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हिंदी में संस्कृति मुस्काती है
कविता

हिंदी में संस्कृति मुस्काती है

याशिका दुबे इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना हिंदी केवल शब्दों की रचना नहीं, यह सभ्यता की साँसों का प्रमाण है। ऋषियों की वाणी से जन-जन के मन तक पहुँचा संवाद है। यह वेदों की गंभीरता भी है, और लोकगीतों की मधुर तान। यह तुलसी की मर्यादा, और कबीर का निर्भीक ज्ञान। हिंदी में संस्कार पलते हैं, हिंदी में संस्कृति मुस्काती है सरल होकर भी कालजयी, हिंदी विश्व में भारत की पहचान बन जाती है। परिचय : याशिका दुबे निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आपको प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना, कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें...