घूंघट
किरण विजय पोरवाल
सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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सिमट गया घूंघट देहली तक,
सिमत गया घूंघट घर द्वार,
सिमट गया घूंघट होठों पर,
सिमट गया चित्रों में आज।
घूंघट में अब लाज छुपी नहीं,
घूंघट में अब शान छुपी नहीं,
मान सम्मान की बात छुपी नहीं,
घूंघट में अब शर्म छुपी नहीं।
घूंघट में अरमान छुपे नहीं ,
घूंघट में कुछ बात छुपी नहीं,
घूंघट में अब मान छुपा नहीं,
घूंघट में कुछ राज छुपा नही।
घूंघट में अब मान बिक रहा,
घूंघट में सम्मान बिक रहा,
घूंघट अब बाजार बन रहा,
घूंघट अब व्यापार बन रहा।
घूंघट कवियों की वाणी मै,
घूंघट कविताओं की लेखनी मै,
घूंघट बड़े बूढ़ों का मान,
घूंघट राजपूतो की शान,
मर्यादा और सम्मान का भाव।
परिचय : किरण विजय पोरवाल
पति : विजय पोरवाल
निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स
व्यवसाय : बिजनेस वूम...

