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Tag: राकेश कुमार तगाला

क्षितिज मिलेगा
कहानी

क्षितिज मिलेगा

राकेश कुमार तगाला पानीपत (हरियाणा) ********************  प्रियंका, क्या मैं अंदर आ सकती हूँ, सर। प्लीज कम इन, हैव आ सीट। थैंक्स, सर। कैन आई हेल्प यू। सर, मेरा नाम प्रियंका है। पिछले सप्ताह ही आपसे जॉब के लिए बात हुई थी। ओह, यस प्रियंका, आप हमीरपुर से हैं। यस सर, आप कल ९:०० बजे से आ सकती हो, थैंक सर। मन में नई उमंग के साथ ही घर फोन मिला दिया। मम्मी मुझें जॉब मिल गई हैं, हमीरपुर में। मम्मी : प्रियंका-मुझें तो पहले ही पता था कि तुम्हें जॉब जल्दी ही मिल जाएगी। तुम बहुत काबिल हो, काबिल लोगों के मार्ग में रोड़े आ सकते हैं, बाधाए आ सकती। पर उन्हें मंज़िल अवश्य मिल जाती है। चाहे देर से ही सही,इतना कहते-कहते माँ चुप हो गई। प्रियंका : माँ- चुप क्यों हो गई? मन में कुछ हो तो, कहो ना। मन का दर्द कहने से हल्का हो जाता है। फिर मैं तो तुम्हारी बहादुर बेटी हूँ ना। कल अनिल का फोन आया था। वह कह रहा था कि उसे अ...
सच्चा साथी
लघुकथा

सच्चा साथी

राकेश कुमार तगाला पानीपत (हरियाणा) ******************** "छोड़ेंगे ना हम तेरा साथ, ओ साथी मरते दम तक। रेडियो पर यह गीत सुनकर उमेश एकदम चौक गया। साथी मरते दम तक, खुद भी गुनगुनाने लगा। रीटा की आवाज सुनकर, वह थोड़ा हिचक गया और चुप हो गया। नहीं-नहीं गा लो गीत अच्छा है। आखिर मुझें आज भरोसा तो हुआ कि तुम मरते दम तक मेरा साथ नहीं छोड़ोगे, पर वह चुप था। ऑफिस पहुँचते ही, नमस्ते करने वालों की होड़ सी लग गई। लगती भी क्यूँ ना, वह अपने ऑफिस में उच्च पद पर आसीन जो था? वह अपनी कुर्सी पर लगभग पसर सा गया। उसे ऐसा लग रहा था, कुछ गीत हमारी जिंदगी में कितना ऊँचा स्थान रखते हैं। कुछ गीत हमारे लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं, कुछ सिर्फ सुख-दुख व्यक्त करने का जरिया मात्र। रीटा आज मन ही मन चहक रही थी कि उमेश ने उसका महत्व समझा तो सही, चाहे उसने अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए एक गीत का ही सहारा लिया हो। पर क्या फर्क पड...
नई पहल
लघुकथा

नई पहल

राकेश कुमार तगाला पानीपत (हरियाणा) ******************** आशा : माँ जी- आपको और पिताजी को तो मेरे काम में कोई ना कोई कमी हमेशा नजर आती है। आखिर क्या गलती है मेरी, जो आप हमेशा नाराज रहते हो? कभी तो मेरा उत्साह बढ़ाया करो। आपसे तो किसी तरह की उम्मीद रखना अपने आप को धोखा देने जैसा है।रोज-रोज की कहासुनी से, राजेश भी बहुत परेशान था। पत्नी की सुनता तो, जोरू का गुलाम कहलाता और माँ की सुनता तो, पत्नी कहती माँ के पल्लू से बंधे रहना जीवन भर। कभी मन में आता छोड़कर भाग जाऊं सब कुछ। ये खुद ही काम-धाम संभाल लेंगे। शादी से पहले सब कुछ ठीक चल रहा था। माँ कहती थी मेरी बहूँ आएगी तो मैं उसे बहूँ नहीं बेटी की तरह रखूंगी। सास को बहूँ को बेटी ही मानना चाहिए। उस समय मैं सोचा करता था, मेरे घर में आने वाली लड़की बड़ी ही भाग्यवान होगी। जो उसे ऐसा परिवार मिलेंगा।आशा का स्वभाव थोड़ा सा तुनक-मिजाज था। वह छोटी-छोटी बातों प...
गूढ़ रहस्य
लघुकथा

गूढ़ रहस्य

राकेश कुमार तगाला पानीपत (हरियाणा) ******************** पापा आप हर बात में अपनी सलाह क्यों देते रहते हैं? आपका अपना ही अलाप बजता रहता है। तभी दूसरा बेटा भी आ गया। पापा हर मामले में अपनी टाँग अड़ाना जरूरी है। शर्मा जी, चुपचाप दोनों बेटों की बातें सुन रहे थे, जो उन्हें किसी शूल की भाँति चुभ गई थी। यह कोई पहली बार नहीं हो रहा था। अब तो हर रोज का यही काम था। सुबह से ही घर में कलह शुरू हो जाता था। शर्मा जी ने बड़े जतन से घर की एक-एक चीज जोड़ी थी। वह किस तरह उन्हें बर्बाद होते देख सकते थे। बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए उन्होंने अपनी सारी जमा-पूँजी खर्च कर दी थी। पत्नी के साथ मिलकर उन्होंने अपनी सारी जिम्मेदारियों का निर्वाह समय पर पूरा किया था। पर उनसे कहीं ना कहीं भारी चूक हो गई थी। जो आज अपने ही परिवार में उन्हें उपेक्षा झेलनी पड़ रही थी। रोज की तरह, वह सुबह पार्क की तरफ चल पड़े। गेट पर ह...
मिस सीमा
कहानी

मिस सीमा

राकेश कुमार तगाला पानीपत (हरियाणा) ********************                                          प्रदीप, तुम क्या समझते हो? मैं सीमा की चाल नहीं समझ रही हूँ। आखिर बात क्या हैं नीना दीदी? खुलकर कहो जो कहना चाहती हो।पहेलियाँ क्यों बुझा रही हो? नहीं प्रदीप ये कोई पहेली नहीं है। ये पूरी तरह सत्य हैं। तुम्हारी मिस सीमा, आजकल मेरे लाड़ले अवि पर डोरे डाल रही हैं। ये आप क्या कह रहीं हो दीदी? क्या सबूत हैं तुम्हारे पास? तुम्हें भी सबूत चाहिए, जबकि तुम मिस सीमा के व्यक्तित्व के बारे में अच्छी तरह जानते हो। हाँ, जानता हूँ वह एक स्मार्ट औरत हैं, बेहद चालाक। वह अपनी नाक पर मक्खी तक नहीं बैठने देती। पर आजकल उसकी हालात ठीक नहीं है। वह कर्ज में डूबी हुई हैं। यही तो मैं तुम्हें बताने का प्रयास कर रही हूँ। वह हमारे अवि,पर अपने रूप का जादू बिखेर रही हैं। वह अच्छी तरह जानती है कि वह करोड़ो का मालिक है। वह इसी क...
यादों की गठरी
लघुकथा

यादों की गठरी

राकेश कुमार तगाला पानीपत (हरियाणा) ********************                मां, बेटे को मिल रही सफलता पर फूली नही समा रही थी। उसका मन बेटे को दुआएँ दे रहा था। वह बेटे को चूम लेना चाहती थी। पर सम्भव नही था। वह माँ से कोसो दूर बैठा था। कितने साल हो गए थे। उसे गाँव से गए। माँ के चेहरे की झुर्रियाँ लगातार बढ़ती ही जा रही थीं। आँखों की ज्योति भी धीमी पड़ रही थी। पर माँ का उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा था। वह जब भी उदास होती। अतीत की यादों में खो जाती।उसे आज भी याद हैं जब गाँव के स्कूल मास्टर ने साफ कह दिया था। तेरा लला पढ़ नही सकता, इसका दिमाग बहुत कम है। क्यों अपने पैसे खराब कर रही हो? तुमने क्या सोच कर इसका नाम ज्ञान रखा है। ये तो पूरी तरह अज्ञानी है। कितना मन दुःखा था उस दिन। उसने बहुत मिन्नतें की थी, मास्टर सहाब से। आपका ही बच्चा है, दया कीजिए। शुरू-शुरू में तो वह बिल्कुल नहीं माने थे। ज्ञान स...
सावित्री महल
कहानी

सावित्री महल

राकेश कुमार तगाला पानीपत (हरियाणा) ******************** सात साल से वह उसकी बाट जोह रही थी। अब तो उसकी आँखो से आँसू भी आने बन्द हो गए थे। बस उदासी ही उसके साथ रह गई थी। वह आस-पड़ोस में भी बहुत कम जाती थी। उसकी हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही थी। अपने गुजारे लायक थोड़ा बहुत कमा लेती थी। घर में नाममात्र का सामान रह गया था। सब कुछ धीरे-धीरे बिक चुका था। पर पति महेश का कुछ भी पता नहीं चल सका था। घर पूरी तरह खँडहर में बदलता जा रहा था। यह वही घर था जिसमें वह हजारों सपनें लेकर आई थी। महेश ने भी उसका साथ निभाने की कसमें खाई थी।कितने खुश थे वो दोनों अपनी छोटी सी गृहस्थी में? उसके अधिक सपनें नहीं थे। वह तो सिर्फ पति का साथ चाहती थी। वह आज भी उस मनहूस दिन को कोसती थी। जब उसने मजाक ही महेश से महल बनवाने की बात कह दी थी। उसने यही कहा था कि तुम मुझें कितना प्यार करते हों? बहुत प्यार, तुम बताओ। तुम्हें म...
चमकदार
लघुकथा

चमकदार

राकेश कुमार तगाला पानीपत (हरियाणा) ******************** घर का माहौल काफी गमगीन था। सभी नीमी को बार-बार समझा रहे थे कि वो अपना निर्णय बदल दे। पर वह मानने को तैयार नहीं थी।परिवार के सभी लोग हार चुके थे। वह अपने फैसले पर अडिग थी। माँ कह रही थी, पता नहीं सोनू ने मेरी बेटी को क्या घोल कर पिला दिया है? अब सिर्फ पापा ही कुछ कर सकते हैं, यह उनकी बात कभी नहीं टाल सकती। पापा इसे सबसे ज्यादा लाड़ करते हैं। अगर इसने सोनू से शादी कर ली तो पूरे परिवार की नाक कट जाएगी। पापा सारी घटना को जान कर भी कैसे अनजान रह सकते हैं, भाई चिल्ला उठा? मम्मी मैं पापा से खुलकर बात करूँगा, आखिर उनके मन में क्या चल रहा है? उन्हें पूरा हक है कि वह नीमी को रोक दे। वरना अनर्थ हो जाएगा। क्या हमारी बिरादरी में अच्छे लड़के खत्म हो गए हैं? क्या सोनू ही अकेला कामयाब लड़का रह गया है? मुझें समझ नहीं आता, यह लड़की मान क्यों नहीं रही है? न...
सहारा
लघुकथा

सहारा

राकेश कुमार तगाला पानीपत (हरियाणा) ******************** माँ, आज पंचतन्त्र में विलीन हो गई थी। वह एक नई यात्रा पर निकल चुकी थी। उस यात्रा पर हर व्यक्ति अकेले ही तो जाता हैं। माँ भी चली गई थी। हमारा सम्बन्ध तो इस लोक तक ही रहता हैं। जब माँ थी, तो मैं हर छोटो-बड़ी बात के लिए उनके पास बैठ जाता था। उनका स्नेह भरा स्पर्श मेरी हर समस्या का हल तुरन्त कर देता था। उनका स्पर्श किसी आशीर्वाद से कम नहीं था मेरे लिए। पर अब मेरा क्या होगा, सोचने मात्र से ही मेरे पूरे शरीर में सिरहन सी दौड़ पड़ती है? मैं निराशा के समुन्द्र में गोते खानें लग जाता हूँ। माँ के आशीर्वाद से मेरे पास सबकुछ है। अच्छा कारोबार, बंगला, बैंक-बैलेंस और नौकर-चक्कर। पर माँ का सहारा नहीं हैं। जब भी मुझें अपने कारोबार में किसी तरह की दिक्कत आती थी। तब माँ का सकारात्मक रवैया मुझमें नई ऊर्जा भर देता था। बस एक ही शिक्षा देती थी। बेटा कभी किसी ...
खाली स्थान
लघुकथा

खाली स्थान

राकेश कुमार तगाला पानीपत (हरियाणा) ******************** गंगा की याद आते ही मन पूरी तरह उचट जाता था। सभी कुछ था मेरे पास। आज तक मैं जीवन में दौड़ ही रहा था। कभी डिग्री पाने के लिए, कभी नौकरी पाने के लिए। मैं तो अपने घर में ही खुश था। अपने गाँव में, अपने खेतों में, बाप-दादा की तरह। मैं भी खेती करना चाहता था। मुझें बचपन से ही खेत-खलिहान अपनी तरफ खीचते थे, लहलहाती फसलें, माटी की भीनी-भीनी सुगंध। ऐसा सादा जीवन ही मुझें पसन्द था। पर उसकी जिद के आगे मै नतमस्तक हो गया था। वही चाहती थी कि मै पढ़-लिख कर बड़ा आदमी बनू। जब भी पीछे मुड़कर उसका बलिदान देखता हूँ, परेशान हो उठता हूँ। हमेशा मेरे पीछे लगी रहती थीं। जब भी मै विदेश जाने की बात पर टाल मटोल करता। उसका प्यार भरा स्पर्श, अपनेपन का अहसास मुझें अन्दर तक सहला जाता। उसके इस प्यार भरे अहसास ने ही मुझें विदेश जाकर डॉक्टरी करने को मजबूर कर दिया था। उसी का प...