
मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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दीन दुखियों का सदा कल्याण होना चाहिए।
भूख की तो आग धधके त्राण होना चाहिए।।
भोर की कहती किरण है पीर हिय अविराम है।
ये अधर भी सूखते मुस्कान का क्या काम है।।
अब व्यथा किससे कहें निर्वाण होना चाहिए।
दीन दुखियों का सदा कल्याण होना चाहिए।।
घाव पर मरहम लगाता है यहाँ कोई नहीं।
हैं विकल संस्कार भी सब रक्त की नदिया बहीं।।
काल को भी अब नहीं पाषाण होना चाहिए।
दीन दुखियों का सदा कल्याण होना चाहिए।।
रोशनी बंधक बनी अब है अमावस रात भी।
हिल रहीं बुनियाद सब है नीर की सौगात भी।।
फट रहे ज्वालामुखी निर्माण होना चाहिए।
दीन दुखियों का सदा कल्याण होना चाहिए।।
स्वप्न घायल हो गए सब चूर दर्पण आज है।
ढेर लाशों का लगा है रावणों का राज है।।
भेदियों को मारने भी वाण होना चाहिए।
दीन दुखियों का सदा कल्याण होना चाहिए।।
परिचय :- मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित्रा पाठक
पिता : स्व. हरि मोहन पाठक
पुत्र : सौरभ भट्ट
पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट
पौत्री : निहिरा, नैनिका
सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सतर्कता समिति जबलपुर की भूतपूर्व चेयरपर्सन।
प्रकाशित पुस्तक : पंचतंत्र में नारी, काव्यमेध, आहुति, सवैया संग्रह, पंख पसारे पंछी
सम्मान : विक्रमशिला हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा, विद्या सागर और साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा, विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि, गुंजन कला सदन द्वारा, महिला रत्न अलंकरण तथा कई अन्य साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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