज तो मेरा तकिया और बिस्तर भी बोल पड़ा, "मालिक थोड़ा उठकर बैठ जाओ या छत पर घूम लो, हमें भी थोड़ा साँस लेने दो। एक नगर सेठ के यहाँ इन्कमटैक्स का छापा पड़ा। सारे खातों की जांच हुई। एक जगह सेठ ने लिख रखा था कि पाँच लाख की जलेबियाँ कुत्तों को खिलाई। इन्कम टैक्स वालों ने इस खर्च के लिए...
सतरंगी दुनिया- १६
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया- १६

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ********************  आप गलती करके सुन रहे हैं तो आप ऑफिस में हैं, और अगर आप बिना गलती के सुन रहे हैं तो आप निश्चय ही घर पर हैं। दुनिया की हर चीज ठोकर लगने से टूट जाती है, लेकिन कामयाबी एक ऐसी चीज है जो कि ठोकर खाकर ही मिलती है। गरीब मांगे तो भीख, अमीर मांगे तो चंदा, करोड़पति मांगे तो डोनेशन और अरबपति मांगे तो सब्सिडी। यहाँ सभी लोग अपने हिसाब से भीख मांगते हैं। मुहुर्त के चक्कर में मत पड़िए, बिना मुहुर्त के पैदा होकर जीवनभर 'शुभ मुहुर्त' के चक्कर में फंसा इंसान एक दिन बिना मुहुर्त के प्राण त्याग देता है। पुरूष की आदत होती है हमेशा महिलाओं के बीच घुसने की, इसलिए शायद 'फीमेल' शब्द में 'मेल' आता है और 'वुमेन' में 'मेन' आता है। झूठ बोलने से पाप लगता है और सच बोलने से आग। अब आप ही बताइए, आप क्या बोलेंगे ? जिसका कोई नहीं होता, उसका खुदा होता ह...
सतरंगी दुनिया – १५
आलेख

सतरंगी दुनिया – १५

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** जितना अगूंठा हमारा फोन पर चलता है, अगर उतना माला पर चले तो हमें भगवान अवश्य मिलेंगे। 'भला करने से भला होता है' इस कहावत से तो मेरा विश्वास ही उठ गया है, क्योंकि मैं अपनी प्रेमिका को डेयरी मिल्क, फाईव स्टार और फिर किट-कैट देता था। उसी प्रेमिका से मेरी शादी हो गयी। अब वो मुझे टिफिन में टिंडे, लौकी और करेले दे रही है। लोग अपने मोबाईल पर डी.पी. लगाते हैं। डी.पी.- मतलब दिखावटी फोटो। एक लड़की कह रही थी मैं बचपन में बहुत ताकतवर थी। मैंने पूछा- तुम्हें कैसे पता ? उसने कहा- मेरी मम्मी कहती है जब मैं रोती थी तो पूरा घर सिर पर उठा लेती थी। हमें भगवान और डॉक्टर को कभी नाराज नहीं करना चाहिए, क्योंकि जब भगवान नाराज होता है तो डॉक्टर के पास भेजता है और जब डॉक्टर नाराज होता है, तो वो भगवान के पास भेज देता है। जब कोई बटोरने की जगह ब...
खाली हाथ आये
कविता

खाली हाथ आये

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** खाली हाथ आये है खाली हाथ जाना है। फिर क्यों संसार में बटोर कर अपना वक्त गवाना है। ******** खाली हाथ आये है जरूर पर खाली हाथ नहीं जायेंगे। अच्छे कर्म कर कर लोगों की दुआए ले जायेंगे। ******** जितना ही हम एकत्र करेंगे सब यहाँ रह जायेगा। केवल कर्म का पिटारा हमारे साथ जायेगा। ******** अब जोड़ो मत बांटना शुरू करो। अपनी ज़िन्दगी को खुशियों से भरो। ******* सबसे अच्छा व्यवहार करो सबके काम आओ। सबकी करो भलाई दुनिया में यही यश कमाओ। ********* जब आप नहीं रहेंगे लोग आपका व्यवहार याद करेंगे। और आप मृत्यु के बाद भी लोगो के दिलों में आप ज़िंदा रहेंगे। ******** अब संचय को छोड़कर प्रभु वंदन में लग जाओ। और इस दुनियां के सब सागर से तर जाओ। ********* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ...
जीवन एक संगीत है
कविता

जीवन एक संगीत है

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** जीवन एक संगीत है और यही मेरा मीत है और यह मेरी जिंदगी का गीत है। ******* जिस प्रकार संगीत के स्वर है सात। हमारी जिंदगी में सच होती है ये बात। ******** संगीत से हमें खुशी मिलती है जिंदगी की उदासी दूर रहती है। ******** हमारी सांसों में हमारी बातों में संगीत है। मधुर है ये जिंदगी का गीत है ******** संगीत हमारी जिंदगी में आनंद भर देता है। ग़म से खुशी की ओर ले चलता है। ******** जो संगीत को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाता है। वो अपनी जीवन को खुशियों का द्वार बनाता है। ********* संगीत के स्वरों को अपनी जिंदगी में घोलिए। और अपने आप को आनंद की तराजू में तौलिए ******* अगर आपको जाना है ग़म की दुनियां से दूर तो अपनाईये संगीत को जरूर। ********* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार...
नयी सी हवा है नया आसमां
कविता

नयी सी हवा है नया आसमां

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** नयी सी हवा है नया आसमां ठंडी हवा का दौर चल रहा है। मन तुमसे मिलने को मचल रहा है। ******** नयी सी हवा है नया आसमां। तुम आ जाओगे तो बदलेगा समां। ******** मौसम सुहाना है हमने ये माना है। सब कुछ छोड़कर तुम्हे चले आना है। ******** आसमां में बादल छाये है हम तुमपे नजरे विछाये है। अपना लो मुझको इसके पहले कि कहीं मौसम बदल न जाये। ********* इस समय जरुरत है धुप की जो कुछ गर्मी दे जाय। कड़कड़ाती ठंडी से कुछ रहत दे जाये। ******** मौसम बदल रहा है तुम मत बदल जाना। रोज की तरह जरूर मिलने आना। ********* हवाएं भले नयी है हमारे संबंध पुराने है। तुमसे से तो रोज मिलता हूँ बाक़ी लोग अनजाने है। ******** नयी हवा तुम्हारे आगमन का संकेत दे रही है पल-पल मुझे बैचैन कर रही है। ********* परिचय : डॉ. प्रताप म...
न जाने क्या बदला है
कविता

न जाने क्या बदला है

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** वो बदल गये समझ नहीं आया। न जाने क्या बदला है। ******** वक्त के साथ हर चीज बदलती है। पर तुम न बदल जाना वक्त के साथ। ******** कली बदलकर फूल बनती है। बच्चा युवा बन जाता है। ******* बदलना प्रगति की निशानी है। जिंदगी के आगे बढ़ने की कहानी है। ******** मौसम भी बदलता है ख्याल भी बदलते है। चुनाव जीतने के बाद नेता भी बदलता है। ******** बहुत दुख होता है जब अपना कोई बदल जाता है। हमें छोड़कर किसी दूसरे की बाहों में समा जाता है। ********* केवल वक्त को बदलने दीजिए। अपना स्वभाव और संस्कार मत बदलिए। ******** कोई दल बदलता है कोई शहर बदलता है। होता हैं जिसमें फायदा आदमी वह चीज बदलता है। ******** बदलो जरूर बदलो मगर इतना मत बदलो। कि तुमसे बदला लेने की इच्छा हो। ********* परिचय : डॉ. प्रत...
तन्हाई के सायें
कविता

तन्हाई के सायें

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** वो मुझे तन्हा कर गयी मुझे छोड़कर किसी और पर फिदा हो गयी। ******** तन्हाई मुझे बहुत सताती है। हर वक्त उसकी याद आती हैं। ******** पता नहीं क्या कमी थी मेरे प्यार में जो मुझे तन्हा छोड़ गयी इस संसार में। ******* अब तो मैने तन्हाई को अपना दोस्त बनाया है। जुदाई के घाव पर यह मरहम लगाया है। ******* वक्त नहीं कटता तन्हाई में बड़े दुख मिले मुझे बेवफाई में। ******** भगवान किसी को तन्हा न करें। किसी को अपने प्यार से जुदा न करें। ******** कोई कभी तो शिकायत करे। बेवफा बनकर तन्हा न करे। ******* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।...
अलबेला मौसम आया
कविता

अलबेला मौसम आया

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** मौसम को मैने इस समय बदलते पाया । वास्तव में अब अलबेला मौसम है आया। ******* न पंखे की जरूरत है न हीटर की जरूरत है। देखिए मौसम कितना खूब सूरत है। ******** ऐसे अलबेले मौसम का अलग ही मजा है। मौसम खराब हो तो लगता सजा है। ******** मौसम बदल रहा है तुम मत बदल जाना। सात जन्म तक मेरा ही साथ निभाना। ******** ये मौसम प्यार का है आओ एक दूसरे में समा जायें । और दोनों मिलकर एक हो जाय। ******* चारों तरफ शांति है न कही शोर है। खुशहाली फैली चारों ओर है। ******** वे बदल गये मौसम की तरह हम इंतजार करते रहे। वे हो गये किसी और के हम सपने देखते रहे। ******** सबसे अच्छा है ये मौसम सबसे प्यारा है ये मौसम। जो करना है कर लो दोबारा नहीं आयेगा ये मौसम। ******* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : च...
मुकद्दर
कविता

मुकद्दर

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** मेरे मुकद्दर में है "मुकद्दर" पर कविता लिखना। और उसको प्रकाशन के लिए भेजना। ******* मिलता वही है हमें जो मुकद्दर में लिखा होता है। फिर इंसान क्यों अपने मुकद्दर पर रोता है। ******* हमारे कर्मों से ही हमारा मुकद्दर बनता है। अच्छा करने पर हमें अच्छा ही मिलता है। ******* जो हमारी किस्मत में लिखा हो वो मुकद्दर कहलाता है। यह जन्म के समय विधाता द्वारा लिखा जाता है। ******* कभी किसी की लॉटरी लगती है और गरीब अमीर बन जाता है। यही सब मुकद्दर कहलाता है। ******* लोगों की दुआओं से आपका मुकद्दर बदल सकता है। आपको रंक से राजा बना सकता है। ******** केवल मुकद्दर के आसरे मत बैठे रहिये। कुछ अच्छे काम कर अपनी सफलता की कहानी कहिए। ******** तुमको मैने अपना "मुकद्दर" समझा था। लगता है अब मुकद्दर ने साथ छ...