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स्पर्श (घनाक्षरी)
कविता, धनाक्षरी

स्पर्श (घनाक्षरी)

विजय गुप्ता "मुन्ना" दुर्ग (छत्तीसगढ़) ******************** नजर तो नजर है, खबर असर खूब, सोचिए तो फर्श भी, स्पर्श से विलय धरे। फेर होवे नजर का, तो नूर की नजर से, नजर दशा दर्श को, स्पर्श मन से करे। शब्द क्षुब्ध क्रुद्ध कभी, तो नेम धेम क्षेम के, सार क्षार निहार से, बुद्ध का स्पर्श करे। नाप का प्रताप भाव, माप दंड अति गूढ़, भाव मिले पुष्प खिले, भाव ही स्पर्श भरे। शब्द मर्म भाव धर्म, शब्द गुने बने लब्ध, कमजोर ज्ञान गर, स्पर्श बिन वो गिरे। निज मम्मा ममत्व में, पिता भाव घनत्व का, शब्द अर्थ स्पर्श सत्य, श्री राम कृष्ण हरे। शिव कृत्य नृत्य नाद, आदि ध्वनि डम डम, शब्द संसार गूंज से, ऊर्जा शांति छाई है। शब्द स्पर्श अर्थ व्यर्थ, खेल सदा डग मग, मेरी बात तेरी बात, स्पर्श मात खाई है। गाय निहित दक्षता, रख दूध में शुद्धता, नकली वस्तु त्याग से, गाय स्पर्श जान लो। धन कमाऊ स्पर्श तो,...