इंडिया नहीं “भारत” कहें
मंजुला भूतड़ा
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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इंडिया नहीं "भारत" कहें,
गर्व से कहें, हम भारतीय हैं।
शपथ हमें इस मिट्टी की,
इसे चंदन-सा महकाएंगे।
धूल नहीं है यह केवल,
इसका माथे तिलक लगाएंगे।
नए भारत के निर्माण में,
फिर से अब जुट जाएंगे।
विश्व के नये मानचित्र में,
अब "पूरा भारत" दिखलाएंगे।
राष्ट्रीय पक्षी इसका मोर,
राष्ट्रीय पशु यहां बाघ है।
पुष्प कमल है राष्ट्र गौरव,
अशोक चक्र महान है।
हिन्दी इसकी भाषा मीठी,
अपनेपन की खुशबू है।
राष्ट्र भाषा इसे बनाएं,
यह दिल में अरमान है।
इंडिया नहीं "भारत" कहें,
गर्व से कहें, हम भारतीय हैं।
परिचय :- मंजुला भूतड़ा
जन्म : २२ जुलाई
निवास : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : कला स्नातक
कार्यक्षेत्र : लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता
रचना कर्म : साहित्यिक
लेखन विधाएं : कविता, आलेख, ललित निबंध, लघुकथा, संस्मर...





