नंदलाल से होली खेलें ग्वाल-बाल प्यारे
डॉ. भावना सावलिया
हरमडिया, राजकोट (गुजरात)
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नंदलाल से होली खेलें ग्वाल-बाल प्यारे।
सबके तन-मन अति पुलकित हैं, झूम रहे सारे।
रंग श्याम का चढ़ जाता है, होता उजियारा।
जीवन में बहने लगती है, दिव्य अमृत धारा।
माधव-राधा के दर्शन ये, जीवन को तारे।
नंदलाल से होली खेलें, ग्वाल-बाल प्यारे।
बाल-वृद्ध सब होली खेलें, राधा सखियों से,
प्रीत भरी पिचकारी मारे, मोहन अँखियों से,
होली का हुड़दंग मचा है, ज्यों द्वारे द्वारे।
नंदलाल से होली खेलें, ग्वाल-बाल प्यारे।
श्याम रंग की पिचकारी से, राधा शरमाईं,
भीग गई चोली, चूनर सब, सखियाँ हरषाईं।
मुरलीधर का प्रेम पड़ गया, राधा को भारे
नंदलाल से होली खेलें ग्वाल-बाल प्यारे।
गोपी-ग्वाले मिलकर खेलें, गोकुल में होली,
राधा गोरी वो मतवाली, खेले हमजोली,
मटक रहे राधा मोहन के, नयना कजरारे।
नंदलाल से होली खेलें ग्वाल-बाल प्यारे।
गि...


