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Tag: शरद मिश्र ‘सिंधु’

मां वाणी … कुंडलिया
छंद

मां वाणी … कुंडलिया

शरद मिश्र 'सिंधु' लखनऊ उ.प्र. ********************** मां वाणी कुछ दीजिए, ऐसा आशीर्वाद। भारत भू से हो सके, खत्म सभी उन्माद। खत्म सभी उन्माद, जिहादी हिंसा रोको, यदि मानें वह नहीं, उन्हें काली बन ठोकों, फेंक रहे जो पत्थर, हिंसक मूढ़ अनाड़ी। भर शुभत्व दो, उनके मन में भी मां वाणी। . परिचय :-  नाम - शरद मिश्र 'सिंधु' उपनाम - सत्यानंद शरद सिंधु पिता का नाम - श्री महेंद्र नारायण मिश्र माता का नाम - श्रीमती कांती देवी मिश्रा जन्मतिथि - ३/१०/१९६९ जन्मस्थान - ग्राम - कंजिया, पोस्ट-अटरामपुर, जनपद- प्रयाग राज (इलाहाबाद) निवासी - पारा, लखनऊ, उ. प्र. शिक्षा - बी ए, बी एड, एल एल बी कार्य - वकालत, उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ सम्मान - सर्वश्रेष्ठ युवा रचनाकार २००५ (युवा रचनाकार मंच लखनऊ), चेतना श्री २००३, चेतना साहित्य परिषद लखनऊ, भगत सिंह सम्मान २००८, शिव सिंह सरोज स्मारक संस्थान सम्मान २०१९ संपादन - द...
आईना चांद को …
ग़ज़ल

आईना चांद को …

शरद मिश्र 'सिंधु' लखनऊ उ.प्र. ********************** बतौरे खास भी कहना न कभी आया है। मगर वो कहता है हमने भी गजल गाया है। शहर में आज मेरे फिर उसी की आमद है, हवाओं ने ही हमें यह खबर सुनाया है। ये रंग इंद्रधनुष का व चमन की खुशबू, वो आ गया है तो मेरे लिए ही आया है। कभी फिर होगी बात पूजा और सजदे की, मुझे वहीं वो मिला सर जहां झुकाया है। वो मेरे साथ ही रहने को अमादा अचरज, सोचता था कि उसे मैंने खुब सताया है। लुटाता ही रहा हूं प्यार मुहब्बत लोगों, वही लुटाया है हमने जो सदा पाया है। बनी शागिर्द जमाने में "सिंधु" की लहरें, आईना चांद को जब भी कभी दिखाया है। . लेखक परिचय :-  नाम - शरद मिश्र 'सिंधु' उपनाम - सत्यानंद शरद सिंधु पिता का नाम - श्री महेंद्र नारायण मिश्र माता का नाम - श्रीमती कांती देवी मिश्रा जन्मतिथि - ३/१०/१९६९ जन्मस्थान - ग्राम - कंजिया, पोस्ट-अटरामपुर, जनपद- प्रयाग राज (इलाहाबाद) नि...
बस यूं ही …
ग़ज़ल

बस यूं ही …

शरद मिश्र 'सिंधु' लखनऊ उ.प्र. ********************** इस तरह से चलो जिया जाए। घाव दिल के सभी सिया जाए। एक आंधी न हैं कई शायद, हर तरफ दीप रख लिया जाए। हम जुटाएं जरूर असि पर वह, बंदरों को नहीं दिया जाए। पथ निहारें न सदा शंकर का, विष स्वयं भी कभी पिया जाए। लांघने पर अवश्य दें उत्तर, जुल्म की हद बना लिया जाए। चाहता हूं गजल कहूं लेकिन, भागता दूर काफिया जाए। बन गए रूप का हिमालय वो, चांद को भी गगन दिया जाए। "सिंधु" वह चांद हारकर देगा, रार नभ से चलो किया जाए . लेखक परिचय :-  नाम - शरद मिश्र 'सिंधु' उपनाम - सत्यानंद शरद सिंधु पिता का नाम - श्री महेंद्र नारायण मिश्र माता का नाम - श्रीमती कांती देवी मिश्रा जन्मतिथि - ३/१०/१९६९ जन्मस्थान - ग्राम - कंजिया, पोस्ट-अटरामपुर, जनपद- प्रयाग राज (इलाहाबाद) निवासी - पारा, लखनऊ, उ. प्र. शिक्षा - बी ए, बी एड, एल एल बी कार्य - वकालत, उच्च न्यायालय खंडपीठ लखन...
वंदना …
छंद, धनाक्षरी

वंदना …

शरद मिश्र 'सिंधु' लखनऊ उ.प्र. ********************** वीणा वादिनी विभव वारिए विकल वत्स वंदना विडंबना वरंच विलगाईये। लाल लाल लहू लक्ष्म लोचन ललाम लुप्त लूला लाल लग लक्ष्य लकुट लड़ाईए। स्वर सुधा सरिता सलिल सरसाए स्याम सूत्र सार सबको सुदामा सा सुनाईए। कामना कि कमलासिनी कपट कलुषों को काटके कलंकहीन कीर्ति करवाईए। . लेखक परिचय :-  नाम - शरद मिश्र 'सिंधु' उपनाम - सत्यानंद शरद सिंधु पिता का नाम - श्री महेंद्र नारायण मिश्र माता का नाम - श्रीमती कांती देवी मिश्रा जन्मतिथि - ३/१०/१९६९ जन्मस्थान - ग्राम - कंजिया, पोस्ट-अटरामपुर, जनपद- प्रयाग राज (इलाहाबाद) निवासी - पारा, लखनऊ, उ. प्र. शिक्षा - बी ए, बी एड, एल एल बी कार्य - वकालत, उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ सम्मान - सर्वश्रेष्ठ युवा रचनाकार २००५ (युवा रचनाकार मंच लखनऊ), चेतना श्री २००३, चेतना साहित्य परिषद लखनऊ, भगत सिंह सम्मान २००८, शिव सिंह सरोज ...
बस यूं ही …
ग़ज़ल

बस यूं ही …

शरद मिश्र 'सिंधु' लखनऊ उ.प्र. ********************** दग्ध चमन। है अनबन। गजल महज, पैनापन। उर्वर है, यह कन कन। वीणा की गूंज सघन। सूरज तुम, किरन किरन। पायल बस, छनन छनन। नारों में, हल्कापन। नेता का सिर्फ कथन। आंखों में, आग तपन। व्यथित देख, जन गन मन। देखें क्या, सूर नयन। भारत का, तन मन धन। "सिंधु" महज, अब न उफन। . लेखक परिचय :-  नाम - शरद मिश्र 'सिंधु' उपनाम - सत्यानंद शरद सिंधु पिता का नाम - श्री महेंद्र नारायण मिश्र माता का नाम - श्रीमती कांती देवी मिश्रा जन्मतिथि - ३/१०/१९६९ जन्मस्थान - ग्राम - कंजिया, पोस्ट-अटरामपुर, जनपद- प्रयाग राज (इलाहाबाद) निवासी - पारा, लखनऊ, उ. प्र. शिक्षा - बी ए, बी एड, एल एल बी कार्य - वकालत, उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ सम्मान - सर्वश्रेष्ठ युवा रचनाकार २००५ (युवा रचनाकार मंच लखनऊ), चेतना श्री २००३, चेतना साहित्य परिषद लखनऊ, भगत सिंह सम्मान २००८, शिव सिंह सरोज ...