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बेटे की भावना

संध्या नेमा
बालाघाट (मध्य प्रदेश)
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बेटा भी कितना जहर पी लेते हैं,
अपनों के लिए
पहचान और सम्मान तो मिल जाता है
प्यार के लिए तरस जाते हैं बेटे
कहते हैं ना जो पास होता है
उसकी कद्र नहीं होती है

बेटी दूर रहती भी
दिल के पास रहती है
बेटा सामने होने के बाद भी
दिल में नहीं उतरता है

बेटा जीवन भर खिलाता है
तो नाम नहीं होता
बेटी ४ दिन क्या खिला देती है
जीवन भर उसका गुणगान होता

पराए घर चले जाती है
४ दिन फोन लगा कर पूछ लेती
बस वही याद रहता
बेटा रात-रात जग सेवा करता
वह कुछ याद नहीं रहता

माना शब्द कठोर होते हैं बेटा के
बेटी की मीठी चार बातें से
क्या जीवन चल जाता है
धन मिलने की आस रहती है बेटी
बेटा बिना आश के सेवा करता है
ना मिले भी तो चुपचाप रहता है

चार कठोर बात भी
सुन लेता है बेटा
चाहे बीवी बच्चे वाला भी होता
बेटी नहीं सुन सकती
मायके की दो चार कठोर बातें

कितना सुनता फिर भी वो करता
बेटा को ४ लोगों के सामने
सुना देते उल्टा सीधा
मन में रखता बात
इधर उधर नहीं बताता है
बेटा दिन से रात कर देता
अपने मां-बाप के लिए

बाद में नालायक वही कहलाता
दूर के ढोल सुहाने लगते हैं
बस यही किस्सा बेटे के साथ होता
बेटा हमेशा ऐसा होता है

परिचय : संध्या नेमा
निवासी : बालाघाट (मध्य प्रदेश)
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करती हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।


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