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Tag: सुभाषिनी जोशी ‘सुलभ’

सास का स्नेह
लघुकथा

सास का स्नेह

सुभाषिनी जोशी 'सुलभ' इन्दौर (मध्यप्रदेश) ********************                      डाक्टर श्वेता जच्चा वार्ड में राउण्ड पर थी। वहाँ पर एक ऐसी ग्रामीण महिला को बच्ची हुई थी, जिसे बच्चे नहीं होने के कारण उसके पति ने दूसरी शादी कर ली थी। पति की दूसरी शादी के नौ महिने के अन्दर ही उस महिला को बच्ची हो गई। डाक्टर श्वेता जब वहाँ पहुँची तब दादी बच्ची को गोद में लेकर कह रही थी "पगली पहले ही आ जाती तो तेरी दूसरी माँ न आती"। परिचय :- सुभाषिनी जोशी 'सुलभ' जन्म तिथि : ०३/०४/१९६४ शिक्षा : बी. एस. सी; एम.ए.(अँग्रेजी साहित्य), बी. एड. सम्प्रति : शास. शाला में शिक्षिका ! साहित्यिक गतिविधि : गद्य एवं पद्म लेखन, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में १०० से अधिक रचनाएँ प्रकाशित, विभिन्न मंचो से २० से अधिक सम्मान, १२ से अधिक आनलाइन काव्य पाठ घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है...
रेशम के धागे
लघुकथा

रेशम के धागे

सुभाषिनी जोशी 'सुलभ' इन्दौर (मध्यप्रदेश) ******************** वरुण की एक ही बहन है रीमा। उसके विवाह को पांच वर्ष हो गये। ऐसा कभी नहीं हुआ कि वह रक्षाबंधन पर नहीं आई परन्तु इस वर्ष का रक्षाबंधन कोरोना काल में आया। वरुण का मन यह माननें को तैयार नहीं था कि इस वर्ष उसकी कलाई पर बहना की राखी नहीं सजेगी। रीमा भी बहुत लालायित थी मायके जाने को पर दोनों ने अपनी भावनाओं के प्रवाह को काबू में करके तय किया कि हम कोरोना काल में स्वास्थ्य मंत्रालय के नियमों का पालन करेंगे और सामाजिक दूरी बनाए रखेंगे। यही सोंचकर रीमा बाजार भी नहीं गई और घर में रखे कुछ रेशम के धागे एक लिफाफे में रखे, साथ में एक चिट्ठी में लिख दिया भाई इन धागों को मेरी राखी समझ अपनी बिटिया चीनू से बंधवा लेना। रीमा ने नम आँखों से वह लिफाफा पोस्ट कर दिया। परिचय :- सुभाषिनी जोशी 'सुलभ' जन्म तिथि : ०३/०४/१९६४ शिक्षा : बी. एस. सी; एम.ए.(अ...
शक का इलाज
लघुकथा

शक का इलाज

सुभाषिनी जोशी 'सुलभ' इन्दौर (मध्यप्रदेश) ******************** नीरू अपनी स्कूटी पेप से जा रही थी। नीरू गाड़ी धीमे ही चलाती है। अचानक एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति उसके साथ चलने लगे। उनके पास भी स्कूटी पेप थी। वो व्यक्ति झुककर मेरी स्कूटी में नीचे की ओर देखने लगे। वहाँ मेरा पर्स रखा था पैरों के बीच। मेरे पर्स में मेरा मंगलसूत्र रखा था जो आफिस से लौटते वक्त सुधरवाना था। मैं कुछ बुरा सोंचती उसके पहले ही बो बोल पड़े बेटा रिजर्व में पेट्रोल की नाब किधर होती है? मैंने मुस्कुरा कर उन्हें रिजर्व में पेट्रोल की नाब की स्थिति समझाई। वे व्यक्ति आगे बढ़ गये और मैं सोचने लगी की शक का कोई इलाज नहीं होता। परिचय :- सुभाषिनी जोशी 'सुलभ' जन्म तिथि : ०३/०४/१९६४ शिक्षा : बी. एस. सी; एम.ए.(अँग्रेजी साहित्य), बी. एड. सम्प्रति : शास. शाला में शिक्षिका ! साहित्यिक गतिविधि : गद्य एवं पद्म लेखन, विभिन्न पत्र-पत्रि...