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Tag: शिमला शर्मा “लक्ष्मी प्रिया”

शिवशक्ति
गीत

शिवशक्ति

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** शमीशान शिव विश्वनिर्वाण कारी। शरण में तुम्हारे सभी जीवधारी।। मिटा दो सभी कष्ट महका दो बगिया। त्रिशूलं कराग्रे त्रयी तापहारी।। महाकाल उज्जैन में तुम विराजे। लिए हाथ डमरू गले सर्प साजे। कहे सब सदा काल भी तुमसे हारे। चढ़े अंग में भस्म तड़के तुम्हारे। वरे वाम अंगे प्रिये गौर माता। गुणातीत गणनाथ हे निर्विकारी। शमीशान शिव विश्वनिर्वाण कारी।। किया देव दानव जलधि का बिलोना। तभी जहर का कुंभ निकला कहोना। लगे देव दानव सभी फड़फड़ाने। पिया था हलाहल सभी को बचाने। नमन नीलकंठे जटा गंगधारी। निराकार निर्गुण तपस्वी अकारी। शमीशान शिव विश्वनिर्वाण कारी।। बहुत कष्ट संसार में तेरे देखा। तड़पते हृदय का कभी लेना लेखा। रहे खुश हमेशा चुभें दिल में भाले। दिखाऍं हृदय के बता किसको छाले। करों पार भव से ये नैया...
भारत मॉं के वीर सपूत
धनाक्षरी

भारत मॉं के वीर सपूत

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** दिवस ये प्रेम का था, समूह जवानों का था पुलवामा से वो चले, खुशी- खुशी मान से। खुद को कहे जो पाक, हरकत की नापाक, ऐसा क्रूर कृत्य किया, खेल गया जान से। दम है तो आकर के वार करे सामने से, पीठ पर वार करे, कायर जहान से। वीर वो शहीद हुए, भारत की आन हुए, कोटिश: नमन हम, करते हैं शान से। परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश) रुचि : गद्य/पद्म लेखन एवं गायन घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आपको प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना, कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रका...
कन्हैया तुम्हारा सहारा न होता : सनातनी गज़ल
ग़ज़ल

कन्हैया तुम्हारा सहारा न होता : सनातनी गज़ल

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** सनातनी गज़ल कन्हैया तुम्हारा सहारा न होता। तो दुनिया में कोई हमारा न होता। जो पकड़ा न होता मेरा हाथ तुमने, तो ग़म की नदी का किनारा न होता। न होते लता, पुष्प, पर्वत ये झरने। तो जग में ये अनुपम नज़ारा न होता। दिया ज्ञान गीता का तुमने जहां को, बिना कर्म जग में गुज़ारा न होता। भरा स्वार्थ सारे ज़माने में दिखता बिना काम कोई भी प्यारा न होता। बनाते नहीं प्रेम की रीत जग में, तो इंसा किसी से भी हारा न होता। "प्रिया" मोह माया में सोई हुई थी, न जगती जो तुमने पुकारा न होता। परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश) रुचि : गद्य/पद्म लेखन एवं गायन घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक ...
हरिगीतिका छंद
गीतिका, छंद

हरिगीतिका छंद

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** हरिगीतिका छंद गीतिका छंद मापनी - २२१२ २२१२, २२१२ २२१२ ब्रह्मा सुता मॉं शारदे मम, स्वर सुवासित कीजिए। हिय भाव -पंकज हों सदा मन, प्राण भाषित कीजिए।। संचार आशा का करो हो, दूर पीड़ा अंक से। शुचि शिष्टता ही शीर्ष पर हों, दुष्ट दुर्जन रंक से।। शब्दावली हो भाव भूषित, लेखनी में बास हो। रचती रहूॅं नित छंद नूतन, मातु उर आवास हो। द्युतिमान दे संज्ञान दे हम, मान के पालक बनें। आए शरण में मॉं भवानी, ज्ञान के याचक बनें।। पुष्पित सुमन अलि डोलते हैं, सुभग पीले रंग में। आई धरा मॉं शारदे शुचि, भारती की गंग में।। विनती करूँ कर जोड़ कर माँ, शब्द का शृंगार दे। तेजस्विनी आभामयी मॉं, नित प्रभा संसार दे।। पावन हृदय कमलासिनी मन, भाव निर्मल कीजिए। आनंद हिय बरसे सदा मॉं, वेदना हर लीजिए।। तेजस्विनी, राजेश्वरी माँ,...
भारत की हिय वासिनी – प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त रचना
छंद, दोहा

भारत की हिय वासिनी – प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त रचना

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त रचना भारत की हिय वासिनी, हिन्दुस्तान की शान। हिन्दी के आँचल तले, अर्जित उत्तम ज्ञान।। अक्षर -अक्षर कर रहा, सतत राष्ट्र उत्थान। हिन्दी माता हिन्द की, भारत का अभिमान।। हिन्दी में साहित्य है, माँ का गौरव भाल। छन्द गीत देते सदा, सुभग सुधा शुचि चाल।। अलग -अलग भाषा करें, हिन्दी से मृदु योग। एक सूत्र में बाँधती, भिन्न प्रान्त के लोग।। भाते मन को हैं सदा, हिंदी कविता गीत। सरस प्यार के बोल से, लेती मन को जीत।। पूर्ण राष्ट्रभाषा बने, मिलकर लो संज्ञान। हिन्दी के उत्थान का, लक्ष्य सभी लो ठान।। परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश) रुचि : गद्य/पद्म लेखन एवं गाय...
दिव्य दिवाकर
छंद

दिव्य दिवाकर

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** (मदिरा सवैया छंद) दिव्य दिवाकर मंद हुए, यह ठंड भयंकर रूप धरे। शीत हवा कुहरा बिखरा, अब पीत परे सब पात हरे। तुंग हिमालय श्वेत हुए, हिम सागर शीत बिहार झरे। शीत प्रभाव सु-प्रीति फले, मन यौवन अंग उमंग भरे। परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश) रुचि : गद्य/पद्म लेखन एवं गायन घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना लिंक को टच कर पढ़ने का कष्ट कर प्रोत्साहित करेंगे एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करेंगे ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, ...