
शांता पारेख
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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वीगन का बड़ा प्रचार प्रसार है, कई बड़ी बड़ी हस्तियां वीगन भोजन कर रही है सन २००४ में जब अमेरिका गई तो एक वीगन परिवार में रुके। उन्होंने जो वीगन खाना खिलाया हमे तो कुछ फर्क लगा ही नही, टोफू की आइसक्रीम तो दो बार लेकर खाई उन्होंने बाद में बताया, भारतीय परिवार था। उन्होंने तो चार सौ लोगों की पार्टी भी की। अब तो भारत मे सड़को पर भी लिखा दिखने लगा है। जेनेलिया व देशमुख खुद तो वीगन है ही उनके बच्चों को बना दिया है। ये पौधों से पैदा हुआ खाना ही खाते है पशु उत्पादन नही अर्थात घी, दूध, दही, पनीर, बटर कुछ भी नही। इनका मानना है कि इस भोजन में धरती सब देती है। सारे मेडिकल टेस्ट बच्चों के भी कराए तो अच्छे परिणाम थे।हमारे विराट कोहली भी वीगन है, क्या धुंआधार बल्ले बाज़ी कर रहे। यानी कि मांसाहार व घी पुष्ट होंने की गारंटी नही है। ये लोग सारी मिठाई तेल में बनाते है। जानकर चिंता हो गई कि बाबा रामदेव व महानायक के गोवर्धन घी का क्या होगा। भोजन संबंधी कितनी जानकारियां रोज आ रही है। कुछ फैशन से चलता है। अभी मिलेट श्री अन्न की बड़ी महिमा चल रही है। इतनी बड़ी हस्तियां नही खा रही तो, कुछ तो अध्ययन किया ही होगा। विदेश में बहुत बड़ा समुदाय वीगन है। कुत्ते तो घी खाते ही नही, हर गाड़ी के पीछे मीलों भाग सकते है। है तो आकर्षक जानकारी देखो कितना प्रतिसाद मिलता है। भारतीय भोजन का तो बहुत बड़ा भाग दूध को ही समर्पित है।
परिचय : शांता पारेख
निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
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