अन्नदाता
डॉ. भावना सावलिया
हरमडिया, राजकोट (गुजरात)
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(विष्णुपद छ्न्द)
जीवनांत तक अवनी पर का, श्रेष्ठ अन्नदाता ।
कठिन परिश्रम करते सबके, हो जीवन दाता।
लहराता यह खेत तुम्हारा, जीवन दर्पण है।
फसल खुशी से जो समाज को, की येअर्पण है।।
सहचर आठों पहर प्रकृति का, बनकर रहते हो।
तुम आँधी तूफ़ान झेलकर, संकट हरते हो।।
परहित जीवन मंत्र तुम्हारा, सुख बरसाते हो।
ठंड-धूप बारिश को सहकर, अन्न उगाते हो।।
माथे पर की धूल कृषक की, पावन चंदन सी।
धूल-स्वेद से सनी महकती, काया कंचन-सी।
निर्मल मन से भक्ति-भाव है, ईश्वर को अर्पित।
कर्म किया निस्वार्थ भाव का, करते आप समर्पित।।
सुख का कर बलिदान किया जगती का पालन है।
कर्म तुम्हारा संन्यासी से ,बढ़कर पावन है।।
भूमिपुत्र का साधु-तपस्वी से उत्तम तप है।
करते आठों पहर कर्म हैं, जो प्रभु का जप है।।
जियो और जीने दो का है, संस्कार ...


