नवरात्रि
डॉ. भावना सावलिया
हरमडिया, राजकोट (गुजरात)
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आई माँ विश्वंभरी, आज तुम्हारे धाम।
भटक गए हम राह हैं, बाँह लीजिए थाम।।
नौ दुर्गा माँ को नमन, करते बारंबार।
जोडे दोनों हाथ हम, खड़े तुम्हारे द्वार।।
प्रथम शैलपुत्री तुम्हें, करते नित्य प्रणाम।
जगत नियन्त्री शक्ति का, हम रटते हैं नाम।।
ब्रह्मचारिणी शक्ति हे, सविनय तुम्हें प्रणाम।
मन में जलता भक्ति का, दीपक आठों याम।।
करो चंद्रघंटा सदा, प्रेम-भक्ति संचार।
द्वेष-भाव को दूर कर, दो पावन संस्कार।।
माँ कूष्माण्डा त्याग का, मन में हो विस्तार।
मानवता के द्वार से, रहे बरसता प्यार।।
करो स्कंदमाता सदा, दोष हृदय के दूर।
जनहित की शुभ भावना, मन में हो भरपूर।।
हे माता कात्यायनी, सबकी पालनहार।
पाप मिटाकर जीव का, शीघ्र करो उद्धार।।
कालरात्रि माता करो, दुष्टों का संहार।
हे जगदंबा शक्ति तुम, हो सबका आधार।।
शि...


