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Tag: परमानंद निषाद

मां
कविता

मां

परमानंद निषाद छत्तीसगढ, जिला बलौदा बाज़ार ******************** ममता की मूरत है मां। भगवान की सूरत है मां। तेरी आंचल में सारा जहां है। मेरी प्यारी और न्यारी मां। खुशियों का भंडार है मां। तेरे बिना जीवन बेकार है मां। मां की ममता है महान। कैसे करूं तेरा गुणगान मां। तुम ही दुर्गा,तुम ही काली। तु चमकती आसमां की लाली। दया,त्याग की मूरत है मां। प्रेम की तु पूरक है मां। भगवान का दिया हुआ। अनमोल उपहार है मां। मां के कदमों में स्वर्ग बसा। मां से मिलता जीवन हमको। इस जग में मां का स्थान। सबसे प्यारी व ऊँचा होती है। घर में मां भी बहु कहलाती है। सौंदर्य से सारे जहां को जीत लाती है। मां को नाराज करना हमारी भूल है। मां के कदमों की मिट्टी जन्नत की धूल है। परिचय :-परमानंद निषाद निवासी - छत्तीसगढ, जिला - बलौदा बाज़ार आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो...
सरस्वती वंदना
भजन

सरस्वती वंदना

परमानंद निषाद छत्तीसगढ, जिला बलौदा बाज़ार ******************** हे हंस वाहिनी, ज्ञान दायिनी। ज्ञान का प्रकाश दो,ज्ञान का प्रकाश दो। तुम स्वर की देवी है तुझसे संगीत, हर शब्द तेरा है तुझसे गीत। विद्या तुम देने वाली, ज्ञान का प्रकाश भरो। मोह, माया और अज्ञान का, संसार से उसका अंत करो। सिर झूंका कर मांगू मां, मेरा सपना स्वीकार करो। तेरे चरणों में आया हूं, करदो मेरा उद्धार मां। श्वेत हंस की करे सवारी, और श्वेत वस्त्र धारण किये। मां शारदे श्वेत हंस में बैठे, कंद पर रखे अपना चरण। मांग रहा हूं तुझको मां, मैं विद्या का वरदान। मैं तेरे शरण मे आया हूं मां, दो मुझे विद्या का वरदान। . परिचय :-परमानंद निषाद निवासी - छत्तीसगढ, जिला - बलौदा बाज़ार आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, हिंदी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहान...
नया साल
कविता

नया साल

परमानंद निषाद छत्तीसगढ, जिला बलौदा बाज़ार ******************** उगते हुए सूरज का निकलना नया साल है। उदय होते सूरज का ढल जाना नया साल है। किसी भूखे को खाना खिलाना नया साल है। किसी प्यासे को पानी पिलाना नया साल है। सपनों को सच कर दिखाना नया साल है। भ्रष्टाचार को मिटाना नया साल है। रोगी की सेवा करना नया साल है। अनपढ़ को शिक्षा देना नया साल है। बेरोजगार को रोजगार देना नया साल है। पर्यावरण को स्वच्छ बनाना नया साल है। शादी मे दहेज ना लेना नया साल है। कन्या हत्या ना करना नया साल है। बेटा-बेटी मे भेद ना करना नया साल है। किसी बेसहारा को सहारा देना नया साल है। गिरते हुए को थामना नया साल है। फूल का डाली से मुरझा कर गिर जाना नया साल है। बीते हुए बुरे पलों को भूलाकर आगे बढ़ना नया साल है। कामयाबी की शिखर पर पहुंचकर नई ऊंचाईयों को छुना नया साल है। बुढ़े मां-बाप का सहारा बनकर उन्हे गले लगाना नया साल ...