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गीता ज्ञान-जीवन निदान
कविता

गीता ज्ञान-जीवन निदान

मोहिनी गुप्ता राजगढ़, ब्यावरा (मध्य प्रदेश) ******************** कुरुक्षेत्र - समर में दिया श्री कृष्ण ने अर्जुन को ज्ञान। अज्ञान से ज्ञान की ओर "गीता ज्ञान - जीवन निदान"। गीता के हर श्लोक में होती कुछ ज्ञान की बात। समझ जाए जो नर नारी तो होता जीवन पार। देते इक श्लोक में श्री कृष्ण अर्जुन को ये सीख। नहीं इन्द्रियों के वश में रह कर कुछ कर्म उचित। हो न्यायोचित कर्म और हो जगत का कल्याण। रख दूर स्वयं को भोग इंद्रियों से कहना ये मान। इंद्रियों से श्रेष्ठ मन और मन से भी श्रेष्ठ मानस। मानस (बुद्धि) से भी श्रेष्ठ आत्मा जगत का सार। आत्मा जो अजर - अमर है इंद्रियां तो स्थूल है। न कभी मरती है और न ही कभी लेती जन्म है। पा इंद्रियों पर विजय लगाए ईश आराधना में ध्यान। उसका कर्म और जीवन हो जाता है सफल बारंबार। हे पार्थ ! उठो ! अपने मन से निकालो भय। कर विवेक का प्र...