
आशीष तिवारी “निर्मल”
रीवा मध्यप्रदेश
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विद्यार्थी बिना शिक्षा न हो
भिखारी बिना भिक्षा न हो।
कोई युवा बेरोजगार न हो
पल-पल होते भ्रष्टाचार न हो।
नारी पर कोई अत्याचार न हो
जिससे वो असहाय लाचार न हो।
मंहगाई की बिल्कुल मार न हो
जिसका कोई जिम्मेदार न हो।
बिजली बिल अतिभार न हो
किसान बेचारा लचार न हो।
कोई भी घर बिना टीन न हो
संपेरा बिना बीन न हो।
डाक्टर बिना आला न हो
माली बिना माला न हो।
घर बिना ताला न हो
दामाद बिना साला न हो।
मुर्गी बिना अंडा न हो
टीचर बिना डंडा न हो।
मछली बिना पानी न हो
राजा बिना रानी न हो।
भोजन बिना तेल न हो
यात्री बिना रेल न हो ।
आटा बिना चोकर न हो
सर्कस बिना जोकर न हो।
सब्जी बिना नमक न हो
वर्तन बिना चमक न हो।
टीवी बिना पिक्चर न हो
कोहली बिना सिक्सर न हो।
गाड़ी बिना तेल न हो
टंकी बिना पेट्रोल न हो।
घोड़ा बिना नाल न हो
सिर बिना बाल न हो।
मंत्री बिना गाड़ी न हो
बीवी बिना साड़ी न हो।
दफ्तर बिना फोन न हो
बैंक बिना लोन न हो।
बे-स्वाद कोई खाना न हो
पुलिस बिना थाना न हो।
दीपक बिना तेल न हो
कैदी बिना जेल न हो।
मुकदमा बिना फाईल न हो
सिम बिना मोबाइल न हो।
परिचय :- आशीष तिवारी निर्मल का जन्म मध्य प्रदेश के रीवा जिले के लालगांव कस्बे में सितंबर १९९० में हुआ। बचपन से ही ठहाके लगवा देने की सरल शैली व हिंदी और लोकभाषा बघेली पर लेखन करने की प्रबल इच्छाशक्ति ने आपको अल्प समय में ही कवि सम्मेलन मंच, आकाशवाणी, पत्र-पत्रिका व दूरदर्शन तक पहुँचा दीया। कई साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित युवा कवि आशीष तिवारी निर्मल वर्तमान समय में कवि सम्मेलन मंचों व लेखन में बेहद सक्रिय हैं, अपनी हास्य एवं व्यंग्य लेखन की वजह से लोकप्रिय हुए युवा कवि आशीष तिवारी निर्मल की रचनाओं में समाजिक विसंगतियों के साथ ही मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण, भारतीय ग्राम्य जीवन की झलक भी स्पष्ट झलकती है, इनकी रचनाओं का प्रकाशन एवं प्रसारण विविध पत्र-पत्रिकाओं एवं दूरदर्शन-आकाशवाणी के विविध केंद्रों से निरंतर हो रहा है। वर्तमान समय पर हिंदी और बघेली के प्रचार-प्रसार में जुटे हुए हैं।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। इस आलेख में व्यक्त किये गए विचार मरे स्वयं के हैं।
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