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पितृ पक्ष का वास्तविक अर्थ: केवल अनुष्ठान नहीं, कृतज्ञता और संस्कारों का पर्व
आलेख

पितृ पक्ष का वास्तविक अर्थ: केवल अनुष्ठान नहीं, कृतज्ञता और संस्कारों का पर्व

डॉ. प्रीति तिवारी "नमन" गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) ******************** भारतीय संस्कृति में पितृ पक्ष को अक्सर केवल अनुष्ठान, मृत्यु और श्राद्ध से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन यदि इसके गूढ़ अर्थ को समझें, तो इसे केवल मृत्यु तक सीमित रखना इसके व्यापक भाव को छोटा करने जैसा होगा। पितृ पक्ष वास्तव में जड़ों से जुड़ने, पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके द्वारा दिए गए संस्कारों को अपने जीवन में पुनर्जीवित करने का एक पावन अवसर है। १. हमारी कहानी हमसे शुरू नहीं हुई पितृ पक्ष हमें यह याद दिलाता है कि हमारा अस्तित्व अचानक या अकेले ही निर्मित नहीं हुआ है। हमारी कहानी हमसे शुरू नहीं हुई; हमसे पहले भी कई पीढ़ियाँ थीं। * उन्होंने अपने जीवन में अनगिनत संघर्ष किए। * कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए परिवार बनाए और उन्हें सहेजा। * अपने बच्चों (हमारे माता-पिता और हमारे)...