क्योंकि माँ साक्षात ही भगवान है
डॉ. भावना सावलिया
हरमडिया, राजकोट (गुजरात)
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(पीयूष वर्ष छ्न्द)
२१२२ २१२२ २१२
पास जिसके माँ वही धनवान है।
क्योंकि माँ साक्षात ही भगवान है।।
सृष्टि में माँ का सृजन अनमोल है।
कष्ट हर लेता जननि का बोल है।
सर्व सुख माँ के लिए संतान है।
क्योंकि माँ साक्षात ही भगवान है।।
गोद में संसार भर का सुख मिला।
स्नेह सिंचन से कली-सा मन खिला।।
नित्य तन-मन से करें फिर सम्मान है।
क्योंकि माँ साक्षात ही भगवान है।।
इस जगत की राह में सब शूल हैं।
एक माँ की गोद में बस फ़ूल हैं।
माँ खिलाती हाथ से पकवान है।
क्योंकि माँ साक्षात ही भगवान है।।
शीश चरणों में झुकाया है जिसे।
कष्ट जीवन में कहाँ फिर है इसे।
तीर्थ का पावन वही गृह स्थान है।
क्योंकि माँ साक्षात ही भगवान है।।
सर्व सुख संपत्ति की माँ नाव है।
ग्रीष्म की दोपहर में वह छाँव है।
माँ हमेशा चाहती उत्थान है।
क्योंक...


