
प्रमेशदीप मानिकपुरी
भोथीडीह, धमतरी (छतीसगढ़)
********************जिंदगी की हकीकत दिखाती हैं आईना।
पल-पल बदलती जीवन सिखलाती आईना।।आईना के प्रतिबिम्ब से बदलती हैं जिंदगी।
आईना सा पाक,निष्पक्ष हो हमारी जिंदगीII
हकीकत से वास्ता कराती है आईना- २
जिंदगी की…………………..आईना II१IIआईना वही रहता है, चेहरे बदलते है I
समय की हर जख्म दिखाती है आईना II
कभी हंसाती, तो कभी रुलाती है आईना- २
जिंदगी की…………………..आईना।।२।।हकीकत का अक्स दिखती है आईना ।
बदलते परिवेश मे बदलना सीखाती है आईना।।
ये सच है, झूठ नही बोलता आईना- २
जिंदगी की ……………….आईना ।।३।।मानव को मानवता का बोध कराती है आईना।
कर्तव्य परायणता का बोध कराती है आईना।।
मानव मे देवत्व जागाती है आईना- २
जिंदगी की …………….आईना ।।४।।
पिता : श्री लीलूदास मानिकपुरी
जन्म : २५/११/१९७८
निवासी : आमाचानी पोस्ट- भोथीडीह जिला- धमतरी (छतीसगढ़)
संप्रति : शिक्षक
शिक्षा : बी.एस.सी.(बायो),एम ए अंग्रेजी, डी.एल.एड. कम्प्यूटर में पी.जी.डिप्लोमा
रूचि : काव्य लेखन, आलेख लेखन, विभिन्न कार्यक्रम में मंच संचालन, अध्ययन अध्यापन
कार्य स्थल : शासकीय माध्यमिक शाला सांकरा
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