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Tag: संध्या शुक्ला

तिरंगा है लहराया
कविता

तिरंगा है लहराया

संध्या शुक्ला अमेठी (उत्तर प्रदेश) ******************** हर जगह पर तिरंगा है लहराया देखो आज़ादी का दिन है आया विश्वासघात कर अंग्रेजो ने भारत को गुलाम बनाया था सोने की चिड़िया को कातिलों ने अपना शिकार बनाया था छीन कर सत्ता राजाओं की अपना राज सिंहासन लगाया था भारत की भोली जनता को अंग्रेजो ने आपस मे लड़वाया था बहाकर नदियां खून की मातम में उत्सव मनाया था भाई भाई को बांटकर अंग्रेजो ने भारत माँ को तड़पाया था हर जगह पर तिरंगा है लहराया देखो आजादी का दिन है आया याद करो सब उन दिनों को जब भारत देश का हाल बुरा था वीर सपूतों की आंखों में आज़ादी का स्वप्न अधूरा था बरसते थे बदन पर कोड़े आंखों से लहू टपकता था रोते बिलखते बच्चो का भूख प्यास से दम निकलता था टूट चुकी थी सब उम्मीदे जब घना अंधेरा छाया था भारत की धरती पर कोई काला बादल मंडराया था खूंखारपन देख अंग्रेजो...
बेटियों के दर्द
कविता

बेटियों के दर्द

संध्या शुक्ला अमेठी (उत्तर प्रदेश) ******************** आइए महसूस करिए बेटियों के दर्द को, देखिए मतलब की गंगा में नहाते हुए मर्द को। वो औरत जिसने जन्म देकर है तुम्हे पाला यहां, जिसके दूध से जली जीवन की ज्वाला यहां। बहन जिसके धागे की अमानत है कलाई पर, हर बहन का कर्ज वो जो है चढ़ा हर भाई पर। वो बाप जिसकी इज्जत की हर कल्पना बेटी से है, घर की दीवारें सुने हर गर्जना बेटी से है। वो बाप जिसका पुत्र एक और बेटियां दो-तीन हैं, वो प्रेम के सागर तले बेटे में ही क्यों लीन है। इज्जत बचाना काम सबने सौंप बेटी को दिया, बेटा चाहे आबरू छीने बने या माफिया। आबरू को लूट कर भी बेटा कुल का अंश क्यों, बेटी जो बस प्रेम कर ले तो उठेगी उंगलियां। हर धर्म में बेबसी और यातना से ऊब कर, मर गई हैं जानें कितनी बेटियां यूं टूटकर। परिचय :-  संध्या शुक्ला शिक्षा : परास्नातक नि...